उम्मीदवारों की तैयारियों पर लगा ब्रेक, 26 मई को खत्म हो रहा पंचायतों का कार्यकाल उत्तर प्रदेश की राजनीति का सबसे बुनियादी और महत्वपूर्ण हिस्सा माने जाने वाले ग्राम पंचायत चुनावों के आयोजन को लेकर एक बड़ी और अहम खबर सामने आई है। जो भी भावी उम्मीदवार गांव की सरकार बनाने के लिए इस वर्ष प्रस्तावित पंचायत चुनावों की जोर-शोर से तैयारी कर रहे थे, उनके लिए यह खबर किसी बड़े झटके से कम नहीं है। अब यह लगभग तय हो गया है कि प्रदेश में पंचायत चुनाव अपने निर्धारित समय पर आयोजित नहीं हो पाएंगे और इनमें काफी देरी होगी। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में वर्तमान में कार्य कर रही ग्राम पंचायतों का पांच वर्ष का संवैधानिक कार्यकाल आगामी 26 मई 2026 को आधिकारिक रूप से समाप्त हो रहा है। नियमतः इस तारीख तक नई पंचायतों का गठन अनिवार्य था, लेकिन अब ऐसा होना नामुमकिन प्रतीत हो रहा है।
आयोग के 17 अप्रैल के पत्र ने किया स्थिति स्पष्ट, 21 अप्रैल से शुरू होगा शुद्धिकरण पंचायत चुनावों के टलने और इस भारी देरी की पुष्टि किसी और ने नहीं, बल्कि स्वयं राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा उठाए गए प्रशासनिक कदमों ने कर दी है। राज्य निर्वाचन आयोग के कार्यालय द्वारा 17 अप्रैल 2026 को एक आधिकारिक आदेश और विस्तृत पत्र जारी किया गया है, जिसने चुनाव में होने वाले विलंब के स्पष्ट संकेत दे दिए हैं। इस पत्र में आगामी पंचायत चुनावों के लिए एक नई और अद्यतन समय सारिणी जारी की गई है। आयोग के इस पत्र के अनुसार, मतदाता सूची को पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने के लिए 21 अप्रैल से एक विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत मतदाताओं के नामों के डुप्लीकेशन (दोहराव) को खत्म करने और वोटर लिस्ट के संपूर्ण कम्प्यूटीकरण से संबंधित सभी तकनीकी और जमीनी कार्यवाही की जाएगी, जो लगातार 28 मई 2026 तक चलेगी।
वार्ड मैपिंग से लेकर 10 जून तक फाइनल प्रकाशन, पिछड़ा वर्ग आयोग का भी पेंच निर्वाचन आयोग की इस नई गाइडलाइन के अनुसार, 28 मई को मतदाता सूची के कम्प्यूटरीकरण का काम खत्म होने के बाद प्रक्रिया का दूसरा और अहम चरण शुरू होगा। आयोग के पत्र के मुताबिक, कम्प्यूटरीकरण के उपरान्त 29 मई से लेकर 9 जून 2026 तक मतदान केन्द्रों और मतदेय स्थलों का उचित क्रमांकन किया जाएगा। इसके साथ ही, मतदेय स्थलों के अनुसार वार्डों की भौगोलिक मैपिंग, मतदाताओं का सही बूथों पर क्रमांकन, एसवीएन आवंटन, वेबसाइट से अद्यतन मतदाता सूची की डाउनलोडिंग और बूथों के लिए उसकी फोटो प्रतियां (प्रिंटआउट) निकालने का सारा काम इसी अवधि में पूरा किया जाएगा। इन सब प्रक्रियाओं के बाद अंततः 10 जून 2026 को निर्वाचक नामावलियों का अंतिम प्रकाशन होगा। चूंकि फाइनल वोटर लिस्ट ही 10 जून को आएगी और राज्य में अभी तक पिछड़ा वर्ग आयोग का विधिवत गठन भी नहीं हो सका है, इसलिए यह साफ है कि चुनाव समय पर किसी भी हालत में नहीं होंगे।
राज्य निर्वाचन आयुक्त के निर्देश: डीएम और निर्वाचन अधिकारियों पर जिम्मेदारी इस पूरे विशाल और जटिल चुनावी कार्य को समयबद्ध और सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने शासन स्तर पर सभी अधिकारियों की जिम्मेदारियां सुनिश्चित कर दी हैं। उत्तर प्रदेश के राज्य निर्वाचन आयुक्त राज प्रताप सिंह द्वारा जारी किए गए इस आधिकारिक पत्र में सख्त लहजे में कहा गया है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण का यह महत्वपूर्ण कार्य जिले के शीर्ष अधिकारियों की देखरेख में ही संपन्न होगा। पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि सभी जिलों के जिला मजिस्ट्रेट (जिलाधिकारी) जो कि जिला निर्वाचन अधिकारी (पंचायत एवं नगरीय निकाय) भी होते हैं, इसके साथ ही निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी एवं सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी व्यक्तिगत रुचि लेकर इस पूरी कार्यवाही को अपने निर्देशन में बिना किसी त्रुटि के पूर्ण कराएंगे।
छुट्टियों का नहीं मिलेगा लाभ, निर्वाचन कार्य के लिए खुले रहेंगे सभी कार्यालय पंचायत चुनाव की तैयारियों में पहले से ही हो चुके विलंब की भरपाई करने और काम को निर्धारित समय-सीमा (डेडलाइन) के भीतर पूरा करने के लिए निर्वाचन आयोग ने कड़े फैसले लिए हैं। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी किए गए पत्र में यह सख्त हिदायत दी गई है कि मतदाता सूची (निर्वाचक नामावली) के पुनरीक्षण अभियान के दौरान बीच में पड़ने वाले किसी भी सार्वजनिक अवकाश (रविवार या अन्य त्योहार) के दिवसों में कार्य रोका नहीं जाएगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि इन छुट्टियों के दिनों में भी निर्वाचन से संबंधित सभी सरकारी कार्यालय पूरी तरह से खुले रहेंगे और वहां तैनात अधिकारी व कर्मचारी अपनी ड्यूटी पर मौजूद रहेंगे। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि निर्धारित समय सारिणी के अनुसार निर्वाचक नामावली का यह अति महत्वपूर्ण कार्य बिना किसी बाधा के शत-प्रतिशत पूर्ण कराया जा सके।
पंचायती राज मंत्री के आरोप-प्रत्यारोप और इलाहाबाद हाईकोर्ट में कानूनी लड़ाई उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव समय पर न हो पाने के मुद्दे ने अब एक सियासी रंग भी ले लिया है और राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो गया है। आयोग के इस पत्र के जारी होने से कुछ समय पूर्व, यूपी सरकार के मौजूदा पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने भी मीडिया के सामने यह स्पष्ट संकेत दे दिया था कि पंचायत चुनाव अपने नियत समय पर नहीं हो सकेंगे। हालांकि, मंत्री राजभर ने इस देरी की जिम्मेदारी सरकार पर लेने के बजाय इसका पूरा दोष समाजवादी पार्टी (सपा) और अन्य विपक्षी दलों की बाधाओं पर मढ़ दिया था। राजनीतिक दांव-पेंच से इतर, पंचायत चुनाव के आरक्षण और वार्डों के परिसीमन को लेकर वर्तमान में कई जनहित याचिकाएं इलाहाबाद हाईकोर्ट की चौखट पर भी दाखिल हैं, जिन पर होने वाला अदालती फैसला भी इन चुनावों की दिशा और दशा तय करेगा।



































