सोशल मीडिया पर पोस्टर वॉर और सपा मुखिया अखिलेश की कड़ी प्रतिक्रिया उत्तर प्रदेश के सियासी अखाड़े में सोशल मीडिया के माध्यम से एक नया भूचाल आ गया है। भारतीय जनता पार्टी के आधिकारिक एक्स (ट्विटर) अकाउंट से जारी किए गए ‘वांटेड’ पोस्टर ने सियासी पारा चरम पर पहुंचा दिया है। इस कृत्य पर सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बेहद तल्ख और तीखी प्रतिक्रिया दर्ज कराई है। एक्स पर एक लंबा पोस्ट करते हुए सपा प्रमुख ने बीजेपी के इस कृत्य को निहायत ही अपमानजनक और स्तरहीन बताया है। उन्होंने अपने शब्दों में तीखापन लाते हुए लिखा कि सत्ताधारी पार्टी के आधिकारिक हैंडल से जिस तरह की अपमानजनक बात सार्वजनिक की गई है, वह वास्तव में उनके राजनीतिक और नैतिक दिवालियेपन का एक ऐसा पक्का दस्तावेज बन गया है जिसे देश के राजनीतिक इतिहास में सदैव काले अक्षरों में दर्ज किया जाएगा। भाजपा नेताओं की इस सोच पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि इनकी घृणित मानसिकता से किसी भी प्रकार की सभ्य आचरण की अपेक्षा करना व्यर्थ है। उन्होंने इस मानसिकता को इतना विषैला बताया कि इसे देखकर आस्तीन का सांप भी ग्लानि से आत्महत्या कर ले।
पचासी फीसदी पीडीए समाज की ताकत से डरी और सहमी सत्ताधारी पार्टी सपा मुखिया ने इस पोस्टर के पीछे की असली वजह भाजपा की राजनीतिक हताशा को बताया है। अखिलेश यादव ने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी संगठन हाल ही में मिले चुनावी झटकों और पराजय को अभी तक पचा नहीं पा रहे हैं। इस हार के बाद से उनके भीतर एक भयानक डर ने घर कर लिया है। यह डर देश की कुल 95 प्रतिशत जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करने वाले ‘पीडीए’ (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) समाज की उभरती हुई असीम ताकत का है। अखिलेश ने कहा कि भाजपा जानती है कि जब यह 95 फीसदी पीडीए समाज उनके कुकर्मों और दमनकारी नीतियों के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा हो जाएगा, तो सत्ताधारी दल का राजनीतिक सूपड़ा साफ हो जाएगा। इसी खौफ के साये में जीने के कारण भाजपा नेताओं के दिन का सुकून और रातों की नींद पूरी तरह से गायब हो चुकी है। अपनी जमीन खिसकती देख ये लोग हमेशा की तरह बौखलाहट में भूमिगत होकर बिलबिलाने लगे हैं और इस तरह के पोस्ट कर रहे हैं।
आजादी से पहले की गद्दारी और अकूत संपत्ति इकट्ठा करने का कड़ा जिक्र अपने वैचारिक प्रहार को तेज करते हुए अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी की विचारधारा के ऐतिहासिक अतीत पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने तीखे शब्दों में आरोप लगाया कि इन नकारात्मक शक्तियों का इतिहास ही गद्दारी का रहा है। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के संघर्ष के दौरान भी इन लोगों ने देश के साथ धोखा किया था और छिपकर (अंडरग्राउंड रहकर) देश को गुलाम बनाने वाली ताकतों की ही चाकरी की थी। अखिलेश ने आरोप मढ़ा कि इन लोगों ने चंद रुपयों और अंग्रेजों से मिलने वाले वजीफे के लालच में हमारे महान और वीर स्वतंत्रता सेनानियों के खिलाफ मुखबिरी करने जैसा शर्मनाक काम किया था। सपा नेता ने कहा कि अतीत में देश से विश्वासघात करके इन्होंने जो अकूत दौलत जमा की थी, वही भ्रष्टाचार आज भी जारी है। न तो उन्होंने कल कोई हिसाब दिया था और न ही आज वे देश के संसाधनों की लूट का कोई हिसाब दे रहे हैं, बल्कि ये समाज के लिए एक घातक ‘विषग्रंथि’ (जहर की गांठ) बन चुके हैं।
अपशब्दों का प्रयोग और पीडीए समाज के बढ़ते संकल्प की अजेय ताकत विरोधी दल की भाषा शैली पर करारी चोट करते हुए अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि व्यक्ति के शब्दकोश से उसके संस्कारों का पता चलता है। उन्होंने कहा कि भाजपाइयों का जैसा दूषित संस्कार है, वैसी ही निम्न स्तर की उनकी अभिव्यक्ति है। अखिलेश ने कहा कि भाजपा की वर्चस्ववादी और अहंकार से भरी सोच ने हमेशा से ही पीडीए समाज को हेय दृष्टि से देखा है और उनके लिए सदैव अपशब्दों का ही इस्तेमाल किया है। इसमें कोई नई बात नहीं है, यह उनका पुराना रवैया है। लेकिन, अखिलेश ने इसके परिणाम की ओर इशारा करते हुए कहा कि सत्ता पक्ष के लोग यह भूल जाते हैं कि जब-जब वे पीडीए समाज के किसी भी प्रतिनिधि का इस तरह अपमान करते हैं, तो उससे पीडीए समाज हतोत्साहित नहीं होता, बल्कि उनका संकल्प और भी ज्यादा फौलादी हो जाता है। ऐसे अपमानजनक कृत्यों से पीडीए की एकता और एकजुटता को तोड़ने के बजाय उसे और अधिक बल ही प्राप्त हुआ है।
सत्ताधारी दल के भीतर पिछड़े और दलित नेताओं की सियासी घेराबंदी इस मुद्दे के बहाने अखिलेश यादव ने सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी में मौजूद पिछड़े और दलित वर्ग के नेताओं की राजनीतिक विवशता पर भी गहरा वार किया। उन्होंने लिखा कि इस ‘वांटेड’ पोस्टर के माध्यम से भाजपा ने अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है और एक ऐसी विभाजनकारी लकीर खींच दी है जिसने खुद भाजपा में शामिल पीडीए समाज के सांसदों, विधायकों, पदाधिकारियों और आम कार्यकर्ताओं के राजनीतिक भविष्य को पूरी तरह से शून्य कर दिया है। अखिलेश ने सवाल किया कि जो पार्टी खुलेआम उनके समाज का अपमान कर रही है, उस पार्टी के नेता अब किस मुंह से अपने समाज के बीच जाकर खड़े होंगे? उन्होंने इसे भाजपा की एक गहरी और कुटिल चाल करार दिया, जिसका असली मकसद अपने ही दल के पीडीए नेताओं के राजनीतिक अस्तित्व की जड़ों को काटना और उनकी सियासत को सदा के लिए दफन कर देना है।
आंतरिक कलह, गैंगवार का अंत और डरपोक नेताओं का भविष्य सपा अध्यक्ष ने अपने विस्तृत बयान को समेटते हुए 2024 के आम चुनावों का हवाला दिया और कहा कि पीडीए समाज ने तो पहले ही ऐसे मौकापरस्त नेताओं का चुनावी बहिष्कार कर उन्हें हार का स्वाद चखा दिया था। अब इस घटना के बाद तो समाज में उनकी पूर्ण रूप से मानसिक नाकाबंदी हो जाएगी। अखिलेश ने भविष्यवाणी करते हुए कहा कि भाजपा को किसी और से नहीं बल्कि अपने ही चरम भ्रष्टाचार और आपसी अंतर्विरोधों से खतरा है, जो अब उसे अंतिम पतन की ओर ले जा रहा है। उन्होंने कहा कि जल्द ही इन ‘खलनायकों’ के बीच आपसी गैंगवार छिड़ेगी और ये एक-दूसरे के काले कारनामों को उजागर करके खुद ही नष्ट हो जाएंगे। इतिहास का यह अटल नियम है कि नकारात्मक ताकतें अंततः बिखर जाती हैं और इनके साथ भी यही हो रहा है। अपने पोस्ट का अंत करते हुए अखिलेश ने कड़ा तंज कसा कि अब भविष्य ही बताएगा कि ये दगाबाज लोग अपना सब कुछ हारने के बाद देश छोड़कर विदेश भाग जाते हैं या अपने कायरतापूर्ण इतिहास को दोहराते हुए किसी बिल में जाकर छिप जाते हैं, क्योंकि डरपोक लोगों के पास इसके अलावा कोई तीसरा विकल्प नहीं होता।



































