विपक्ष की संकीर्ण सोच और महिलाओं के हक की लड़ाई फिल्म स्टार और गोरखपुर से बीजेपी सांसद रवि किशन ने महिला आरक्षण बिल को लेकर छिड़ी बहस में विपक्षी दलों को खरी-खोटी सुनाई है। उन्होंने कहा कि जिन राजनीतिक दलों ने संसद में इस बिल का विरोध किया है, वे आज भी महिलाओं को बराबरी का दर्जा देने के पक्ष में नहीं हैं। रवि किशन ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का प्रयास महिलाओं को राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका देने का है, लेकिन विपक्षी दल उन्हें आज भी ‘चूल्हा-चौका’ तक ही सीमित रखना चाहते हैं। सांसद के अनुसार, विरोध करने वाले नेताओं की सोच यह है कि महिलाएं केवल घर की चारदीवारी के भीतर ही शोभा देती हैं, जबकि बीजेपी उन्हें संसद में देखना चाहती है।
राजनीतिक परिवारवाद और आंतरिक विरोधाभास पर प्रहार रवि किशन ने कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए इसे परिवारवादी राजनीति की पराकाष्ठा बताया। उन्होंने कहा कि जो लोग प्रियंका गांधी जैसी अपनी ही परिवार की महिलाओं को राजनीति के केंद्र में नहीं ला सके, वे देश की करोड़ों बेटियों को अधिकार देने की बात कैसे कर सकते हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं को डर है कि यदि महिलाओं को आरक्षण मिला, तो राजनीति से पुरुषों का एकाधिकार समाप्त हो जाएगा। यही भय उन्हें महिला सशक्तिकरण के मार्ग में बाधक बनने के लिए प्रेरित कर रहा है, जो कि अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।
गोरखपुर की जनसंख्या और जनप्रतिनिधि की सीमाएं बलिया में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में रवि किशन ने संसदीय क्षेत्र की जटिलताओं पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि गोरखपुर जैसे बड़े जिले की आबादी 50 लाख को पार कर चुकी है। एक सांसद के लिए यह संभव ही नहीं है कि वह अपने पांच साल के कार्यकाल में प्रत्येक नागरिक से व्यक्तिगत रूप से मिल सके या हर गली-मोहल्ले की समस्या का समाधान कर सके। उन्होंने स्वीकार किया कि पांच बार का सांसद भी इतनी विशाल जनसंख्या के हर घर तक नहीं पहुँच सकता। इसी संदर्भ में उन्होंने सांसदों की संख्या बढ़ाने और महिला आरक्षण के माध्यम से प्रतिनिधित्व को अधिक समावेशी बनाने की वकालत की।
बेटियों के सशक्तिकरण के लिए परिसीमन का महत्व बीजेपी सांसद ने महिला आरक्षण बिल में परिसीमन की भूमिका को न्यायसंगत ठहराया। उन्होंने कहा कि जब यह प्रक्रिया पूर्ण होगी, तब हर जिले से पढ़ी-लिखी बेटियां, समर्पित महिला कार्यकर्ता और ग्राम स्तर पर कार्य करने वाली बहनें विधायक और सांसद के रूप में देश का नेतृत्व करेंगी। उन्होंने अनुमान लगाया कि बढ़ती आबादी को देखते हुए भविष्य में सांसदों की संख्या 850 तक होनी चाहिए, ताकि लोकतंत्र और अधिक सुदृढ़ हो सके। रवि किशन ने कहा कि विपक्ष का विरोध केवल प्रक्रिया का नहीं, बल्कि महिलाओं को मिलने वाले उस सम्मान का है जिसे वे कभी स्वीकार नहीं कर पाएंगे।
विपक्षी दलों की सूची और ‘महिला विरोधी’ लेबल रवि किशन ने क्षेत्रीय और राष्ट्रीय दलों के गठबंधन ‘इंडी’ पर हमला बोलते हुए कहा कि सपा, कांग्रेस, टीएमसी और दक्षिण की पार्टियां केवल अपने परिवारों को बचाने में लगी हैं। उन्होंने विशेष रूप से ममता बनर्जी के भतीजे और स्टालिन के नेतृत्व वाली राजनीति का जिक्र किया और कहा कि इन सभी ने मिलकर नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध किया है। उन्होंने इन दलों को ‘महिला विरोधी’ करार देते हुए कहा कि इनकी नीतियों में आधी आबादी के लिए कोई स्थान नहीं है। रवि किशन ने जनता से अपील की कि वे इन दलों की असलियत को पहचानें जो केवल वोट बैंक की राजनीति करते हैं।
मोदी की गारंटी और भविष्य की राजनीतिक रूपरेखा अंत में, रवि किशन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर अटूट विश्वास जताते हुए कहा कि मोदी जो कहते हैं, वह करके दिखाते हैं। उन्होंने विपक्ष को सचेत किया कि वे इस बिल के गिरने पर खुश न हों, क्योंकि 2029 में बीजेपी प्रचंड बहुमत के साथ पुनः सत्तासीन होगी और इस विधेयक को पारित कराना उनकी प्राथमिकता होगी। रवि किशन ने कहा कि इतिहास साक्षी है कि प्रधानमंत्री ने अनुच्छेद 370 और राम मंदिर जैसे कठिन संकल्पों को पूरा किया है, और महिला आरक्षण भी उनकी इसी अटूट प्रतिबद्धता का हिस्सा है जिसे वे हर हाल में पूरा करेंगे।



































