प्राथमिक शिक्षा में गुणवत्ता का नया सवेरा उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में एक बड़ा सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है, जहाँ योगी आदित्यनाथ सरकार की नीतियों ने प्राथमिक विद्यालयों के स्वरूप और शिक्षा के स्तर को बदल दिया है। निपुण भारत मिशन के तहत कराए गए हालिया सर्वे में 32,480 स्कूलों ने अपनी शैक्षणिक श्रेष्ठता सिद्ध करते हुए ‘निपुण विद्यालय’ का दर्जा प्राप्त कर लिया है। इन स्कूलों में पहली और दूसरी कक्षा के कम से कम 80 फीसदी बच्चों ने अपनी बुनियादी साक्षरता और अंक ज्ञान (भाषा और गणित) में अपेक्षित सफलता पा ली है। शिक्षा के प्रति यह गंभीर दृष्टिकोण प्रदेश के भविष्य को उज्ज्वल बनाने की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।
डीएलएड प्रशिक्षुओं द्वारा जमीनी स्तर पर सटीक आकलन मूल्यांकन प्रणाली को संदेह से परे रखने के लिए सरकार ने इस बार डीएलएड प्रशिक्षुओं को धरातल पर उतारा। इन युवा प्रशिक्षुओं ने क्लासरूम में जाकर प्रत्येक बच्चे की सीखने की गति और समझ का वास्तविक परीक्षण किया। यह एक स्वतंत्र और निष्पक्ष प्रक्रिया थी, जिसकी रिपोर्ट सीधे निपुण भारत मॉनिटरिंग सेंटर को भेजी गई। इस डिजिटल रिपोर्टिंग ने जिला स्तर से लेकर ब्लॉक स्तर तक के अधिकारियों को वास्तविक डेटा उपलब्ध कराया है। पारदर्शी रिपोर्टिंग के कारण अब प्रधानाध्यापकों के पास सुधार के स्पष्ट क्षेत्र मौजूद हैं, जिससे शिक्षा के प्रबंधन में अभूतपूर्व सुधार आया है।
सफलता के शिखर पर हरदोई और अलीगढ़ जैसे जिले निपुण भारत मिशन की रैंकिंग में प्रदेश के विभिन्न जनपदों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा देखने को मिली है। हरदोई जिला शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी बनकर उभरा है, जहाँ 1002 प्राथमिक विद्यालयों ने निपुण मानकों को पूरा किया है। इसी प्रकार, अलीगढ़ में 969 और शाहजहांपुर में 916 विद्यालय निपुण पाए गए। महाराजगंज (874) और खीरी (830) ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए शीर्ष सूची में स्थान बनाया। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि इन जिलों में शिक्षकों के प्रशिक्षण और छात्र केंद्रित शिक्षण पद्धतियों पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिसका लाभ अब हजारों बच्चों को मिल रहा है।
निपुण स्कूलों को वित्तीय अनुदान और शिक्षकों की हौसलाअफजाई सरकार ने निपुण स्कूलों की सफलता को सम्मानित करने के लिए आर्थिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर पहल की है। निपुण घोषित होने वाले प्रत्येक विद्यालय के लिए 50 हजार रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इस फंड का उपयोग स्कूल की शैक्षणिक व्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर को और भी आधुनिक बनाने के लिए किया जाएगा। साथ ही, बेहतर शिक्षण कार्य करने वाले अध्यापकों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष सम्मान समारोह आयोजित किए जा रहे हैं। स्कूलों के गेट पर ‘निपुण’ का लोगो लगाया जा रहा है, जो अभिभावकों के बीच स्कूल की विश्वसनीयता बढ़ा रहा है और शिक्षकों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना भर रहा है।
कायाकल्प और डिजिटल इंडिया के माध्यम से शिक्षा का सुदृढ़ीकरण उत्तर प्रदेश के स्कूलों में आए इस बदलाव का आधार ‘ऑपरेशन कायाकल्प’ और डिजिटल शिक्षण अभियान है। प्रदेश के 1.32 लाख स्कूलों में टाइल्स, शौचालय, बिजली और शुद्ध पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं। डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने के लिए लाखों शिक्षकों को टैबलेट और स्कूलों को स्मार्ट क्लास की सुविधा दी गई है। इसके साथ ही, शिक्षकों को विशेष रूप से छात्रों में पढ़ने और गणना करने की दक्षता विकसित करने का प्रशिक्षण दिया गया है। ‘स्कूल चलो अभियान’ के सफल क्रियान्वयन से नामांकित छात्रों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है, जिससे शिक्षा का अधिकार हर बच्चे तक पहुँच रहा है।
नामांकन से दक्षता की ओर बढ़ता यूपी का गौरव शैक्षणिक सत्र 2025-26 के दौरान 1.07 लाख से अधिक परिषदीय स्कूलों की जाँच की गई, जिनमें से 32 हजार से ज्यादा स्कूलों का निपुण होना एक बड़ी उपलब्धि है। यह परिणाम दर्शाते हैं कि उत्तर प्रदेश की बेसिक शिक्षा अब केवल उपस्थिति दर्ज करने तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों के बौद्धिक विकास और दक्षता पर केंद्रित हो गई है। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे उन स्कूलों पर विशेष फोकस करें जो इस बार लक्ष्य से चूक गए हैं। सरकार की योजना आने वाले समय में प्रदेश के सभी प्राथमिक स्कूलों को ‘निपुण’ बनाने की है, ताकि हर बच्चा एक सशक्त और शिक्षित नागरिक बन सके।



































