राजधानी के सबसे बड़े अस्पताल में ठगी का जाल लखनऊ के केजीएमयू जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में जालसाजी का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ मरीजों और उनके सहायक तीमारदारों को अपना शिकार बनाने वाले एक फर्जी शख्स, हस्साम अहमद को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी ‘कार्डियो सेवा संस्थान’ के नाम पर अवैध रूप से धन इकट्ठा कर रहा था और स्वयं को अस्पताल का हितैषी बताकर लोगों को ठग रहा था। थाना चौक पुलिस की इस सफल कार्रवाई ने अस्पताल परिसर में छिपे एक अपराधी को बेनकाब कर दिया है, जो लंबे समय से भोली-भाली जनता को निशाना बना रहा था।
प्रशासनिक सतर्कता और कानूनी हस्तक्षेप इस धोखाधड़ी का संज्ञान केजीएमयू के प्रॉक्टर कार्यालय ने लिया, जहाँ चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर आर.एस. कुशवाहा ने आधिकारिक तौर पर पुलिस को लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में हस्साम अहमद की तमाम संदिग्ध और अनैतिक गतिविधियों का विस्तार से वर्णन किया गया था। पुलिस ने इस पत्र को आधार मानकर जांच शुरू की और परिसर में अपनी निगरानी बढ़ा दी। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि केजीएमयू जैसे पवित्र सेवा संस्थान की छवि ऐसे अपराधियों के कारण धूमिल न हो और मरीजों का विश्वास अस्पताल प्रबंधन पर बना रहे।
विद्यार्थियों द्वारा अपराधी का घेराव और धरपकड़ इस अपराधी को सलाखों के पीछे पहुँचाने का श्रेय केजीएमयू के उन एमबीबीएस छात्रों को जाता है जिन्होंने सजगता दिखाते हुए हस्साम को रंगे हाथों पकड़ा। हस्साम कथित रूप से मरीजों के बेड तक पहुँच कर उन्हें बेहतर इलाज का झांसा देता था और बदले में उनके परिजनों से मोटी रकम वसूलता था। उसने ‘कार्डियो सेवा संस्थान’ के नाम का एक मुखौटा ओढ़ रखा था ताकि कोई उस पर शक न करे। छात्रों की इस त्वरित प्रतिक्रिया ने यह साबित कर दिया कि यदि युवा वर्ग सतर्क रहे, तो समाज में व्याप्त ऐसी बुराइयों को जड़ से मिटाया जा सकता है।
प्रोफेसर के नाम का दुरुपयोग और नकली दस्तावेज पुलिसिया तफ्तीश में यह खुलासा हुआ कि आरोपी ने केवल वित्तीय ठगी ही नहीं की, बल्कि उसने जाली दस्तावेज बनाने में भी महारत हासिल कर रखी थी। 13 अप्रैल 2026 को उसने डॉ. केके सिंह (डीन पैरामेडिकल) के फर्जी साइन बनाकर एक फर्जी सूचना पत्र तैयार किया। इस पत्र के माध्यम से उसने 2023 बैच के एमबीबीएस छात्रों को दिल्ली एम्स में होने वाली एक बनावटी कॉन्फ्रेंस के बारे में सूचित किया था। आरोपी ने इतनी सफाई से जाली हस्ताक्षर किए थे कि पहली नजर में किसी को भी संदेह न हो, जो उसके शातिर दिमाग की ओर इशारा करता है।
साजिश के पीछे के छिपे हुए खतरनाक मंसूबे आरोपी के मोबाइल और अन्य दस्तावेजों से यह संकेत मिले हैं कि वह एमबीबीएस छात्राओं को शिक्षा और कॉन्फ्रेंस के नाम पर झांसा देकर दिल्ली या अन्य शहरों में ले जाने की योजना बना रहा था। उसका यह कदम किसी बड़ी साजिश का हिस्सा प्रतीत होता है, जिसकी अब पुलिस गहनता से छानबीन कर रही है। हस्साम अहमद के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर उसे जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस ठगी के खेल में अस्पताल के भीतर का भी कोई व्यक्ति उसके साथ संलिप्त था या नहीं।
भावुकता और मजबूरी का फायदा उठाने वाले ठगों से बचाव समाज के लिए यह एक अत्यंत चिंताजनक विषय है कि अपराधी अब अस्पतालों को अपना निशाना बना रहे हैं। मरीज और उसके परिजन जब केजीएमयू जैसे अस्पतालों में आते हैं, तो वे भावनात्मक रूप से बहुत कमजोर होते हैं। ऐसे समय में ठगों द्वारा दी गई मदद की झूठी उम्मीद उन्हें बड़े आर्थिक नुकसान में धकेल देती है। जानकारों का कहना है कि किसी भी प्रकार की सहायता के लिए केवल अधिकृत कर्मचारियों और हेल्प डेस्क से ही संपर्क करना चाहिए। किसी भी संदेहास्पद गतिविधि की सूचना तुरंत प्रॉक्टर कार्यालय या स्थानीय पुलिस को देना ही समझदारी है।



































