कूटनीतिक गतिरोध और अमेरिकी नौसैनिक घेराबंदी का प्रभाव ईरान और अमेरिका के मध्य शांति की संभावनाएं फिलहाल धुंधली दिखाई दे रही हैं, क्योंकि वार्ता के दूसरे चरण की कोई भी तारीख तय करने में दोनों पक्ष विफल रहे हैं। जमीनी हकीकत यह है कि अमेरिकी नौसेना ने ईरानी समुद्री सीमाओं और बंदरगाहों पर एक सख्त घेराबंदी कर रखी है, जिससे ईरानी अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव पड़ रहा है। ईरान के नेतृत्व ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए यह शर्त रखी है कि जब तक यह ब्लॉकेड हटाया नहीं जाता, तब तक बातचीत की मेज पर बैठना निरर्थक है। दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सामरिक लचीलापन दिखाते हुए युद्धविराम को अनिश्चित काल के लिए विस्तारित कर दिया है। ट्रंप का यह कदम युद्ध टालने की कोशिश है या किसी बड़े हमले की तैयारी के लिए समय लेना, यह अभी भविष्य के गर्भ में है।
जनता का सैन्य समर्थन और मध्य-पूर्व में अमेरिकी सामरिक जमावड़ा ईरान की राजधानी तेहरान और अन्य प्रमुख शहरों में जनभावनाएं उफान पर हैं। हजारों लोग अपनी सरकार और आईआरजीसी (IRGC) के पक्ष में सड़कों पर उतर आए हैं, जो पश्चिमी शक्तियों के खिलाफ एक शक्तिशाली प्रतिरोध का प्रतीक है। यह ‘जन-सैलाब’ अमेरिकी प्रतिबंधों और सैन्य धमकियों के खिलाफ ईरानी प्रतिरोध की ताकत को दर्शाता है। इसके विपरीत, अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) ने स्वीकार किया है कि उसने मध्य-पूर्व में अपनी ‘सबसे मारक और घातक’ सैन्य शक्ति तैनात कर दी है। सेंटकॉम की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका की सभी सैन्य शाखाएं किसी भी संभावित संघर्ष का सामना करने के लिए युद्ध स्तर पर तैयार हैं, जो क्षेत्र में तनाव को चरम सीमा पर ले जा रहा है।
समुद्री विवाद और व्हाइट हाउस का अनिश्चित दृष्टिकोण पनामा के ध्वज वाले एक कंटेनर पोत को ईरान द्वारा होर्मुज के संकरे जलमार्ग में जब्त किए जाने से अंतर्राष्ट्रीय राजनय में नया विवाद खड़ा हो गया है। पनामा सरकार ने इसे नौवहन की स्वतंत्रता का उल्लंघन बताते हुए ईरान की कड़ी निंदा की है। इस कार्रवाई का वीडियो जारी कर ईरान ने अपनी नौसैनिक क्षमता का प्रदर्शन किया है। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने इस पूरे घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए कहा कि प्रशासन ने ईरान के लिए कोई निश्चित ‘डेडलाइन’ तय नहीं की है। ट्रंप प्रशासन का यह ढुलमुल रवैया दर्शाता है कि वे ईरान को अपनी शर्तों पर झुकने के लिए मजबूर करना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए वे सैन्य बल के बजाय समय का उपयोग कर रहे हैं।
सैन्य शक्ति का प्रदर्शन: ड्रोन तकनीक और मिसाइल परीक्षण ईरान ने अपनी रक्षात्मक और आक्रामक क्षमताओं को प्रदर्शित करने के लिए हाल ही में बड़े पैमाने पर ‘ड्रोन रैली’ का आयोजन किया। इस प्रदर्शनी में शाहेद श्रेणी के विभिन्न ड्रोनों का प्रदर्शन किया गया, जिसमें एक विशिष्ट गुलाबी (पिंक) रंग का शाहेद ड्रोन मुख्य आकर्षण रहा। इससे पहले ईरान ने अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों का प्रदर्शन कर यह संकेत दिया था कि उसकी पहुंच इजरायल और मध्य-पूर्व में स्थित अमेरिकी ठिकानों तक बहुत आसान है। ये रैलियां न केवल विदेशी दुश्मनों को डराने के लिए हैं, बल्कि घरेलू स्तर पर भी यह संदेश देने के लिए हैं कि ईरान किसी भी आक्रमण का जवाब देने में सक्षम है।
युद्ध की मानवीय त्रासदी और समुद्री व्यापार पर प्रतिबंध युद्ध केवल सैन्य क्षति नहीं पहुँचाता, बल्कि निर्दोषों की जान भी लेता है। लेबनान में इजरायली बमबारी के दौरान महिला पत्रकार अमल खलील की मौत इसका जीता-जागता उदाहरण है। वे संघर्ष के दौरान साहसपूर्वक रिपोर्टिंग कर रही थीं, लेकिन एक हवाई हमले ने उनके जीवन का अंत कर दिया। यह संघर्ष अब पत्रकारिता और मानवाधिकारों के लिए एक बड़ा संकट बन गया है। समुद्र में भी स्थिति गंभीर है; अमेरिकी नौसेना ने अब तक 31 जहाजों को ईरानी तटों पर जाने से रोक दिया है, जिनमें से अधिकांश ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण तेल टैंकर थे। यह कदम ईरान के राजस्व स्रोतों को पूरी तरह से सुखाने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
ईरान की परमाणु चुनौती और अमेरिकी प्रशासन में आंतरिक संकट ईरान ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को झकझोरते हुए यह ऐलान कर दिया है कि वह अपनी परमाणु गतिविधियों को सीमित करने वाले सभी समझौतों को रद्दी की टोकरी में फेंकने को तैयार है। तेहरान का यह दावा कि परमाणु हथियार रखना उसका ‘संप्रभु अधिकार’ है, वैश्विक परमाणु अप्रसार प्रयासों के लिए एक बड़ी चुनौती है। इसी उथल-पुथल के बीच, अमेरिका के नौसेना सचिव जॉन फेलन का इस्तीफा ट्रंप सरकार के लिए एक आंतरिक संकट पैदा कर रहा है। पेंटागन के वरिष्ठ अधिकारियों का इस तरह पद छोड़ना युद्ध की नीतियों पर असहमति को दर्शाता है। अंततः, राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ किया है कि वे चुनावों के कारण किसी दबाव में नहीं हैं और ईरान संघर्ष को वे अपनी सुविधानुसार सुलझाएंगे।



































