खतरनाक ड्रमंडगंज घाटी में मौत का तांडव और हृदयविदारक हादसा मिर्जापुर जिले के ड्रमंडगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाली पहाड़ी घाटी में बुधवार की शाम एक ऐसी त्रासदी घटित हुई जिसने समूचे उत्तर प्रदेश को हिलाकर रख दिया है। घाटी की ढलान उतर रहे एक भारी ट्रक की ब्रेक प्रणाली के अचानक विफल हो जाने से एक भीषण श्रृंखलावार दुर्घटना हुई, जिसमें 11 निर्दोष लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। पुलिस और प्रशासन से प्राप्त सूचना के अनुसार, अनियंत्रित ट्रक ने सामने से आ रहे और आगे चल रहे कई वाहनों को अपनी चपेट में ले लिया। सबसे दुखद पहलू यह रहा कि टक्कर के पश्चात एक यात्री कार आग के गोले में तब्दील हो गई, जिसमें फंसे हुए आधा दर्जन लोगों को जीवित ही जलना पड़ा। पुलिस अधीक्षक ने इस घटना को जनपद के इतिहास की सबसे दर्दनाक सड़क दुर्घटनाओं में से एक बताया है।
हादसे का घटनाक्रम और अग्नि कांड की भयावहता घटना का विवरण देते हुए अधिकारियों ने बताया कि ट्रक मध्य प्रदेश से अनाज की खेप लेकर मिर्जापुर की ओर जा रहा था। जैसे ही ट्रक ‘बड़का घुमान’ मोड़ के पास पहुँचा, उसके ब्रेक ने काम करना बंद कर दिया। बेकाबू ट्रक ने सबसे पहले एक बोलेरो गाड़ी को टक्कर मारी और उसके बाद एक स्विफ्ट डिजायर कार को पीछे से इतनी जोर से धक्का दिया कि वह कार आगे चल रहे एक ट्रेलर के नीचे जा घुसी। ट्रेलर में लदी निर्माण सामग्री और जोरदार भिड़ंत के कारण कार में तत्काल विस्फोट हुआ और भीषण आग लग गई। कार में सवार लोग अंदर ही फंस गए और उन्हें बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिला। इस अग्निकांड ने न केवल कार सवारों को बल्कि अन्य वाहनों को भी अपनी चपेट में ले लिया।
सरकारी सहायता और प्रधानमंत्री की संवेदना का संदेश इस भीषण सड़क दुर्घटना पर संज्ञान लेते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय ने तत्काल राहत की घोषणा की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हादसे को अत्यंत दुखद बताते हुए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से मृतकों के वारिसों को 2-2 लाख रुपये की सांत्वना राशि देने का निर्देश दिया है। वहीं, गंभीर रूप से घायल हुए प्रत्येक व्यक्ति के उपचार हेतु 50,000 रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी। स्थानीय प्रशासन ने भी घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इस घोषणा का उद्देश्य पीड़ित परिवारों को इस दुख की घड़ी में वित्तीय सहायता प्रदान कर उनका ढांढस बंधाना है।
ट्रक की यात्रा और तकनीकी विफलता का मुख्य केंद्र जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि ट्रक एमपी (मध्य प्रदेश) की ओर से चना लादकर आ रहा था और मिर्जापुर की ओर जा रहा था। ड्रमंडगंज घाटी अपनी संकरी सड़कों और तीखे ढलानों के लिए जानी जाती है, जहाँ भारी वाहनों के लिए अत्यधिक सावधानी की आवश्यकता होती है। ब्रेक फेल होने के कारण ट्रक की गति इतनी तीव्र हो गई थी कि वह सामने आने वाली हर वस्तु को कुचलता चला गया। स्विफ्ट डिजायर कार का ट्रेलर के पिछले हिस्से में समा जाना और उसके पश्चात लगी आग ने इस दुर्घटना को एक नरसंहार में बदल दिया। परिवहन विभाग की टीम अब ट्रक की यांत्रिक स्थिति की गहन जांच कर रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कहीं यह लापरवाही का मामला तो नहीं है।
रेस्क्यू ऑपरेशन और पुलिस की तत्काल सक्रियता जैसे ही दुर्घटना की सूचना स्थानीय थाने और फायर स्टेशन को मिली, पुलिस और दमकल की गाड़ियां युद्ध स्तर पर सक्रिय हो गईं। आग इतनी भीषण थी कि दूर-दूर तक इसकी लपटें और धुआं देखा जा सकता था। फायर ब्रिगेड की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद आग बुझाई और गैस कटर की मदद से वाहनों के लोहे को काटकर शवों को बाहर निकाला। पुलिस ने बताया कि 11 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें से कई की पहचान उनके जले हुए अवशेषों और वाहनों के पंजीकरण नंबरों से की जा रही है। पुलिस अधीक्षक स्वयं मौके पर मौजूद रहे और राहत कार्यों की निगरानी की ताकि यातायात को पुनः बहाल किया जा सके।
सुरक्षा मानकों पर सवाल और जनमानस में गहरा आक्रोश इस दर्दनाक हादसे ने घाटी में सुरक्षा मानकों और भारी वाहनों की नियमित चेकिंग की आवश्यकता को पुनः रेखांकित किया है। स्थानीय निवासियों में इस बात को लेकर गहरा असंतोष है कि घाटी के खतरनाक मोड़ों पर आवश्यक सुरक्षा घेरे और चेतावनी बोर्डों का अभाव है। मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और समूचे जनपद में शोक की लहर व्याप्त है। पुलिस ने मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली है और फरार ट्रक चालक की तलाश की जा रही है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए घाटी के संकरी मार्गों पर कड़े सुरक्षा नियम लागू किए जाएंगे और वाहनों की फिटनेस जांच को और अधिक सख्त बनाया जाएगा।



































