एक्सप्रेस-वे बना रनवे: वायुसेना के दो दिवसीय अभ्यास का भव्य शुभारंभ सुलतानपुर की धरती बुधवार, 22 अप्रैल 2026 को एक बार फिर भारतीय वायुसेना के शौर्य की साक्षी बनी। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर स्थित विशेष सामरिक पट्टी पर वायुसेना के अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों ने अपने ‘टच-एंड-गो’ अभ्यास का प्रथम चरण सफलतापूर्वक आरंभ किया। यह ऑपरेशन वायुसेना की उस तैयारी का प्रतिबिंब है, जिसके तहत युद्ध जैसी परिस्थितियों में हवाई अड्डों के क्षतिग्रस्त होने पर एक्सप्रेस-वे को वैकल्पिक हवाई पट्टी के रूप में प्रयोग किया जा सके। जैसे ही आसमान से चील की तरह झपटते हुए सुखोई और मिराज विमानों ने रनवे को स्पर्श किया, उनकी गर्जना से कई किलोमीटर तक का क्षेत्र गूँज उठा। सुरक्षा कारणों से पूरे हवाई पट्टी क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया है और कड़े प्रतिबंध लागू किए गए हैं ताकि अभ्यास निर्बाध रूप से संपन्न हो सके।
अरवल-किरी करवत हवाई पट्टी पर आधुनिक तकनीक का सामंजस्य अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि वर्तमान युद्धाभ्यास अरवल-किरी करवत के निकट स्थित रनवे खंड पर आयोजित किया जा रहा है। किसी भी आधुनिक हवाई अड्डे की तर्ज पर, यहाँ भी एक मोबाइल एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) वैन तैनात की गई है, जो पायलटों को लैंडिंग और टेक-ऑफ के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान कर रही है। विमानों की गति और मौसम की स्थिति का पल-पल का विवरण इस नियंत्रण कक्ष से साझा किया जा रहा है। यह अभ्यास इस दृष्टि से महत्वपूर्ण है कि यह अत्यंत कम समय में नागरिक बुनियादी ढांचे को सैन्य उपयोग के योग्य बनाने की भारतीय वायुसेना की दक्षता को प्रमाणित करता है। वायुसेना के तकनीकी विशेषज्ञों की टीम रनवे की गुणवत्ता और घर्षण क्षमता का भी निरंतर विश्लेषण कर रही है।
सुरक्षा घेरा और अफवाहों के विरुद्ध प्रशासनिक चेतावनी स्थानीय प्रशासन ने अभ्यास की संवेदनशीलता को देखते हुए हवाई पट्टी के चारों ओर बहुस्तरीय सुरक्षा घेरा तैनात किया है। सुलतानपुर के जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक ने संयुक्त रूप से लोगों से अपील की है कि वे विमानों को देखने के लिए रनवे के समीप एकत्र न हों और एक सुरक्षित फासला बनाए रखें। इसके साथ ही, सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की अपुष्ट सूचना या दहशत फैलाने वाली अफवाहों के प्रति कड़ी चेतावनी जारी की गई है। पुलिस बल के जवान आसपास के गांवों में गश्त कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि युद्धाभ्यास के दौरान कोई भी बाहरी व्यक्ति या पशु हवाई पट्टी के निकट न आने पाए। यह सतर्कता वायुसेना और नागरिक प्रशासन के बीच उच्च स्तरीय समन्वय को दर्शाती है।
यातायात का पुनर्गठन और नागरिकों के लिए डाइवर्जन की योजना सामरिक अभ्यास की सफलता सुनिश्चित करने हेतु एक्सप्रेस-वे के 12 किलोमीटर लंबे खंड को सामान्य यातायात के लिए अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, यह प्रतिबंध 1 मई तक प्रभावी रहेगा, जिसके दौरान सभी प्रकार के वाहनों को निर्धारित वैकल्पिक मार्गों की ओर भेजा जा रहा है। एक्सप्रेस-वे के इस खंड पर अवरोधक लगाए गए हैं और यातायात पुलिस की विशेष टीमें वाहन चालकों का मार्गदर्शन कर रही हैं। यह सुनिश्चित किया गया है कि डाइवर्जन के बावजूद आवश्यक सेवाओं में कोई व्यवधान न आए। युद्धाभ्यास की समस्त प्रक्रियाओं के पूर्ण होने के पश्चात, 2 मई की प्रातः से यात्रियों के लिए एक्सप्रेस-वे का यह हिस्सा पुनः खोल दिया जाएगा, जिससे पूर्वांचल की कनेक्टिविटी सामान्य हो जाएगी।
विगत वर्षों का अनुभव और अत्याधुनिक विमानों की भागीदारी पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर इस प्रकार के साहसिक अभ्यासों का एक लंबा इतिहास रहा है। जून 2023 में भी यहाँ सुखोई और मिराज जैसे विमानों ने अपनी कुशलता का परिचय दिया था। इस हवाई पट्टी की नींव ही सामरिक महत्व के साथ रखी गई थी, जिसका उद्घाटन नवंबर 2021 में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा स्वयं सी-130जे सुपर हरक्यूलिस विमान से उतरकर किया गया था। इस वर्ष के अभ्यास में सुखोई-30 एमकेआई, मिराज-2000, स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस और जगुआर जैसे विमान हिस्सा ले रहे हैं। इन विमानों ने दोपहर दो बजे से शाम पांच बजे तक और पुनः शाम छह बजे से रात नौ बजे तक की शिफ्ट में कई बार टच-एंड-गो ऑपरेशन किए, जो वायुसेना की रात में ऑपरेशन करने की क्षमता को भी निखारते हैं।
राष्ट्र रक्षा का संकल्प और भविष्य की चुनौतियां संयोगवश, 22 अप्रैल की तारीख पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी के रूप में भी दर्ज है, जिसने राष्ट्र को गहरे जख्म दिए थे। ऐसे समय में भारतीय वायुसेना का यह जीवंत प्रदर्शन देश के शत्रुओं को एक कड़ा संदेश है कि भारत की रक्षा पंक्तियाँ अभेद्य हैं। इमरान नामक एक अधिकारी ने मीडिया को बताया कि अभ्यास के दौरान विमानों ने कई बार रनवे को छूकर पुनः उड़ान भरी, जिससे पायलटों के कौशल में वृद्धि होती है। इस आयोजन ने न केवल वायुसेना की युद्धक क्षमता को बढ़ाया है, बल्कि आम नागरिकों के मन में अपनी सेना के प्रति गौरव और सुरक्षा की भावना को भी सुदृढ़ किया है। जैसे-जैसे लड़ाकू विमान आसमान को चीरते हुए निकल रहे थे, वह दृश्य आधुनिक भारत की बढ़ती सैन्य शक्ति का जीवंत प्रमाण था।



































