चुनावी रणभेरी से पूर्व जातियों को गोलबंद करने की मची होड़ उत्तर प्रदेश की राजनीतिक फिजा में आगामी विधानसभा चुनावों की गूँज अभी से अनुभव की जाने लगी है, जहाँ प्रत्येक राजनीतिक खेमा अपने वोट बैंक को सुरक्षित करने हेतु जातिगत किलेबंदी में व्यस्त है। राज्य में विकास के दावों के समानांतर जातिगत हितों को साधने की जो प्रक्रिया शुरू हुई है, वह यह संकेत देती है कि इस बार का मुकाबला अत्यंत कड़ा होने वाला है। विशेष रूप से नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर सत्ता पक्ष की सक्रियता और विपक्ष के प्रतिवाद ने महिलाओं को चुनावी एजेंडे के केंद्र में ला खड़ा किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा महिला पदयात्रा का नेतृत्व करना इस बात का प्रमाण है कि भाजपा महिला सुरक्षा और सम्मान को चुनावी वैतरणी पार करने का मुख्य आधार मान रही है।
राजभर समुदाय के इर्द-गिर्द घूमती यूपी की नई सियासत वर्तमान में उत्तर प्रदेश की राजनीति का सबसे चर्चित अध्याय ‘राजभर’ राजनीति है। समाजवादी पार्टी के आलाकमान अखिलेश यादव ने जूही सिंह के स्थान पर सीमा राजभर को महिला विंग की कमान सौंपकर एक बड़ा राजनीतिक दांव खेला है। सपा का यह कदम भाजपा के उस एकाधिकार को चुनौती देने के लिए है, जो उसने ओपी राजभर के एनडीए में शामिल होने के बाद बनाया था। भाजपा ने तुरंत पलटवार करते हुए इस नियुक्ति को वैचारिक रूप से संदिग्ध बताया और राजभर समुदाय को महाराजा सुहेलदेव के गौरवशाली इतिहास की याद दिलाई। दोनों दलों के बीच जारी यह खींचतान स्पष्ट करती है कि आगामी चुनावों में राजभर वोटों का ध्रुवीकरण सत्ता की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
सत्ता और संगठन का समन्वय: योगी और ओपी राजभर की साझा रणनीति उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और कैबिनेट मंत्री ओपी राजभर की बढ़ती निकटता चर्चा का विषय बनी हुई है। महिला पदयात्रा के दौरान दोनों नेताओं का एक साथ दिखना इस गठबंधन की मजबूती को प्रदर्शित करता है। जहाँ योगी आदित्यनाथ महिला सशक्तिकरण के माध्यम से व्यापक जनसमर्थन जुटा रहे हैं, वहीं ओपी राजभर अपने समुदाय को एनडीए के पक्ष में एकजुट करने का प्रयास कर रहे हैं। भाजपा इस गठजोड़ के माध्यम से यह संदेश देना चाहती है कि उनकी सरकार समावेशी विकास और सामाजिक सम्मान के सिद्धांत पर कार्य कर रही है। विपक्ष द्वारा किए जा रहे जातिगत जनगणना और अन्य विरोधों को यह साझा रणनीति बेअसर करने का माद्दा रखती है।
पूर्वांचल का राजनीतिक भूगोल और निर्णायक राजभर मतदाता पूर्वांचल का क्षेत्र उत्तर प्रदेश की सत्ता का प्रवेश द्वार माना जाता है, जहाँ राजभर आबादी की सघनता राजनीतिक परिणामों को पलटने की क्षमता रखती है। राज्य के 24 से अधिक जनपदों में राजभर वोट बैंक न केवल प्रभावशाली है, बल्कि अनेक सीटों पर निर्णायक स्थिति में भी है। पूर्व में सपा के साथ रहे ओपी राजभर अब एनडीए का हिस्सा हैं, जिससे भाजपा को उम्मीद है कि पूर्वांचल में उनकी स्थिति अजेय हो जाएगी। हालांकि, अखिलेश यादव द्वारा सीमा राजभर को राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी देना इस वोट बैंक में सेंधमारी की एक गंभीर कोशिश है। यह संघर्ष अब केवल नेताओं के बीच नहीं, बल्कि समुदायों की वफादारी और उनके भविष्य के प्रतिनिधित्व के बीच सिमट गया है।
समाजवादी पार्टी का पीडीए फॉर्मूला और प्रतिनिधित्व की नई परिभाषा अखिलेश यादव ने अपनी चुनावी रणनीति को ‘पीडीए’ यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक के त्रिकोण पर केंद्रित कर दिया है। सीमा राजभर की नियुक्ति इसी श्रृंखला की एक कड़ी है, जिसके माध्यम से सपा नेतृत्व यह सिद्ध करना चाहता है कि वे पिछड़ों के हक की लड़ाई केवल भाषणों में नहीं, बल्कि सांगठनिक पदों पर देकर लड़ रहे हैं। सपा प्रमुख का मानना है कि भाजपा की ‘विभाजनकारी’ राजनीति के विरुद्ध सामाजिक न्याय का यह संदेश मतदाताओं को उनके पाले में लाएगा। अखिलेश यादव ने महिला शक्ति को राजभर अस्मिता के साथ जोड़कर एक ऐसा नैरेटिव तैयार किया है जो भाजपा के पारंपरिक राजभर वोट बैंक में भ्रम और विभाजन की स्थिति पैदा कर सकता है।
भविष्य की संभावनाएं: किसके पक्ष में झुकेगा जातिगत और महिला वोट? जैसे-जैसे चुनाव की घड़ी निकट आ रही है, उत्तर प्रदेश के एजेंडे में ‘आधी आबादी’ और ‘जातीय गणित’ सर्वोपरि हो गए हैं। भाजपा जहाँ ‘नारी शक्ति’ को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बता रही है, वहीं सपा इसे ‘पीडीए’ के साथ जोड़कर सामाजिक न्याय की मांग कर रही है। राजभर समुदाय के वोटों को लेकर छिड़ी यह जंग यह निर्धारित करेगी कि पूर्वांचल की 24 प्रमुख सीटों पर किसका परचम लहराएगा। क्या मतदाता सत्ता पक्ष की कल्याणकारी योजनाओं और सुहेलदेव के गौरव पर भरोसा करेंगे, या वे विपक्ष के प्रतिनिधित्व और सामाजिक समानता के वादे को चुनेंगे? फिलहाल उत्तर प्रदेश का राजनीतिक तापमान अपने चरम पर है और सभी की निगाहें मतदाताओं के अंतिम निर्णय पर टिकी हुई हैं।



































