उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस और विपक्षी नेताओं के व्यवहार की तुलना पौराणिक पात्रों के अहंकार से की। उन्होंने कहा कि संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विरोध करते समय विपक्षी नेताओं का आचरण कौरवों और रावण जैसा था। धामी ने चेतावनी दी कि जिस तरह माता सीता के अपमान से रावण का पतन हुआ, वैसे ही नारी शक्ति का अपमान भारी पड़ेगा।
संसदीय आचरण: सीएम धामी ने कहा कि जब अधिनियम को बाधित किया जा रहा था, तब राहुल गांधी, अखिलेश यादव और टीएमसी (TMC) व डीएमके (DMK) के नेता मेजें थपथपाकर खुश हो रहे थे। उन्होंने इस दृश्य की तुलना महाभारत के उस काल से की जब द्रौपदी का अपमान किया जा रहा था। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की मातृशक्ति ने इन नेताओं के इस अहंकार और नारी विरोधी चेहरे को स्पष्ट रूप से देखा है।
उत्तराखंड की मातृशक्ति: मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से उत्तराखंड की महिलाओं के पराक्रम का उल्लेख करते हुए उन्हें राज्य की प्रगति का स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण ही समाज और राष्ट्र की वास्तविक प्रगति का आधार है। थल सेना, वायुसेना और नौसेना में कार्यरत महिलाकर्मियों, विशेषकर कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह के साहस की उन्होंने सार्वजनिक मंच से प्रशंसा की।
राजनीतिक छल का आरोप: सीएम धामी ने कहा कि कांग्रेस ने दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद कभी महिलाओं के लिए ठोस कदम नहीं उठाए। जब मोदी सरकार ने सच्चे मन से प्रयास किया, तो उसे बाधित कर दिया गया। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का जिक्र करते हुए बताया कि केंद्र सरकार मातृशक्ति को नए भारत का आधार मानती है, जबकि विपक्ष केवल श्रेय की राजनीति में उलझा हुआ है।
अधिकारों की लड़ाई: मुख्यमंत्री ने अपने वक्तव्य में कहा कि अब देश की आधी आबादी यह अच्छी तरह समझ चुकी है कि कौन उनके अधिकारों के लिए ईमानदारी से लड़ रहा है। प्रधानमंत्री ने संसद के पहले ही दिन कहा था कि वे इस कानून का श्रेय विपक्ष को देने को तैयार हैं, फिर भी कांग्रेस ने इसे रोका। यह दर्शाता है कि विपक्ष का विरोध केवल राजनीतिक द्वेष पर आधारित है।
भेदभाव रहित विकास: परिसीमन के डर को खारिज करते हुए धामी ने कहा कि किसी भी राज्य के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा। जिसका जितना प्रतिनिधित्व है, वह उतना ही रहेगा और परिसीमन से किसी की ताकत कम नहीं होगी। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि बिना नारी शक्ति के किसी भी समाज का समग्र विकास संभव नहीं है और सरकार महिलाओं को उनके पूरे अधिकार दिलाने के लिए संकल्पबद्ध है।



































