UP में सरकारी नौकरी का सपना देख रहे युवाओं के लिए एक बेहद सकारात्मक खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने ऐलान किया है कि इस वर्ष Uttar Pradesh Public Service Commission के अंतर्गत 15 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इस घोषणा से उन लाखों अभ्यर्थियों में नई उम्मीद जगी है, जो राज्य में रोजगार के अवसरों का इंतजार कर रहे थे।
सर्वाधिक नियुक्तियों का कीर्तिमान: रविवार को इस फैसले की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार के 9 साल के ट्रैक रिकॉर्ड को भी जनता के सामने रखा। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार अब तक 9 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार प्रदान कर चुकी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत में सर्वाधिक सरकारी नियुक्तियां करने का रिकॉर्ड अब उनकी सरकार के नाम दर्ज हो चुका है।
बिना परेशानी पूरी होगी प्रक्रिया: मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने युवाओं को आश्वस्त किया है कि सरकार उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आगामी 15 हजार पदों की भर्ती प्रक्रिया को एक निश्चित समय सीमा के भीतर और पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न कराया जाएगा, ताकि किसी भी योग्य उम्मीदवार को चयन के दौरान दिक्कतों का सामना न करना पड़े।
उम्रकैद और संपत्ति जब्ती का प्रावधान: पिछली भर्तियों की सफलता का श्रेय कड़े नियमों को देते हुए सीएम ने कहा कि 9 लाख पदों पर पारदर्शी नियुक्तियां यूं ही नहीं हो गईं। सरकार ने भर्ती में सेंधमारी करने वालों पर नकेल कसने के लिए कड़ा कानून बनाया है। इस कानून में परीक्षा में धांधली करने वाले दोषियों को आजीवन कारावास की सजा देने और उनकी संपत्ति जब्त करने जैसे कठोर कदम शामिल हैं।
पहले ‘भगवान भरोसे’ थी व्यवस्था: रोजगार के साथ-साथ पुरानी व्यवस्थाओं की आलोचना करते हुए मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले के दौर में राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था का बुरा हाल था और वह पूरी तरह ‘भगवान भरोसे’ थी। इस लापरवाही का नतीजा यह था कि समूचा सरकारी तंत्र ही बीमार और निष्क्रिय हो चुका था।
अराजकता और भ्रष्टाचार पर प्रहार: राज्य के ‘बीमारू’ टैग के पीछे के कारणों को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि UP का यह हाल पिछली सरकारों की कार्यशैली की वजह से हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व की चयन प्रक्रियाओं में भारी भ्रष्टाचार, भेदभाव और बेईमानी होती थी। इसी गुंडागर्दी और अराजकता ने राज्य को बीमारू बनाया था, जिसे खत्म कर अब पारदर्शी नियुक्तियों का दौर शुरू किया गया है।



































