देश की राजधानी नई दिल्ली से न्यायपालिका को लेकर एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने रविवार को देश को इस बड़े फैसले की जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने के फैसले को हरी झंडी दे दी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शीर्ष अदालत में जजों की संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने का निर्णय लिया था। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद अब यह निर्णय पूरी तरह से लागू हो गया है।
संशोधन अध्यादेश जारी: कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर इस संबंध में एक विस्तृत पोस्ट साझा किया है। उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा कि राष्ट्रपति ने सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीशों की संख्या संशोधन अध्यादेश 2026 को लागू किया है। इस अध्यादेश के लागू होने से सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या अब 33 से बढ़कर 37 हो गई है। ध्यान रहे कि इस संख्या में भारत के मुख्य न्यायाधीश का पद शामिल नहीं किया गया है। इस नए कदम ने सर्वोच्च न्यायालय अधिनियम 1956 में एक और नया संशोधन कर दिया है।
मंत्रिमंडल की बैठक: इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बीते 5 मई को संसद में सर्वोच्च न्यायालय संशोधन विधेयक 2026 पेश करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इस प्रस्ताव का एकमात्र उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय अधिनियम 1956 में आवश्यक विधायी संशोधन करना था। इसके तहत भारत के सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या को वर्तमान 33 से बढ़ाकर 37 करना प्रस्तावित किया गया था। इस संख्या में भारत के मुख्य न्यायाधीश को अलग रखा गया है।
लंबित मामलों का निपटारा: इस नए संशोधन के प्रभावी होने से अब देश की शीर्ष अदालत में 4 नए जजों की नियुक्ति की जाएगी। इस महत्वपूर्ण फैसले का कानूनी बिरादरी के सदस्यों ने बहुत ही व्यापक रूप से और खुले दिल से स्वागत किया है। वकीलों और कानूनी विशेषज्ञों ने इसे सुप्रीम कोर्ट के समक्ष बढ़ते लंबित मामलों से निपटने के लिए बेहतरीन कदम बताया है। उनके अनुसार, मुकदमों के भारी दबाव को देखते हुए जजों की संख्या बढ़ाना बेहद जरूरी और समयोचित कदम है।
बार एसोसिएशन का बयान: सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने सरकार के इस कदम की सराहना की है। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में दायर मामलों की लगातार बढ़ती संख्या के कारण यह बड़ी मांग उठ रही थी। न्यायाधीशों की संख्या में बढ़ोतरी करने की यह मांग बहुत लंबे समय से लगातार की जा रही थी। उन्होंने आगे कहा कि हालांकि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों द्वारा मामलों के निपटारे की दर हमेशा से ही सराहनीय रही है। लेकिन मुकदमों की भारी संख्या को देखते हुए अधिक न्यायाधीशों की जरूरत थी।
भविष्य की आवश्यकताएं: वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने जजों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ बुनियादी ढांचे की आवश्यकता पर भी विशेष ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि नए सुप्रीम कोर्ट भवन का एक हिस्सा इस चालू वर्ष के अंत तक पूरी तरह काम करना शुरू कर देगा। उनके आकलन के अनुसार, कोर्ट में कुल 38 न्यायाधीश बहुत ही आराम से बैठकर अपना काम कर सकते हैं। इसके अलावा, पूरे नए भवन के चालू होने के बाद आने वाले वर्षों में लगभग 50 न्यायाधीशों की आवश्यकता हो सकती है।





































