उत्तर प्रदेश के कानपुर में स्थित एक निजी विद्यालय के भीतर छात्र के साथ धार्मिक भेदभाव और मारपीट का मामला सामने आया है। स्कूल में छठी क्लास के एक छोटे बच्चे की इस बात पर बेरहमी से पिटाई की गई क्योंकि वह स्कूल में टीका लगाकर आया था। इस घटना से गुस्साए लोगों ने स्कूल के मुख्य गेट के सामने एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया और जमकर हंगामा किया।
मदर टेरेसा स्कूल: यह पूरा निंदनीय मामला कानपुर के किदवई नगर इलाके में स्थित मदर टेरेसा स्कूल के परिसर के अंदर घटित हुआ है। यहां कक्षा 6 के एक मासूम छात्र को सिर्फ इसलिए बेरहमी से पीट दिया गया क्योंकि वह माथे पर तिलक लगाकर स्कूल की कक्षा में पहुंचा था। इस घटना के बाद छात्र के परिजन और हिंदूवादी संगठनों के लोग बेहद गुस्से में आ गए और स्कूल पहुंच गए।
आपबीती और शिकायत: यह गंभीर मामला तब पूरी तरह से तूल पकड़ गया जब पीड़ित छात्र रोते हुए अपने घर पहुंचा और उसने परिजनों को रोते हुए अपनी आपबीती बताई। छात्र के माता-पिता ने तुरंत किदवई नगर स्थित स्कूल प्रबंधन से मुलाकात की और आरोपी टीचर हिबा फातिमा की इस क्रूर हरकत की कड़ी शिकायत की। घटना की खबर फैलते ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता भारी संख्या में वहां जुट गए।
परिसर के बाहर नारेबाजी: एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने स्कूल प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और स्कूल परिसर के ठीक बाहर खड़े होकर जमकर नारेबाजी शुरू कर दी। इस दौरान वहां “स्कूल प्रशासन होश में आओ…”, “भारत माता की जय…” के नारे गूंजने लगे। कार्यकर्ताओं ने “प्रिंसिपल मैडम कुर्सी छोड़ो-कुर्सी छोड़ो…” के नारे भी लगाए जो कि वहां काफी देर तक लगातार सुनाई देते रहे।
प्रिंसिपल को ज्ञापन: जब स्कूल की प्रिंसिपल काफी देर तक प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं से मिलने अपने दफ्तर से बाहर नहीं आईं, तो कार्यकर्ताओं का गुस्सा और भड़क गया। आखिरकार भारी जन दबाव के बीच कार्यकर्ताओं ने प्रिंसिपल से मुलाकात की और उन्हें ज्ञापन सौंपकर आरोपी टीचर हिबा फातिमा को तुरंत बर्खास्त करने की मांग की। चौतरफा घिरते देख स्कूल मैनेजमेंट को आखिरकार प्रदर्शनकारियों के आगे झुकना ही पड़ा।
शिक्षिका की बर्खास्तगी: स्कूल मैनेजमेंट ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी शिक्षिका हिबा फातिमा को तुरंत नौकरी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। इस कार्रवाई के बाद विद्यार्थी परिषद के महानगर मंत्री सुधांशु त्रिपाठी का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति के प्रतीक तिलक को लगाने पर मासूम बच्चे को प्रताड़ित करना कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में किसी छात्र के साथ ऐसा भेदभाव नहीं होने दिया जाएगा।





































