नीट परीक्षा विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में एक बड़ा कदम उठाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी NTA को परीक्षा प्रक्रिया से पूरी तरह हटाने की मांग की है। उनका कहना है कि मौजूदा एजेंसी परीक्षाओं को सुरक्षित तरीके से आयोजित कराने में पूरी तरह विफल रही है। इसलिए राष्ट्रीय स्तर की इस महत्वपूर्ण परीक्षा की जिम्मेदारी अब इस एजेंसी के पास नहीं रहनी चाहिए। इस मांग से परीक्षा नियामक संस्था पर दबाव काफी बढ़ गया है।
नई अथॉरिटी का गठन: याचिका में NTA की जगह एक नई, स्वतंत्र और पारदर्शी नेशनल एग्जामिनेशन अथॉरिटी गठित करने की अपील की गई है। यह नई प्रस्तावित अथॉरिटी पूरी तरह से कानूनी जवाबदेही के तहत काम करने वाली संस्था होनी चाहिए। साथ ही इसके कामकाज को सीधे न्यायिक निगरानी के दायरे में रखा जाना चाहिए। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि एक स्वतंत्र संस्था ही देश में पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षाएं आयोजित करा सकती है। इस नई व्यवस्था से छात्रों का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा फिर से कायम हो सकेगा।
उच्चस्तरीय निगरानी समिति: इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट से एक उच्चस्तरीय निगरानी समिति बनाने की विशेष अपील भी की गई है। इस समिति में सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश और देश के जाने-माने शिक्षाविदों को शामिल करने की बात कही गई है। साथ ही इसमें कुशल मनोवैज्ञानिक, साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और फॉरेंसिक विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाना चाहिए। यह बहुविषयक समिति राष्ट्रीय परीक्षाओं की पूरी सुरक्षा व्यवस्था की बारीकी से समीक्षा करेगी। इसके बाद यह समिति परीक्षाओं में आवश्यक और कड़े संरचनात्मक सुधारों के सुझाव देगी।
गंभीर लीक और रद्दीकरण: यह पूरी कानूनी कवायद नीट 2026 परीक्षा के पेपर लीक होने और उसके बाद रद्द होने के कारण शुरू हुई है। परीक्षा रद्द होने के बाद देश भर के लाखों छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। हालांकि सरकार ने दोबारा परीक्षा कराने के लिए नई तारीख का ऐलान भी कर दिया है। लेकिन छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता परीक्षा की सुरक्षा को लेकर अभी भी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। इसी वजह से इस पूरी परीक्षा प्रणाली को बदलने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया गया है।
हस्ताक्षरकर्ता और वकील: इस अहम याचिका को सुप्रीम कोर्ट के वकील सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से कोर्ट में प्रस्तुत किया गया है। इसे दाखिल करने वालों में आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह और सामाजिक कार्यकर्ता अनुभव गर्ग प्रमुख चेहरा हैं। इनके साथ इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. ध्रुव चौहान ने भी तकनीकी पक्ष रखा है। राजनीतिक नेता हरिशरण देवगन ने भी इस याचिका में एक प्रमुख याचिकाकर्ता के रूप में अपनी भूमिका निभाई है। इन सभी ने परीक्षा सुधारों के लिए एक मजबूत गठबंधन तैयार किया है।
तकनीकी सुधारों पर जोर: याचिका में पेपर लीक को रोकने के लिए कई महत्वपूर्ण तकनीकी सुधारों को अपनाने की बात कही गई है। इसके तहत प्रश्नपत्रों की “डिजिटल लॉकिंग” और पूर्ण CBT मॉडल अपनाने को सबसे जरूरी कदम बताया गया है। याचिकाकर्ताओं के अनुसार, जब तक परीक्षाओं को पूरी तरह डिजिटल और एन्क्रिप्टेड नहीं किया जाएगा, तब तक लीक रोकना असंभव है। वे 21 जून 2026 को होने वाली आगामी री-कंडक्ट परीक्षा से ही इन सभी बदलावों को तुरंत लागू करवाना चाहते हैं। इसके लिए केंद्र सरकार से एक स्पष्ट और समयबद्ध योजना की मांग की जा रही है।





































