पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद जारी हिंसा पर बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने तीखी टिप्पणी की है। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने इस गंभीर मामले को लेकर सरकारों से एक बड़ी और प्रभावी कार्रवाई करने की पुरजोर मांग की है। सोशल मीडिया साइट एक्स पर बसपा चीफ ने लिखा कि देश में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखना बेहद आवश्यक है। चुनाव के बाद इस तरह की हिंसक घटनाएं समाज और लोकतांत्रिक व्यवस्था के ताने-बाने को पूरी तरह से नुकसान पहुंचाती हैं। इसलिए संबंधित सरकारों को इस हिंसा को रोकने के लिए बिना किसी देरी के तुरंत कड़े कदम उठाने चाहिए।
संवैधानिक मर्यादा और धर्मनिरपेक्षता: उन्होंने देश के महान संविधान और इसकी धर्मनिरपेक्षता की अनूठी खूबियों को रेखांकित करते हुए अपनी बात को आगे बढ़ाया। उन्होंने लिखा कि भारत देश की दुनिया भर में अच्छी एवं अनोखी मानवतावादी पहचान परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के अनुपम संविधान को लेकर ज्यादा है। यह पवित्र संविधान पूरी तरह से धर्मनिरपेक्षता अर्थात सेक्युलरिज़्म के महान और सर्वमान्य सिद्धान्त पर पूरी तरह आधारित है। इसका सीधा अर्थ यह है कि यहाँ रहने वाले विभिन्न धर्मों के मानने वाले सभी लोगों को हमेशा एक-समान आदर-सम्मान देना है। देश की यह मूल पहचान वैश्विक स्तर पर भारत का गौरव लगातार बढ़ाती आ रही है।
सरकार और नागरिकों की जिम्मेदारी: बसपा प्रमुख ने देश के नागरिकों और शासन व्यवस्था को अपनी मूल संवैधानिक जिम्मेदारियों का एहसास कराया है। उन्होंने लिखा कि देश का मिज़ाज भी अधिकतर ऐसे ही उच्च मानवीय गुणों पर पूरी तरह आधारित है। यह मिज़ाज सभी धर्मों के मानने वालों को उनके जान, माल व मज़हब की आज़ादी एवं सुरक्षा आदि पूरी तरह सुनिश्चित करता है। इसके निर्धारित व बताये हुये रास्तों पर चलना केवल सभी सरकारों की ही परम जिम्मेदारी नहीं है। बल्कि यह देश के सभी नागरिकों की भी उतनी ही परम व प्रमुख संवैधानिक ज़िम्मेदारी बनती है।
वैश्विक छवि और सुरक्षा कवच: उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि देश की यह आंतरिक मजबूती ही अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की रक्षा करती है। उन्होंने लिखा कि इतना ही नहीं बल्कि यह भी सर्वविदित ही है कि यही वह असली सुरक्षा कवच है। इसी के सहारे विदेशों में भारत-विरोधी प्रोपागण्डा आदि का देश हमेशा बहुत ही बखूबी और मजबूती से सामना करता है। किन्तु इसके लिए केन्द्र व सभी राज्य सरकारों का यह परम दायित्व और ज़िम्मेदारी बनती है। वे ऐसा कुछ भी ना करें और ना ही वैसे कुछ होने दें जिससे विदेशों में भारत सरकार से अप्रिय सवाल-जवाब हों।
पश्चिम बंगाल के हालात पर नसीहत: उन्होंने सीधे तौर पर पूर्वी राज्य के मौजूदा हालातों और न्यायपालिका के हस्तक्षेप का प्रमुखता से जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि इस क्रम में खासकर पश्चिम बंगाल में चुनाव उपरान्त जारी हिंसा की सर्वत्र चर्चाएं हो रही हैं। विशेषकर हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद सरकारों को इसके प्रति पूरी तरह सतर्क और अराजकता के विरुद्ध सख्त हो जाना चाहिये। ऐसा करना इसलिए जरूरी है ताकि किसी भी सरकार के ऊपर संकीर्ण राजनीति, धार्मिक भेदभाव, जातीय द्वेष व पक्षपात आदि का दोष न लगे। यह सभी के लिए एक अति-चिन्ता की बात ज़रूर होनी चाहिये।
ज्वलंत समस्याओं पर ध्यान देने की अपील: अंत में बसपा नेता ने देश के मौजूदा गंभीर संकटों की ओर सभी सत्तातंत्रों का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने लिखा कि वैसे भी देश के खासकर सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक हालात वर्तमान में इतने कठिन हो चुके हैं। देश के सामने मौजूद ज्वलंत समस्याएं इतनी अधिक दुखद और कष्टदायी हो गई हैं कि सभी सरकारों को उन विशेष मुद्दों पर ध्यान पूरी तरह केन्द्रित करना चाहिये। सरकारों को किसी भी विध्वंसकारी इमेज आदि के माध्यम से लोगों का ध्यान उस पर से बांटने का प्रयास बिल्कुल नहीं करना चाहिये। इससे राष्ट्रीय समस्याओं का समाधान नहीं होगा बल्कि क्राइसिस के हालात और बढ़ेंगे।





































