फालता विधानसभा क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान अब पुलिस की हिरासत में आ चुके हैं। राज्य पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स यानी एसटीएफ ने उन्हें आज सुबह गिरफ्तार करने में कामयाबी पाई है। जहांगीर खान को उस समय पकड़ा गया जब वे नेपाल बॉर्डर के पास छिपे हुए थे। वह पिछले काफी दिनों से कानून की नजरों से बचकर लगातार अपनी जगह बदल रहे थे। एसटीएफ की इस बड़ी कार्रवाई से फरार चल रहे अपराधियों में हड़कंप मच गया है।
नतीजों के बाद हुए गायब पश्चिम बंगाल में 4 मई को चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद से ही राजनीतिक समीकरण बदल गए थे। इसके बाद 21 मई तक जहांगीर खान पूरी तरह से परिदृश्य से ‘गायब’ हो चुके थे। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने चुनाव से ठीक दो दिन पहले अपना नाम वापस ले लिया था। नाम वापस लेने के बाद से ही वे लगातार पुलिस की टीम को चकमा देकर भाग रहे थे। आखिरकार उनकी यह फरारी आज सुबह नेपाल सीमा के पास हमेशा के लिए समाप्त हो गई।
वोटर लिस्ट में हेरफेर का आरोप चुनावी प्रक्रिया के दौरान एसआईआर के समय से ही जहांगीर खान पर कई अवैध गतिविधियों के आरोप थे। उन पर सरकारी बीएलओ को डरा-धमकाकर अपने पक्ष में प्रभावित करने का बेहद गंभीर आरोप लगा था। इसके अलावा उन्होंने वोटों की संख्या बढ़ाने के लिए मृतकों के नाम भी सूची में शामिल करवाए थे। इन सभी जालसाजियों के सबूत सामने आने के बाद से ही पुलिस उनकी सरगर्मी से तलाश कर रही थी। इन हरकतों ने चुनाव की पूरी पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
अजय पाल शर्मा की तैनाती इलाके में जहांगीर खान द्वारा लोगों को धमकाने और डराने के आरोपों पर विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध किया था। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने स्वयं इन घटनाओं के खिलाफ बहुत मजबूती से अपनी आवाज उठाई थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट अजय पाल शर्मा को नियुक्त किया। उन्हें विशेष पर्यवेक्षक के रूप में जिम्मेदारी सौंपकर डुंडी पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में भेजा गया था। इस नियुक्ति का उद्देश्य इलाके में पूरी तरह से कानून व्यवस्था बहाल करना था।
मशीनों पर टेप और दोबारा चुनाव फालता विधानसभा क्षेत्र में मतदान के दिन बड़े पैमाने पर चुनावी धांधली और अराजकता देखने को मिली थी। वोटिंग के दौरान ही कई ईवीएम मशीनों पर सेलोटेप चिपकाए जाने की चौंकाने वाली घटनाएं सामने आई थीं। इस पूरी धांधली के पीछे मुख्य रूप से जहांगीर खान का ही हाथ होने का आरोप लगाया गया था। मतदान प्रक्रिया की पवित्रता नष्ट होने के कारण चुनाव आयोग ने वहां कड़ा रुख अपनाया था। इसके बाद आयोग ने फालता में दोबारा नए सिरे से चुनाव कराने की आधिकारिक घोषणा कर दी थी।
नेताओं पर कसता कानूनी शिकंजा जहांगीर खान ने गिरफ्तारी से बचने के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाकर सुरक्षा की गुहार भी लगाई थी। लेकिन राज्य प्रशासन ने अदालत में आवेदन देकर उनकी इस सुरक्षा को वापस लेने की मांग की थी। इस कानूनी दबाव के बाद जहांगीर ने नेपाल के रास्ते किसी अन्य देश भागने की फिराक में थे। बंगाल में बीजेपी की सरकार आने के बाद से ही कई दागी टीएमसी नेताओं की गिरफ्तारियां हो रही हैं। पुलिस इन सभी नेताओं पर लगे पुराने आरोपों की जांच कर रही है और कई नेता इस्तीफा दे रहे हैं।





































