उच्च न्यायालय ने गुरुवार को फिल्म अभिनेता के पड़ोसी को सोशल मीडिया से पोस्ट हटाने पर विचार करने की सलाह दी है। यह मामला अभिनेता के पनवेल स्थित फार्महाउस के पास रहने वाले केतन कक्कड़ से जुड़ा हुआ है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया की स्वतंत्रता का अर्थ किसी का भी अपमान करना बिल्कुल नहीं है। न्यायालय के अनुसार कोई व्यक्ति चाहे कितनी भी बड़ी हस्ती क्यों न हो, उसके विरुद्ध मानहानिकारक बातें नहीं लिखी जानी चाहिए। इस मामले पर अदालत का यह रुख सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
पड़ोसी द्वारा लगाए गए आरोप इस विवाद की शुरुआत पड़ोसी केतन कक्कड़ द्वारा लगाए गए कुछ गंभीर और सार्वजनिक आरोपों के बाद हुई थी। केतन ने आरोप लगाया था कि फार्महाउस के निर्माण कार्य के दौरान कई अहम पर्यावरणीय नियमों का खुला उल्लंघन किया गया है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके अपने घर तक जाने वाले रास्ते को पूरी तरह से बाधित कर दिया गया है। इन्हीं आरोपों को लेकर उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कई विवादित पोस्ट और वीडियो भी साझा किए थे। इन वीडियो और संदेशों के कारण ही दोनों पक्षों के बीच कानूनी तनाव काफी अधिक बढ़ गया था।
अभिनेता का मानहानि का मुकदमा इन आरोपों का कड़ा जवाब देते हुए अभिनेता ने अपने बचाव में सीधे न्यायालय का दरवाजा खटखटाना उचित समझा। उन्होंने अदालत में एक औपचारिक मानहानि का मुकदमा दायर करके अपनी सार्वजनिक छवि बचाने का प्रयास किया। अभिनेता ने आरोप लगाया कि उनके पड़ोसी द्वारा साझा किए गए वीडियो उनकी व्यक्तिगत छवि को बहुत नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि इंटरनेट पर डाले गए वे सभी पोस्ट पूरी तरह से सांप्रदायिक रूप से भड़काऊ हैं। इसी वजह से उन्होंने न्यायालय से उन सभी मानहानिकारक वीडियो को तुरंत हटाने की सख्त मांग की है।
न्यायमूर्ति की कड़ी नसीहत इस पूरे मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति शर्मिला देशमुख ने दोनों पक्षों को कुछ बहुत ही स्पष्ट और कड़ी बातें कही हैं। उन्होंने बताया कि किसी भी तरह के व्यक्तिगत विवाद को सुलझाने के लिए सोशल मीडिया कोई उचित स्थान नहीं है। न्यायमूर्ति ने कहा कि ऐसे किसी भी विवाद को हमेशा उचित कानूनी मंचों पर ही पूरी तरह से लड़ा जाना चाहिए। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि क्या न्यायालय का बहुमूल्य समय केवल यह तय करने में बर्बाद होना चाहिए कि कोई पोस्ट मानहानिकारक है या नहीं। अंततः अदालत ने केतन कक्कड़ को पोस्ट हटाने का सुझाव देते हुए अगली सुनवाई छह जुलाई को निर्धारित कर दी है।
व्यक्तित्व अधिकारों की पुरानी सुरक्षा यह पहली बार बिल्कुल नहीं है जब अभिनेता ने अपनी छवि और नाम को सुरक्षित रखने के लिए अदालत की सहायता ली है। पिछले वर्ष पच्चीस में भी उन्होंने अपने व्यक्तित्व अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी मदद की गुहार लगाई थी। उन्होंने यह मुख्य मांग की थी कि कोई भी उनकी अनुमति के बिना उनके नाम और तस्वीरों का व्यावसायिक इस्तेमाल न करे। उनकी उस याचिका का मुख्य उद्देश्य अपनी निजी पहचान को अनधिकृत उपयोग से पूरी तरह सुरक्षित करना था। इस अहम कदम के बाद वह उन चुनिंदा फिल्मी सितारों में शामिल हो गए जिन्होंने अपने अधिकारों के लिए कानूनी लड़ाई लड़ी है।
दिल्ली उच्च न्यायालय का पिछला आदेश अभिनेता की उस पुरानी याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने ग्यारह दिसंबर पच्चीस को एक बेहद अहम फैसला सुनाया था। जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा ने कई प्रमुख सोशल मीडिया कंपनियों को इस मामले में सख्त निर्देश जारी किए थे। अदालत ने कहा था कि अभिनेता की याचिका को सूचना प्रौद्योगिकी नियमों के तहत एक औपचारिक शिकायत के रूप में स्वीकार किया जाए। इसके साथ ही सभी संबंधित मंचों को इस गंभीर शिकायत पर मात्र तीन दिनों के भीतर उचित कार्रवाई करने का आदेश मिला था। इस महत्वपूर्ण फैसले ने मशहूर हस्तियों के अधिकारों को इंटरनेट पर सुरक्षित रखने की दिशा में एक नई मिसाल पेश की थी।





































