उत्तर प्रदेश की धरती पर आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक बिसात बिछनी शुरू हो गई है। इस सियासी समर में एक बार फिर विपक्ष के पीडीए के नारे की गूंज चारों तरफ सुनाई दे रही है। सत्तारूढ़ दल के नेता और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस चुनावी चक्रव्यूह को तोड़ने की रणनीति बना रहे हैं। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा दिए गए विशेष ज्ञान मंत्र से इस संकट का हल खोज रहे हैं। मुख्यमंत्री ने खुद एक सार्वजनिक कार्यक्रम में इस बात के साफ और सीधे संकेत राजनीतिक जगत को दिए हैं।
एनडीए संवाद में बड़ा संकेत: यह पूरा वाकया उस समय सामने आया जब लखनऊ में एक विशेष मीडिया कार्यक्रम का आयोजन हुआ था। यह महत्वपूर्ण संवाद कार्यक्रम केंद्र की एनडीए सरकार के सफल 12 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में था। इसी मंच से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री के ज्ञान फॉर्मूले की प्रासंगिकता पर बल दिया। इसके तहत पिछड़ा, दलित और आदिवासी वर्ग के मुकाबले एक नया सामाजिक ढांचा तैयार किया जा रहा है। बीजेपी इस रणनीति के जरिए समाज के हर तबके तक अपनी सीधी पहुंच स्थापित करना चाहती है।
चार जातियों का नया समीकरण: इस ज्ञान फॉर्मूले की विस्तृत व्याख्या करते हुए इसके चारों अंगों को प्रमुखता से रेखांकित किया गया है। इसके तहत समाज के गरीब तबके, देश के युवा, अन्नदाता किसान और नारी शक्ति को केंद्रित किया गया है। मुख्यमंत्री योगी ने इन चारों कल्याणकारी श्रेणियों को चार अलग-अलग जातियों के रूप में विभाजित कर दिया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य अखिलेश यादव के जाति आधारित चुनावी एजेंडे को पूरी तरह निष्प्रभावी बनाना है। अब देखना यह है कि यह नया दांव आगामी चुनावों में कितना कारगर और असरदार साबित होता है।
विपक्ष के फॉर्मूले की सफलता: अगर इतिहास पर नजर डालें तो साल 2024 के लोकसभा चुनाव में स्थितियां बिल्कुल अलग थीं। उस समय अखिलेश यादव द्वारा दिए गए इस नारे ने जमीन पर बहुत बड़ा राजनीतिक उलटफेर कर दिया था। इस चुनावी रणनीति के सामने भारतीय जनता पार्टी का मजबूत सांगठनिक ढांचा भी पूरी तरह चरमरा गया था। इस बड़ी जीत के बाद से ही समाजवादी पार्टी राज्य में अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पा चुकी है। अब जनता के बीच यह सवाल तैर रहा है कि क्या विधानसभा चुनाव में भी यह सिलसिला जारी रहेगा।
विशेषज्ञ योगेश मिश्रा का मत: इस राजनीतिक खींचतान के बीच जाने-माने राजनीतिक एक्सपर्ट योगेश मिश्रा का एक बड़ा बयान सामने आया है। उनका मानना है कि विपक्षी दल के इस फॉर्मूले से भारतीय जनता पार्टी के खेमे में भारी घबराहट व्याप्त है। लोकसभा चुनाव के दौरान जब प्रधानमंत्री मोदी का चेहरा सामने था तब पीडीए ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया था। इस आक्रामक चुनावी रणनीति ने समाजवादी पार्टी को उसके इतिहास के सर्वोच्च चुनावी स्कोर पर पहुंचा दिया था। इसके विपरीत इस फॉर्मूले ने भारतीय जनता पार्टी को राज्य में उसके न्यूनतम स्तर पर लाकर खड़ा कर दिया।
2027 के चुनाव का मुख्य एजेंडा: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता पक्ष का यह डर पूरी तरह से वाजिब और सही है। बीजेपी के रणनीतिकारों को भय है कि यदि यह चुनावी रथ इसी गति से आगे बढ़ता रहा तो संकट बढ़ेगा। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में होने वाले अगले चुनाव में कहीं यह दांव और अधिक आक्रामक न हो जाए। साल 2024 में मिले इस करारे झटके की गूंज आज भी सत्ताधारी दल के भीतर साफ तौर पर सुनाई देती है। यही कारण है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पूरी सरकार इस चुनावी काट को खोजने में जुटी है।





































