हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि ईश्वर साधना और पितरों के स्मरण के लिए विशेष मानी जाती है। हर महीने में एक अमावस्या आती है, लेकिन अधिक मास में आने वाली अमावस्या का खास महत्व माना गया है। इस साल यह अमावस्या 15 जून 2026, सोमवार को मनाई जाएगी। सोमवार के दिन पड़ने के कारण इसे सोमवती अमावस्या भी कहा जाएगा।
चूंकि अधिक मास तीन साल में एक ही बार आता है, इसलिए यह अमावस्या भी तीन साल में एक ही बार पड़ती है। इस दिन स्नान-दान करने से अमोघ पुण्य फल प्राप्त होता है और भगवान विष्णु की पूजा बेहद फलदायी मानी जाती है। अधिक मास इसी दिन समाप्त भी हो रहा है, इसलिए पूरे महीने का पुण्य प्राप्त करने के लिए यह दिन बेहद खास है।
ज्येष्ठ अधिक अमावस्या 2026 के शुभ मुहूर्त
ज्येष्ठ अमावस्या पर स्नान के लिए ब्रह्म मुहूर्त का समय सबसे शुभ माना जाता है। यदि ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना संभव न हो, तो कम से कम सुबह 6 बजे तक स्नान अवश्य कर लें।
- ब्रह्म मुहूर्त: 04:03 AM से 04:43 AM
- प्रातः सन्ध्या: 04:23 AM से 05:23 AM
- अभिजित मुहूर्त: 11:54 AM से 12:50 PM
- गोधूलि मुहूर्त: 07:19 PM से 07:39 PM
- अमृत काल: 11:28 AM से 12:52 PM
- सर्वार्थ सिद्धि योग: 05:23 AM से 07:08 PM
- अमृत सिद्धि योग: 05:23 AM से 07:08 PM
ज्येष्ठ अधिक अमावस्या की पूजा विधि
इस पवित्र दिन पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए इस विधि से पूजा करें:
- ब्रह्म मुहूर्त में उठकर नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें। संभव हो तो किसी पवित्र नदी में स्नान करें।
- स्नान के पश्चात सूर्य देव को अर्घ्य दें (जल चढ़ाएं) और यदि आप व्रत कर रहे हैं तो व्रत का संकल्प लें।
- भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूरे विधि-विधान से पूजा करें और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें।
- घर में तुलसी के पौधे के सामने एक शुद्ध घी का दीपक जलाएं।
- अपने पितरों का स्मरण करें और उनके नाम से किसी जरूरतमंद व्यक्ति को अन्न का दान करें।
- शाम के समय पीपल के वृक्ष पर जल अर्पित करें और उसके सामने सरसों के तेल का दीपक प्रज्वलित करें।
अधिक मास के आखिरी दिन (अमावस्या) पर क्या दान करें?
धार्मिक दृष्टि से अधिक मास में किए गए दान-पुण्य का फल कई गुना अधिक मिलता है। यदि आप पूरे महीने दान नहीं कर पाए हैं, तो 15 जून (अमावस्या) को इन विशेष चीजों का दान करके पूरे महीने का फल प्राप्त कर सकते हैं:
- मालपुए का दान: अधिक मास के आखिरी दिन मालपुए का दान जरूर करना चाहिए। कांसे के बर्तन में 33 मालपुए रखकर किसी जरूरतमंद को दान करें। मान्यता है कि इससे ग्रह दोष शांत होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
- मौसमी और पीले फल: इस दिन पीले मौसमी फलों का दान करना बहुत फलदायी होता है, जिससे मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है।
- पीले वस्त्रों का दान: किसी जरूरतमंद को पीले वस्त्र दान करने से समाज में मान-सम्मान बढ़ता है। यदि पूरे वस्त्र दान करना संभव न हो, तो पीला रुमाल या गमछा भी दान किया जा सकता है।
- पीला अनाज: चने की दाल या गेहूं जैसे पीले अनाज का दान करने से घर में अन्न के भंडार कभी खाली नहीं होते।
- जल और तिल का दान: तांबे के लोटे में शुद्ध जल भरकर और उसमें थोड़े से काले तिल मिलाकर दान करना बेहद शुभ होता है। इससे पितरों की आत्मा को शांति प्राप्त होती है।
- गुड़ का दान: गुड़ दान करने से आर्थिक स्थिति में तेजी से सुधार आने लगता है।
- धन (दक्षिणा) का दान: आप जिस भी वस्तु का दान कर रहे हैं, उसके साथ कुछ पैसे (दक्षिणा) अवश्य रखें। दक्षिणा के बिना दान का पूर्ण फल प्राप्त नहीं होता है।





































