मुख्यमंत्री ने जनपद के ऐतिहासिक महत्व को बताते हुए कहा कि एक दौर ऐसा था जब इसकी पहचान का बड़ा संकट खड़ा हो गया था। यह भारी पहचान का संकट सिर्फ इस अकेले जिले की पीड़ा नहीं थी, बल्कि हम सभी की पीड़ा थी। साल दो हजार सत्रह से पहले यह क्षेत्र अपनी बुनियादी पहचान स्थापित करने के लिए पूरी तरह मोहताज था। पिछली सरकारों की घोर उपेक्षा के कारण इस जिले का समुचित और सही विकास नहीं हो पाया था।
पिछली सरकारों पर कड़ा निशाना पिछली सरकारों पर कड़ा निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने विकास कार्यों की भारी कमी का स्पष्ट उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उस पुराने दौर में इस क्षेत्र में उच्च शिक्षा के लिए कोई विश्वविद्यालय मौजूद नहीं था। इसके साथ ही तब न तो पूर्वांचल एक्सप्रेसवे था और न ही यहां का एयरपोर्ट ठीक ढंग से काम कर पा रहा था। हरिहरपुर में कोई संगीत महाविद्यालय नहीं था और स्थानीय कलाओं को भी कोई उचित मंच नहीं मिल पा रहा था।
स्थानीय कारीगरों को मिला सम्मान मुख्यमंत्री ने बताया कि पहले मुबारकपुर की मशहूर ब्लैक पॉटरी कला के लिए भी कोई विशेष स्थान नहीं था। मंच पर आने से पहले उन्होंने एक प्रदर्शनी का अपने मंत्रियों के साथ गंभीरता से निरीक्षण किया था। इस दौरान ब्लैक पॉटरी से जुड़ा हुआ एक कुशल कारीगर उनसे बड़े ही खुश होकर मिला था। उस कारीगर ने बताया कि डबल इंजन की सरकार आने के बाद से उनका कारोबार अब कई गुना बढ़ गया है।
कारोबार और सम्मान में वृद्धि कारीगर ने मुख्यमंत्री को स्पष्ट रूप से बताया कि अब उनके उत्पादों की अच्छी बिक्री हो रही है। कारोबार में हुई भारी वृद्धि के कारण वे लोग अब अच्छी तरह से पैसा कमा रहे हैं। इस सफलता के कारण उनके परिवार के सभी लोग अब समाज में सम्मान का जीवन यापन कर रहे हैं। सरकार के विशेष प्रयासों से हस्तशिल्पियों और अन्य जुड़े हुए लोगों के जीवन स्तर में बड़ा सुधार आया है।
इतिहास की गलतियों से सीख इतिहास का गहरा जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब-जब देश जाति और क्षेत्र के नाम पर बंटा, तब-तब बड़ा नुकसान हुआ। भाषा और परिवारवाद के नाम पर बंटने के कारण देश को भारी नुकसान लंबे समय तक झेलना पड़ा। हम लोग इतिहास में वही बड़ी गलती बार-बार करते रहे जिसे एक हजार वर्ष पहले सुधारा गया था। एक हजार वर्ष पहले जो ऐतिहासिक काम किया गया था, बाद की पीढ़ी दुर्भाग्यवश उससे उचित प्रेरणा नहीं ले पाई।
गुलामी के प्रतीकों का होगा अंत मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले महाराज सुहेलदेव के नाम पर कोई बड़ा आयोजन नहीं किया जाता था। इसके बजाय आक्रांता सालार मसूद और गाजी मियां के नाम पर लगातार आयोजन होते रहते थे। अब सरकार ने यह तय किया है कि किसी भी विदेशी आक्रांता को हमारे देश में सम्मान नहीं मिलना चाहिए। स्वतंत्र और नया भारत अब गुलामी के किसी भी प्रतीक या चिन्ह को बिल्कुल भी स्वीकार नहीं करेगा।





































