शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतों में ताजा गिरावट के बाद बाजार में सकारात्मक माहौल दर्ज किया गया। इस गिरावट के कारण पेट्रोलियम कंपनियों के शेयरों में 4.50 प्रतिशत तक की शानदार उछाल देखने को मिली है। आज बाजार में प्रमुख कंपनियों जैसे हिंदुस्तान पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम के शेयरों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। कच्चे तेल की यह हालिया गिरावट मुख्य रूप से अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की उम्मीदों से प्रेरित है।
शेयर बाजार में कंपनियों का शानदार प्रदर्शन शेयर बाजार में आज भारत पेट्रोलियम के शेयरों में सबसे ज्यादा 4.5 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 295 रुपये पर पहुंच गया। हिंदुस्तान पेट्रोलियम के शेयर भी 3.5 प्रतिशत की मजबूत बढ़त के साथ दिन के उच्चतम स्तर 379 रुपये पर आ गए। इसके साथ ही इंडियन ऑयल के शेयरों में 3 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई और वे 138 रुपये प्रति शेयर पर कारोबार कर रहे थे। विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे तेल का दो महीने के निचले स्तर पर आना इन कंपनियों के लिए शेयर बाजार में बेहद फायदेमंद साबित हुआ है।
शांति समझौते की उम्मीदों से बाजार में उत्साह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर ईरान के साथ शांति समझौते की प्रबल संभावना जताई है। उन्होंने अपनी पोस्ट में स्पष्ट किया है कि इस सप्ताह के अंत तक दोनों देशों के बीच यह महत्वपूर्ण समझौता अंतिम रूप ले सकता है। ट्रंप के अनुसार उच्च स्तरीय ईरानी नेतृत्व तक बात पहुंचने और उनकी मंजूरी मिलने के बाद ही वर्तमान हमलों पर रोक लगाई गई है। इस प्रस्तावित शांति समझौते को अमेरिका, इजराइल, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात सहित कई देशों ने सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है।
कई अन्य देशों ने भी दी समझौते को सहमति ट्रंप द्वारा प्रस्तावित इस शांति योजना को मध्य पूर्व और एशिया के कई प्रमुख देशों का भी पूरा समर्थन प्राप्त हुआ है। इन समर्थक देशों की सूची में कतर, तुर्की, पाकिस्तान, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन और मिस्र जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्र शामिल हैं। इन सभी पक्षों ने इस शांति समझौते के मुख्य बिंदुओं को पूरी तरह से और विस्तार के साथ अपनी स्वीकृति प्रदान की है। इस व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन के कारण ही वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के नए दाम शांति समझौते के बयानों के बाद आज ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.21 डॉलर गिरकर 89.17 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया। इसी तरह अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड भी 1.23 डॉलर की गिरावट के साथ 86.48 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। इससे पहले पिछले सत्र में ब्रेंट क्रूड बाजार खुलते ही लगभग 2 प्रतिशत गिरकर 88.79 डॉलर प्रति बैरल के निचले स्तर पर था। वहीं दूसरी ओर वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड बाजार में 86 डॉलर प्रति बैरल के आसपास अपना कारोबार कर रहा था।
तेल कंपनियों का मार्जिन और भविष्य की चुनौतियां कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने पर ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के मार्जिन पर दबाव पड़ता है क्योंकि वे अपनी इनपुट लागत ग्राहकों पर पूरी तरह से नहीं डाल सकतीं। हालांकि अब कच्चे तेल की कीमतें गिरने से इन तेल कंपनियों के मुनाफे में सुधार होने की पूरी संभावना है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हो भी जाता है, तो स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से ऊर्जा की सप्लाई तुरंत बहाल नहीं होगी। वर्तमान परिस्थितियों और डैमेज हुए एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह से सामान्य होने में कई महीनों का लंबा समय लग सकता है।





































