चंद्रमा का कन्या राशि में गोचर (21 जून)
21 जून को चंद्रमा सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में गोचर कर जाएंगे। चंद्रमा का यह महत्वपूर्ण गोचर दोपहर 3 बजकर 44 मिनट पर होगा। बुध की राशि कन्या में बैठकर चंद्रमा कुछ राशियों को बेहद सुखद परिणाम दिला सकते हैं। आइए जानते हैं किन राशियों के लिए चंद्रमा का यह राशि परिवर्तन लाभदायक रहने वाला है:
मिथुन राशि
चंद्रमा का गोचर आपके सुख भाव यानी चतुर्थ भाव में होगा। शुभ ग्रह चंद्रमा का आपके सुख भाव में होना आपको जीवन में सुखद अनुभव करवाएगा।
- जून के नए सप्ताह की शुरुआत आपके लिए आनंददायक रह सकती है।
- कार्यक्षेत्र में कुछ लोगों को पदोन्नति मिलने के योग हैं।
- आमदनी में वृद्धि हो सकती है या आय के नए स्रोत मिल सकते हैं।
- माता का स्वास्थ्य खराब था तो उसमें अच्छे बदलाव आ सकते हैं।
- इस राशि के जातक वाहन या भूमि-भवन खरीद सकते हैं और अपनी ऊर्जा को सही दिशा में लगा पाने में कामयाब होंगे।
कन्या राशि
चंद्रमा आपकी ही राशि में गोचर करेंगे इसलिए आप मानसिक रूप से सशक्त होंगे।
- आपकी बौद्धिक क्षमता का विकास होगा और आप सही निर्णय ले पाने में कामयाब होंगे।
- वैवाहिक जीवन में जीवनसाथी के साथ अच्छा समय बिताने का मौका मिल सकता है।
- जो लोग साझेदारी में कारोबार कर रहे हैं, उनको अच्छी डील मिलने से लाभ हो सकता है।
- संचित धन में भी वृद्धि होगी।
- माता-पिता के स्वास्थ्य में भी अच्छे बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
वृश्चिक राशि
चंद्रमा का गोचर आपकी राशि से एकादश भाव में होगा। इस भाव को लाभ का भाव कहा जाता है।
- एकादश भाव में चंद्रमा का गोचर आपको अचानक से धन लाभ करवा सकता है।
- कहीं निवेश किया था तो जबरदस्त रिटर्न मिलने के योग हैं; साथ ही आप सही मार्गदर्शन के साथ धन का निवेश भी कर सकते हैं।
- पारिवारिक जीवन में आपको बड़े भाई-बहनों का सहयोग प्राप्त होगा।
- कारोबारियों के जो मामले अटके हुए थे, उनको फिर से गति मिल सकती है।
- सेहत में भी आपको अच्छे बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
शापित दोष – कारण, प्रभाव और उपाय
शापित दोष ज्योतिष के अशुभ योगों में से एक है। अगर किसी जातक की कुंडली में यह दोष पाया जाता है तो उसको अपने जीवन में संघर्षों का सामना करना पड़ सकता है। यह योग जिस भी भाव में बनता है, उसके शुभ प्रभावों को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है।
शापित योग क्या होता है?
शापित योग को ज्योतिष में ‘श्रापित योग’ भी कहा जाता है। यह दोष कुंडली में तब बनता है जब राहु और शनि एक साथ कुंडली में बैठ जाते हैं। इस दोष के बनने से व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता प्रभावित होती है, बनते काम बिगड़ सकते हैं और स्वास्थ्य भी प्रभावित हो सकता है।
विभिन्न भावों में शापित दोष का प्रभाव
अलग-अलग भावों में इस दोष का बनना अलग-अलग प्रभाव देता है:
- प्रथम (लग्न) भाव: चरित्र में खराबी आ सकती है।
- द्वितीय भाव: संपत्ति पाने में दिक्कत हो सकती है और धन से जुड़े मामलों में परेशानियां आ सकती हैं।
- तृतीय भाव: आपका पराक्रम प्रभावित हो सकता है।
- चतुर्थ भाव: सुख प्राप्ति में दिक्कतें आ सकती हैं।
- पंचम भाव: शिक्षा प्रभावित होती है।
- छठा भाव: शत्रुओं का भय रह सकता है।
- सप्तम भाव: विवाह और साझेदारी में परेशानियां आएंगी।
- अष्टम भाव: अचानक से जीवन में उतार-चढ़ाव आ सकते हैं।
- नवम भाव: भाग्य का साथ कम मिलता है।
- दशम भाव: करियर में उतार-चढ़ाव आ सकते हैं।
- एकादश भाव: लाभ पाने में परेशानियां आ सकती हैं।
- द्वादश भाव: बड़ी धन हानि होने की संभावना रहती है।
शापित दोष से बचने के अचूक उपाय
इस अशुभ योग से बचने और इसके नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए व्यक्ति को निम्नलिखित ज्योतिषीय उपायों का सहारा लेना चाहिए:
- शनि मंत्र: शनिवार के दिन शनि ग्रह के मंत्र ‘ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः’ का जप करें।
- राहु मंत्र: बुधवार के दिन राहु के मंत्र ‘ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः’ का जप करें।
- हनुमान पूजा: हर दिन हनुमान चालीसा का पाठ करने से शापित दोष दूर होता है।
- शिव पूजा: भगवान शिव का पूजन करने से भी इस दोष की प्रतिकूलता दूर होती है।
- पशु-पक्षियों की सेवा: कौआ, कुत्ता और गाय को नियमित रूप से रोटी खिलानी चाहिए।
- दान-पुण्य: हमेशा जरूरतमंद लोगों की सहायता करें।





































