हरिद्वार नगर निगम के इस चर्चित घोटाले में एक और बड़े अधिकारी पर गाज गिरी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है। प्रशासन द्वारा उनके सेवा रिकॉर्ड में एक बहुत ही प्रतिकूल टिप्पणी आधिकारिक रूप से दर्ज की गई है। इस प्रतिकूल टिप्पणी के साथ ही उनका बड़ा आर्थिक नुकसान करने का भी फैसला लिया गया है। सरकार के इस आदेश के तहत उनके अगले तीन सालाना इंक्रीमेंट पूरी तरह से रोक दिए गए हैं।
नियमों का खुला उल्लंघन: इस करोड़ों रुपये के भूमि घोटाले में सरकारी नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गई थीं। यह विवादित जमीन कचरा डंपिंग यार्ड के निर्माण के उद्देश्य से निगम द्वारा खरीदी गई थी। खरीद के इस बड़े लेन-देन के दौरान कई प्रक्रियात्मक और विनियामक नियमों का खुला उल्लंघन हुआ था। अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए सभी जरूरी नियमों को ताक पर रख दिया था। पंद्रह करोड़ की जमीन को चौवन करोड़ में खरीदकर सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया गया था।
आईएएस अधिकारियों की मुसीबत: एसडीएम के अलावा इस मामले में दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की मुसीबत भी बढ़ गई है। आरोपी वरुण चौधरी और करमेंद्र सिंह के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। राज्य सरकार ने नियमों के तहत कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग को अपनी कड़ी सिफारिशें भेज दी हैं। इन सिफारिशों में एक अधिकारी की बर्खास्तगी और दूसरे के पद को घटाने की मांग की गई है। डीओपीटी का अंतिम निर्णय आने के बाद इन दोनों आईएएस अधिकारियों पर अंतिम गाज गिरेगी।
सात अधिकारियों का निलंबन: इस घोटाले की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही राज्य सरकार एक्शन मोड में आ गई थी। मुख्यमंत्री ने अनियमितताओं के संकेत मिलते ही अपनी जांच और कार्रवाई का दायरा बढ़ा दिया था। तीन जून दो हजार पच्चीस को मुख्यमंत्री ने इस मामले में पहला बड़ा और सख्त कदम उठाया था। उन्होंने डीएम और नगर आयुक्त सहित कुल सात जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। अब निलंबन के बाद इन अधिकारियों पर बर्खास्तगी और इंक्रीमेंट रोकने जैसी सख्त गाज गिर रही है।
प्रशासनिक महकमे में हड़कंप: जमीन खरीद मामले में मुख्यमंत्री के इस सख्त फैसले से पूरे राज्य में चर्चा हो रही है। इतने बड़े अधिकारियों पर एक साथ हुई कार्रवाई से प्रशासनिक अधिकारियों के बीच हड़कंप मचा हुआ है। मुख्यमंत्री के इस कदम ने नौकरशाही को पूरी तरह से डरा कर रख दिया है। इस कड़े एक्शन से पूरे सरकारी तंत्र में एक बहुत ही स्पष्ट और सख्त संदेश गया है। यह संदेश गया है कि भ्रष्टाचार या गलत करने वाले किसी भी अधिकारी को बिल्कुल भी बख्शा नहीं जाएगा।
भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार: सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी मंशा को एक बार फिर से पूरी तरह स्पष्ट किया है। यह पूरी कार्रवाई राज्य सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का ही एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। घोटाले की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री ने खुद इस पूरे मामले का कड़ा संज्ञान लिया था। प्रारंभिक जांच से लेकर अब तक की कार्रवाई में सरकार ने कोई भी ढिलाई नहीं बरती है। भ्रष्टाचारियों पर हुआ यह ताजा प्रहार भविष्य में होने वाले घोटालों के लिए एक चेतावनी साबित होगा।





































