गोरखपुर प्रेस क्लब में समाजवादी पार्टी की ओर से आयोजित ‘लोकतंत्र बचाओ सप्ताह’ की प्रेस कॉन्फ्रेंस उस समय विवाद में बदल गई, जब बैठने की जगह को लेकर पार्टी नेताओं और समर्थकों के बीच विवाद शुरू हो गया। शनिवार दोपहर करीब दो बजे कार्यक्रम आयोजित किया गया था। प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू होने के लगभग दस मिनट बाद ग्रामीण विधानसभा सीट से वर्ष 2027 के चुनाव में टिकट की दावेदारी कर रहे अंशुमान सिंह अपने समर्थकों के साथ वहां पहुंचे। लगभग 2:12 बजे उन्होंने बैठने के लिए जगह तलाशनी शुरू की, लेकिन सभागार में अधिकांश कुर्सियां पहले से भरी हुई थीं। सामने की ओर समाजवादी पार्टी के कई पदाधिकारी एक साथ बैठे थे और इसी तरफ बैठने को लेकर बाद में विवाद खड़ा हो गया।
कुर्सी लगाने और जगह बनाने को लेकर शुरू हुई बहस: अंशुमान सिंह ने उसी तरफ बैठने की इच्छा जताते हुए एक अतिरिक्त कुर्सी मंगवाई। इसके बाद उनकी ओर से समाजवादी पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष नगीना साहनी से थोड़ा किनारे खिसकने के लिए कहा गया। इसी बात पर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। शुरुआत में मामला केवल बैठने की जगह को लेकर बहस तक सीमित था, लेकिन कुछ ही देर में बातचीत तीखी हो गई और गाली-गलौज शुरू हो गई। इसके बाद स्थिति हाथापाई तक पहुंच गई। इस दौरान अंशुमान सिंह के बेटे कमलेश सिंह पर नगीना साहनी की ओर हाथ उठाने का आरोप लगा। घटना के समय सभागार में मौजूद कैमरे में विवाद का कुछ हिस्सा रिकॉर्ड होने की बात भी सामने आई है।
नगीना साहनी ने लगाए गंभीर आरोप: पूर्व जिलाध्यक्ष नगीना साहनी ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अंशुमान सिंह और उनके बेटे पर मारपीट का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि विवाद के दौरान उनके साथ हाथापाई की गई और उन्हें धमकाया भी गया। नगीना साहनी के आरोप के मुताबिक अंशुमान सिंह और उनके बेटे ने उनके साथ मारपीट की तथा इसी दौरान अवैध पिस्तौल दिखाकर उन्हें मारने की धमकी दी गई। मामले को लेकर नगीना साहनी ने अंशुमान सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। इस शिकायत के बाद कुर्सी को लेकर शुरू हुआ विवाद केवल पार्टी के भीतर का अनुशासनात्मक मामला नहीं रहा, बल्कि पुलिस कार्रवाई तक भी पहुंच गया।
हंगामे के दौरान पुलिस को करना पड़ा हस्तक्षेप: विवाद बढ़ने के बाद प्रेस क्लब के सभागार में करीब दस से पंद्रह मिनट तक हंगामे की स्थिति बनी रही। दोनों पक्षों के बीच बढ़ती हाथापाई को देखते हुए समाजवादी पार्टी के अन्य नेताओं को हस्तक्षेप करना पड़ा। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिसकर्मी भी मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों को अलग करने की कोशिश की। इस दौरान कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह बिगड़ गया। जिस प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी से जुड़े राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा होनी थी, वहीं पार्टी के नेताओं और समर्थकों के बीच विवाद होने से स्थिति असहज हो गई। बाद में घटना से जुड़े आरोपों और वीडियो सामने आने के बाद मामला और गंभीर हो गया।
अंशुमान सिंह पर पार्टी की अनुशासनात्मक कार्रवाई: विवाद के बाद समाजवादी पार्टी ने अंशुमान सिंह के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी से निष्कासित कर दिया। पार्टी की इस कार्रवाई के साथ ही घटना ने संगठन के भीतर भी गंभीर रूप ले लिया। एक ओर नगीना साहनी की शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज होने की बात सामने आई, वहीं दूसरी ओर संगठन ने भी अंशुमान सिंह के खिलाफ अपना फैसला सुनाया। इस पूरे घटनाक्रम में अंशुमान सिंह के बेटे कमलेश सिंह का नाम भी मारपीट के आरोपों में सामने आया है। पार्टी की कार्रवाई का आधार प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हुए विवाद और अनुशासनहीनता को बताया गया है।
मामूली विवाद से बढ़ा मामला: गोरखपुर की यह घटना इस बात को लेकर चर्चा में है कि किस तरह बैठने की जगह और थोड़ा किनारे खिसकने की बात से शुरू हुआ विवाद कुछ ही समय में गाली-गलौज, हाथापाई और थप्पड़बाजी तक पहुंच गया। अंशुमान सिंह अपने समर्थकों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहुंचे थे और सभागार में जगह कम होने के बाद कुर्सी को लेकर नगीना साहनी से विवाद हुआ। इसके बाद दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। अब एक तरफ प्राथमिकी दर्ज होने का मामला है तो दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी ने अंशुमान सिंह को अनुशासनहीनता के आरोप में निष्कासित कर दिया है। ऐसे में इस घटना ने पार्टी की स्थानीय राजनीति और संगठनात्मक अनुशासन को लेकर भी चर्चा तेज कर दी है।
















































