डेंगू में प्लेटलेट्स कम होने का खतरा: डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसे संक्रमणों के दौरान कई मरीजों में प्लेटलेट्स की संख्या घट सकती है। डेंगू में प्लेटलेट्स की गिरावट पर विशेष ध्यान देना जरूरी होता है, क्योंकि कुछ मामलों में इनकी संख्या तेजी से कम हो सकती है और मरीज की हालत गंभीर हो सकती है। यही वजह है कि डेंगू का इलाज करा रहे मरीजों के रक्त की जांच और प्लेटलेट्स की निगरानी चिकित्सकीय सलाह के अनुसार की जाती है। समय पर जांच, उचित उपचार और शरीर में पानी की कमी न होने देना बीमारी के दौरान महत्वपूर्ण है। संतुलित आहार भी मरीज को जरूरी पोषक तत्व देने में मदद कर सकता है। हालांकि, केवल खानपान या घरेलू उपायों के भरोसे डेंगू का इलाज नहीं करना चाहिए और प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए किसी भी चीज को निश्चित या तुरंत असर करने वाला उपाय नहीं मानना चाहिए।
प्लेटलेट्स के लिए बताए जाने वाले आहार और घरेलू उपाय: पारंपरिक और आयुर्वेदिक सलाह में लौकी के रस में शहद मिलाकर पीने, नाश्ते में अनार और अंजीर शामिल करने तथा व्हीटग्रास, एलोवेरा और गिलोय के रस का उल्लेख किया जाता है। पपीते के पत्तों का रस, कीवी और कद्दू के बीज भी उन चीजों में गिने जाते हैं जिन्हें प्लेटलेट्स कम होने की स्थिति में इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। कुछ मान्यताओं में इनका नियमित सेवन करने से एक सप्ताह के भीतर सुधार होने का दावा किया जाता है, लेकिन इन उपायों से प्लेटलेट्स निश्चित समय में बढ़ने के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं। खास तौर पर गिलोय, एलोवेरा और पपीते के पत्तों के रस का सेवन डॉक्टर से पूछकर ही करना चाहिए, क्योंकि हर मरीज के लिए इनकी सुरक्षा और उपयुक्तता समान नहीं होती। डेंगू के मरीज को कोई भी जड़ी-बूटी या घरेलू नुस्खा चिकित्सकीय उपचार के विकल्प के रूप में नहीं अपनाना चाहिए।
डेंगू के दौरान पानी और दूसरे तरल पदार्थों की भूमिका: बुखार और उल्टी के कारण शरीर में पानी तथा जरूरी तरल पदार्थों की कमी हो सकती है। इसलिए डेंगू के मरीज को डॉक्टर की सलाह के अनुसार पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लेते रहना चाहिए। सादा पानी और नारियल पानी इसके विकल्प हो सकते हैं। तुलसी के पत्ते उबालकर बनाया गया पानी भी पारंपरिक घरेलू उपायों में शामिल है, जबकि पपीते के पत्तों के रस और गिलोय के रस का इस्तेमाल भी कुछ लोग करते हैं। अनार का रस पीने की सलाह भी दी जाती है, खासकर जब मरीज को उल्टी या कमजोरी की परेशानी हो। हालांकि, गिलोय या पपीते के पत्तों के रस को बुखार उतारने अथवा उल्टी रोकने का प्रमाणित उपचार नहीं माना जाना चाहिए। यदि मरीज लगातार उल्टी कर रहा हो, पानी न पी पा रहा हो, पेशाब कम हो रहा हो या बहुत अधिक कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।
कीवी और अनार से मिल सकते हैं जरूरी पोषक तत्व: डेंगू के दौरान कीवी और अनार जैसे फल आहार में शामिल किए जा सकते हैं। कीवी में विटामिन सी और रेशा पाया जाता है। विटामिन सी शरीर की सामान्य प्रतिरक्षा प्रणाली के कामकाज में मदद करता है, जबकि रेशा पाचन के लिए उपयोगी होता है। अनार में भी कई पोषक तत्व होते हैं और इसे साबुत फल या रस के रूप में लिया जा सकता है। पारंपरिक आहार संबंधी सलाह में अनार को लाल रक्त कोशिकाओं और हीमोग्लोबिन के लिए भी लाभकारी बताया जाता है, लेकिन इसे रक्त की कमी का अकेला उपचार नहीं समझना चाहिए। डेंगू में प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए कीवी या अनार को किसी निश्चित मात्रा में खाने से निश्चित परिणाम मिलेगा, ऐसा दावा करना उचित नहीं है। मरीज की भूख, पाचन और डॉक्टर की सलाह के अनुसार फलों का चयन करना बेहतर रहता है।
पपीता, सेब, संतरा और अमरूद भी आहार में शामिल करें: कीवी और अनार के अलावा पपीता, सेब, संतरा और अमरूद भी पौष्टिक आहार का हिस्सा बन सकते हैं। पपीते के पके फल और कच्चे पपीते का उल्लेख पारंपरिक सलाह में प्लेटलेट्स बढ़ाने के संदर्भ में किया जाता है, जबकि संतरा और अमरूद जैसे फल विटामिन सी सहित अन्य पोषक तत्व देते हैं। फल खाने से शरीर को ऊर्जा, पानी और जरूरी विटामिन मिल सकते हैं, लेकिन इनका सेवन डेंगू के इलाज की जगह नहीं लेता। मरीज को अपनी सहनशीलता के अनुसार फल खाने चाहिए और यदि उल्टी, पेट की परेशानी या भोजन करने में कठिनाई हो तो चिकित्सक से आहार संबंधी सलाह लेनी चाहिए। प्लेटलेट्स की संख्या केवल लक्षणों के आधार पर नहीं जानी जा सकती, इसलिए डॉक्टर के निर्देश पर रक्त जांच कराना जरूरी है। प्लेटलेट्स कम होने पर खुद से दवाएं या सप्लीमेंट शुरू करने से भी बचना चाहिए।
कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है: डेंगू में खानपान सहायक हो सकता है, लेकिन मरीज की निगरानी और समय पर चिकित्सा सबसे अहम हैं। प्लेटलेट्स की संख्या में गिरावट, लगातार उल्टी, पेट में तेज दर्द, नाक या मसूड़ों से खून आना, मल या उल्टी में खून दिखना, असामान्य सुस्ती, बेचैनी, सांस लेने में परेशानी या पेशाब में कमी जैसे संकेत गंभीर स्थिति की ओर इशारा कर सकते हैं। ऐसे लक्षण होने पर घरेलू उपाय आजमाने या प्लेटलेट्स अपने आप बढ़ने का इंतजार करने के बजाय तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। डेंगू में प्लेटलेट्स बढ़ाने के लिए किसी एक फल, रस या जड़ी-बूटी पर निर्भर रहना ठीक नहीं है। डॉक्टर की निगरानी, पर्याप्त तरल पदार्थ, सहनशीलता के अनुसार पौष्टिक भोजन और जरूरत के अनुसार जांच व उपचार ही सुरक्षित देखभाल का आधार हैं।














































