राजधानी दिल्ली के होटल, रेस्टोरेंट और क्लाउड किचन में परोसे जाने वाले पनीर की शुद्धता को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है। इस याचिका में यह बड़ा सवाल उठाया गया है कि क्या रेस्टोरेंट में पनीर टिक्का, कड़ाही पनीर या पनीर बटर मसाला ऑर्डर करने वाले ग्राहकों को वास्तव में शुद्ध दूध से बना पनीर मिल रहा है, या फिर पनीर के नाम पर कोई दूसरा नॉन-डेयरी विकल्प परोसा जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने संबंधित विभागों से जवाब तलब किया है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने छह हफ्ते में मांगा जवाब
दिल्ली हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस नितिन वासुदेव सांब्रे और जस्टिस संजय शर्मा की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI), केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और खाद्य सुरक्षा आयुक्त को नोटिस जारी किया है। अदालत ने सभी संबंधित पक्षों को छह हफ्ते के भीतर अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। याचिका में मांग की गई है कि पनीर के नाम पर बाजार में बेचे जा रहे गैर-डेयरी उत्पादों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और खाद्य सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन हो।
त्योहारों से पहले जांच अभियान की मांग पर फिलहाल राहत नहीं
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से अंतरिम आदेश की मांग करते हुए कहा था कि आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए ऐसे मिलावटी और नॉन-डेयरी उत्पादों की बिक्री रोकने के लिए तुरंत एक विशेष जांच अभियान चलाया जाना चाहिए। हालांकि, हाईकोर्ट ने फिलहाल किसी भी तरह का अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया है। अदालत का कहना है कि सभी पक्षों के आधिकारिक जवाब सामने आने के बाद ही इस पर आगे की सुनवाई और निर्णय लिया जाएगा।
ग्राहकों के लिए असली और नकली पनीर में फर्क करना मुश्किल
यह जनहित याचिका कानून की छात्रा रिधिमा सिंह और वकील अवलोकितेश्वर सिद्धार्थ द्वारा संयुक्त रूप से दायर की गई है। याचिका में यह तर्क दिया गया है कि जब कोई आम ग्राहक रेस्टोरेंट में पनीर से बनी डिश ऑर्डर करता है, तो वह यही मानकर चलता है कि उसे असली डेयरी उत्पाद मिल रहा है। लेकिन यदि उसकी जगह किसी सस्ते प्लांट-बेस्ड या नॉन-डेयरी विकल्प का इस्तेमाल किया जा रहा है, तो ग्राहक के लिए इसकी पहचान करना बेहद मुश्किल हो जाता है, खासकर ऑनलाइन फूड डिलीवरी के मामले में यह और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
फैक्ट्री से लेकर रेस्टोरेंट तक नियमित निगरानी की मांग
याचिकाकर्ताओं ने मांग की है कि केवल पनीर बनाने वाली फैक्ट्रियों की जांच तक सीमित न रहा जाए, बल्कि थोक बाजारों, सप्लायरों, दुकानों, रेस्टोरेंट और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों में भी नियमित रूप से सैंपल लेकर जांच की जानी चाहिए। याचिका में यह भी स्पष्ट किया गया है कि उनका मकसद प्लांट-बेस्ड या अन्य विकल्पों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना नहीं है, बल्कि उनकी वास्तविक पहचान छिपाकर उन्हें ‘पनीर’ के रूप में बेचने या परोसने पर रोक लगनी चाहिए ताकि उपभोक्ता अपनी पसंद का चुनाव सोच-समझकर कर सकें।








































