16 अक्टूबर 2026, शुक्रवार को शारदीय नवरात्रि का छठा दिन है। इस अवसर पर मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना की जाएगी। आश्विन शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि शनिवार सुबह 5 बजकर 54 मिनट तक रहेगी। शुक्रवार रात 10 बजकर 6 मिनट तक शोभन योग रहेगा और मूल नक्षत्र शनिवार सुबह 9 बजकर 47 मिनट तक प्रभावी रहेगा। आइए जानते हैं आज का पंचांग, शुभ-अशुभ मुहूर्त, राहुकाल, चौघड़िया, सूर्योदय-सूर्यास्त और नवरात्रि की षष्ठी पूजा का महत्व।
आज का पंचांग
दिन: शुक्रवार
विक्रम संवत: 2083, सिद्धार्थी
शक संवत: 1948, पराभव
अयन: दक्षिणायन
ऋतु: शरद ऋतु
संक्रांति: उपलब्ध विवरण में उल्लेख नहीं
मास: आश्विन मास
पक्ष: शुक्ल पक्ष
तिथि: षष्ठी, शनिवार सुबह 5:54 बजे तक; इसके बाद सप्तमी
नक्षत्र: मूल, शनिवार सुबह 9:47 बजे तक
योग: शोभन योग, रात 10:06 बजे तक; इसके बाद अतिगण्ड योग
सूर्य राशि: कन्या
चंद्र राशि: वृश्चिक, सुबह 6:47 बजे तक; इसके बाद धनु राशि
शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:55 बजे से 5:44 बजे तक
प्रातः संध्या: सुबह 5:19 बजे से 6:33 बजे तक
अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से 12:47 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:15 बजे से 6:40 बजे तक
सायाह्न संध्या: शाम 6:15 बजे से 7:29 बजे तक
अमृत काल: 17 अक्टूबर की सुबह 2:35 बजे से 4:23 बजे तक
बिल्व निमंत्रण मुहूर्त: दोपहर 3:55 बजे से शाम 6:15 बजे तक
अशुभ मुहूर्त
राहुकाल (दिल्ली): सुबह 10:40 बजे से दोपहर 12:06 बजे तक
गुलिक काल: सुबह 7:48 बजे से 9:14 बजे तक
यमगण्ड काल: दोपहर 2:59 बजे से शाम 4:25 बजे तक
दिशाशूल: पश्चिम दिशा
सूर्य और चंद्रमा का समय
सूर्योदय: सुबह 6:22 बजे
सूर्यास्त: शाम 5:51 बजे
चन्द्रोदय: रात 8:20 बजे
चन्द्रास्त: सुबह 7:33 बजे
दिन की चौघड़िया
दिन की चौघड़िया (सुबह से शाम):
चर (सामान्य): 06:22 AM से 07:48 AM
लाभ (शुभ): 07:48 AM से 09:14 AM
अमृत (सर्वोत्तम): 09:14 AM से 10:40 AM
काल (अशुभ): 10:40 AM से 12:06 PM
शुभ (शुभ): 12:06 PM से 01:32 PM
रोग (अशुभ): 01:32 PM से 02:58 PM
उद्वेग (अशुभ): 02:58 PM से 04:24 PM
चर (सामान्य): 04:24 PM से 05:51 PM
रात की चौघड़िया (शाम से अगले दिन सुबह):
- रोग (अशुभ): 05:51 PM से 07:25 PM
- काल (अशुभ): 07:25 PM से 08:59 PM
- लाभ (शुभ): 08:59 PM से 10:33 PM
- उद्वेग (अशुभ): 10:33 PM से 12:06 AM (17 Oct)
- शुभ (शुभ): 12:06 AM से 01:40 AM
- अमृत (सर्वोत्तम): 01:40 AM से 03:14 AM
- चर (सामान्य): 03:14 AM से 04:48 AM
- रोग (अशुभ): 04:48 AM से 06:23 AM
राज्यवार राहुकाल
| क्रमांक | राज्य/केंद्रशासित प्रदेश | राजधानी | राहुकाल समय |
|---|---|---|---|
| 1 | उत्तर प्रदेश | लखनऊ | सुबह 10:25 से 11:51 बजे तक |
| 2 | दिल्ली (एनसीआर) | नई दिल्ली | सुबह 10:40 से दोपहर 12:06 बजे तक |
| 3 | जम्मू और कश्मीर | श्रीनगर | सुबह 10:48 से दोपहर 12:12 बजे तक |
| 4 | आंध्र प्रदेश | अमरावती | सुबह 10:24 से 11:52 बजे तक |
| 5 | अरुणाचल प्रदेश | ईटानगर | सुबह 9:19 से 10:46 बजे तक |
| 6 | असम | दिसपुर | सुबह 9:29 से 10:56 बजे तक |
| 7 | बिहार | पटना | सुबह 10:06 से 11:33 बजे तक |
| 8 | छत्तीसगढ़ | रायपुर | सुबह 10:23 से 11:50 बजे तक |
| 9 | गोवा | पणजी | सुबह 10:48 से दोपहर 12:17 बजे तक |
| 10 | गुजरात | गांधीनगर | सुबह 11:00 से दोपहर 12:28 बजे तक |
| 11 | हरियाणा | चंडीगढ़ | सुबह 10:42 से दोपहर 12:08 बजे तक |
| 12 | हिमाचल प्रदेश | शिमला | सुबह 10:41 से दोपहर 12:06 बजे तक |
| 13 | झारखंड | रांची | सुबह 10:09 से 11:36 बजे तक |
| 14 | कर्नाटक | बेंगलुरु | सुबह 10:37 से दोपहर 12:06 बजे तक |
| 15 | केरल | तिरुवनंतपुरम | सुबह 10:39 से दोपहर 12:09 बजे तक |
| 16 | मध्य प्रदेश | भोपाल | सुबह 10:42 से दोपहर 12:09 बजे तक |
| 17 | महाराष्ट्र | मुंबई | सुबह 10:57 से दोपहर 12:25 बजे तक |
| 18 | मणिपुर | इंफाल | सुबह 9:17 से 10:44 बजे तक |
| 19 | मेघालय | शिलांग | सुबह 9:28 से 10:55 बजे तक |
| 20 | मिजोरम | आइजोल | सुबह 9:20 से 10:47 बजे तक |
| 21 | नागालैंड | कोहिमा | सुबह 9:16 से 10:43 बजे तक |
| 22 | ओडिशा | भुवनेश्वर | सुबह 10:08 से 11:35 बजे तक |
| 23 | पंजाब | चंडीगढ़ | सुबह 10:44 से दोपहर 12:10 बजे तक |
| 24 | राजस्थान | जयपुर | सुबह 10:50 से दोपहर 12:17 बजे तक |
| 25 | सिक्किम | गंगटोक | सुबह 9:47 से 11:14 बजे तक |
| 26 | तमिलनाडु | चेन्नई | सुबह 10:27 से 11:56 बजे तक |
| 27 | तेलंगाना | हैदराबाद | सुबह 10:30 से 11:58 बजे तक |
| 28 | त्रिपुरा | अगरतला | सुबह 9:24 से 10:51 बजे तक |
| 29 | उत्तराखंड | देहरादून | सुबह 10:38 से दोपहर 12:03 बजे तक |
| 30 | पश्चिम बंगाल | कोलकाता | सुबह 9:53 से 11:20 बजे तक |
नवरात्रि का छठा दिन: मां कात्यायनी की पूजा का महत्व
शारदीय नवरात्रि की षष्ठी तिथि पर मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऋषि कात्यायन के यहां जन्म लेने के कारण देवी का नाम कात्यायनी पड़ा। उन्हें शक्ति, साहस और भय से मुक्ति प्रदान करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। भक्त इस दिन विधि-विधान से पूजा करके परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मंगल की कामना करते हैं।
नवरात्रि षष्ठी पूजा का महत्व
बंगाल की दुर्गा पूजा परंपरा में षष्ठी तिथि का विशेष महत्व है। इस दिन देवी का बोधन और आमंत्रण किया जाता है। इसे दुर्गा पूजा के प्रमुख अनुष्ठानों की शुरुआत से जोड़कर देखा जाता है। दुर्गा पूजा में मां दुर्गा के महिषासुरमर्दिनी स्वरूप की भव्य प्रतिमा स्थापित की जाती है। कई पारंपरिक प्रतिमाओं में मां दुर्गा के साथ भगवान गणेश, भगवान कार्तिकेय, माता लक्ष्मी और मां सरस्वती भी विराजमान होते हैं।
नवरात्रि षष्ठी पूजा 2026: बिल्व निमंत्रण मुहूर्त
षष्ठी तिथि प्रारंभ: 16 अक्टूबर 2026, सुबह 3:25 बजे
षष्ठी तिथि समाप्त: 17 अक्टूबर 2026, सुबह 5:54 बजे
बिल्व निमंत्रण मुहूर्त: शाम 3:55 बजे से 6:15 बजे तक
बिल्व निमंत्रण दुर्गा पूजा की एक महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा है। इसमें बिल्व वृक्ष या उसकी शाखा से संबंधित विधि के माध्यम से देवी को पूजा के लिए आमंत्रित किया जाता है। यह परंपरा विशेष रूप से बंगाल की दुर्गा पूजा में प्रचलित है। पूजा की विधि और सामग्री क्षेत्रीय तथा पारिवारिक परंपराओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
आज के पंचांग की विशेष बातें
नवरात्रि: छठा दिन, मां कात्यायनी की पूजा
तिथि परिवर्तन: शनिवार सुबह 5:54 बजे के बाद सप्तमी
योग परिवर्तन: शुक्रवार रात 10:06 बजे के बाद अतिगण्ड योग
नक्षत्र परिवर्तन: शनिवार सुबह 9:47 बजे के बाद अगला नक्षत्र














































