उत्तर प्रदेश में नवरात्रि के त्योहार के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने 19 अक्टूबर को अवकाश रखने का निर्णय लिया है। यह फैसला महानवमी के अवसर को देखते हुए किया गया है। देश के विभिन्न राज्यों में इन दिनों नवरात्रि का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है और श्रद्धालु मां दुर्गा की पूजा-अर्चना में जुटे हैं। इसी बीच उत्तर प्रदेश में अवकाश की घोषणा सामने आई है। महानवमी नवरात्रि के प्रमुख दिनों में शामिल है और इस अवसर पर धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। सरकार ने इसी पर्व को ध्यान में रखते हुए 19 अक्टूबर को छुट्टी रखने का फैसला किया है। इस निर्णय से एक बार फिर त्योहारों के अवसर पर राज्य सरकार की ओर से घोषित किए जाने वाले सार्वजनिक अवकाश चर्चा में आ गए हैं।
पिछले त्योहारों पर भी सरकार ने लिए थे छुट्टी संबंधी फैसले: उत्तर प्रदेश में योगी सरकार पहले भी धार्मिक पर्वों के अवसर पर अवकाश घोषित कर चुकी है। इस वर्ष रामनवमी पर 26 और 27 मार्च को लगातार दो दिन छुट्टी रखने का ऐलान किया गया था। इससे पहले मकर संक्रांति के अवसर पर 15 जनवरी को भी प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया था। अब महानवमी के मौके पर 19 अक्टूबर को अवकाश का फैसला लिया गया है। इन घोषणाओं से स्पष्ट होता है कि प्रमुख धार्मिक अवसरों पर छुट्टी को लेकर सरकार अलग-अलग मौकों पर निर्णय करती रही है। रामनवमी और मकर संक्रांति के बाद महानवमी के लिए अवकाश की घोषणा इसी सिलसिले में एक नया फैसला है। हालांकि, प्रत्येक पर्व पर छुट्टी की तारीख और अवधि सरकार की ओर से जारी निर्णय के अनुसार निर्धारित होती है।
मां कात्यायनी को नारीशक्ति और अदम्य साहस का प्रतीक बताया: नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा होती है। इसी दिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में मां कात्यायनी को समस्त बाधाओं और आसुरी प्रवृत्तियों का संहार करने वाली शक्ति बताया। उन्होंने कहा कि मां कात्यायनी नारीशक्ति के अदम्य साहस, अटूट संकल्प और अजेय पराक्रम का प्रतीक हैं। अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने प्रदेश में महिलाओं की स्थिति और उनके लिए उपलब्ध अवसरों का भी जिक्र किया। उन्होंने वर्ष 2017 से पहले के समय को याद करते हुए कहा कि उस दौर में भय और अराजकता के कारण बेटियों के सपनों पर बंदिशें थीं। उनके मुताबिक, प्रतिभाशाली बेटियों को अवसरों और संसाधनों की कमी का सामना करना पड़ता था। उन्होंने अपने संदेश में पिछले साढ़े नौ वर्षों के दौरान हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए सुरक्षा और प्रोत्साहन को महत्वपूर्ण बताया।
गांव से विश्वविद्यालय तक खेल सुविधाओं का विस्तार: मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में खेल सुविधाओं का दायरा गांवों के मैदानों से लेकर जिला और मंडल स्तर के संस्थानों तक बढ़ा है। उन्होंने गांवों के खेल मैदानों, विकासखंड स्तर के लघु स्टेडियमों, जिला स्तरीय स्टेडियमों और मंडल स्तर के खेल महाविद्यालयों का उल्लेख किया। मेरठ में मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय को भी उन्होंने खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए महत्वपूर्ण आधार बताया। उनके अनुसार, इन सुविधाओं के जरिए बेटियों को अपनी क्षमता दिखाने और खेलों में आगे बढ़ने के अवसर मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में यह भी कहा कि पहले संसाधनों की कमी और अवसरों का अभाव खिलाड़ियों के सामने बड़ी बाधा थे, जबकि अब खेल सुविधाओं के विस्तार से प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने इस बदलाव को प्रदेश में खेलों के विकास और महिला खिलाड़ियों की प्रगति से जोड़ा।
पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के लिए पुरस्कार और नौकरी की व्यवस्था: योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में ओलंपिक, राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को मिलने वाले पुरस्कारों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पदक विजेताओं को लाखों से लेकर करोड़ों रुपये तक की पुरस्कार राशि दी जाती है। इसके साथ ही ‘पदक लाओ, पद पाओ’ व्यवस्था के तहत खिलाड़ियों को सीधी भर्ती के अवसर भी मिलते हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, इन उपायों से खिलाड़ियों की प्रतिभा को बढ़ावा मिलता है, उनकी उपलब्धियों को सम्मान दिया जाता है और भविष्य के लिए सुरक्षा मिलती है। उन्होंने कहा कि खेलों में अच्छा प्रदर्शन करने वालों को पुरस्कार और रोजगार के अवसर देना उनकी मेहनत को पहचान देने का एक तरीका है। इन व्यवस्थाओं के कारण प्रदेश के खिलाड़ियों को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने और अपनी उपलब्धियों को बेहतर अवसरों में बदलने का आधार मिलता है।
पारुल चौधरी से दिव्या काकरान तक कई खिलाड़ियों की उपलब्धियों का जिक्र: मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में उन महिला खिलाड़ियों के नाम गिनाए, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश और प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। एथलेटिक्स में पारुल चौधरी, प्रियंका गोस्वामी, प्राची चौधरी और अन्नू रानी का उल्लेख किया गया। जूडो में अस्मिता डे, क्रिकेट में दीप्ति शर्मा और मेघना सिंह, हॉकी में वंदना कटारिया तथा कुश्ती में दिव्या काकरान के प्रदर्शन की सराहना की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन खिलाड़ियों ने राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों में शानदार प्रदर्शन करके अपनी प्रतिभा साबित की है। उनके अनुसार, खेल सुविधाओं का विस्तार, पुरस्कार और सीधी भर्ती जैसी व्यवस्थाएं खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का अवसर देती हैं। मां कात्यायनी की पूजा के दिन साझा किए गए इस संदेश में महिला खिलाड़ियों की उपलब्धियों और नारीशक्ति को प्रमुखता दी गई। अंत में मुख्यमंत्री ने ‘जय मां कात्यायनी’ कहकर अपने संदेश का समापन किया।












































