धृति योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का समय: वैदिक ज्योतिष के अनुसार, 19 अक्टूबर 2026, सोमवार को धृति योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है। दिल्ली के पंचांग के अनुसार, धृति योग 18 अक्टूबर की रात 11 बजकर 56 मिनट पर शुरू होकर 20 अक्टूबर की रात 12 बजकर 35 मिनट पर समाप्त होगा। वहीं, सर्वार्थ सिद्धि योग 19 अक्टूबर को दोपहर 3 बजकर 38 मिनट से शुरू होकर 20 अक्टूबर की सुबह 6 बजकर 25 मिनट तक रहेगा। धृति योग धैर्य, स्थिरता और दृढ़ता का प्रतीक माना जाता है। इस योग में जिम्मेदारियों को व्यवस्थित ढंग से निभाने, योजनाओं को आगे बढ़ाने और सोच-समझकर निर्णय लेने पर जोर दिया जाता है। सर्वार्थ सिद्धि योग को शुभ कार्यों की शुरुआत, व्यावसायिक योजनाओं और महत्वपूर्ण कामों के लिए अनुकूल माना जाता है। 19 अक्टूबर को सोमवार और श्रवण नक्षत्र के संयोग से सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है।
धृति योग में इन राशियों को मिलेगा लाभ: ज्योतिषीय राशिफल के अनुसार, मेष, वृषभ, मिथुन, सिंह और मकर राशि के जातकों के लिए धृति योग अनुकूल रहेगा। मेष राशि: नौकरी और व्यापार में प्रगति होगी। नई जिम्मेदारियां मिलेंगी और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। उपाय: हनुमान जी को सिंदूर अर्पित करें। वृषभ राशि: व्यापार में लाभ होगा और संपत्ति से जुड़े काम आगे बढ़ेंगे। पुराने आर्थिक मामलों को सुलझाने में सफलता मिलेगी। उपाय: मां दुर्गा की आराधना करें। मिथुन राशि: नए संपर्क बनेंगे और करियर में आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे। बौद्धिक क्षमता और समझदारी से काम पूरे होंगे। उपाय: भगवान गणेश को दूर्वा चढ़ाएं। सिंह राशि: कार्यक्षेत्र में प्रतिष्ठा बढ़ेगी और नेतृत्व क्षमता मजबूत होगी। आर्थिक योजनाओं को आगे बढ़ाने में सफलता मिलेगी। उपाय: सूर्य देव को जल अर्पित करें। मकर राशि: वरिष्ठ लोगों का मार्गदर्शन मिलेगा और व्यावसायिक योजनाओं में प्रगति होगी। संपत्ति से जुड़े मामलों में व्यवस्थित तरीके से काम करने का लाभ मिलेगा। उपाय: भगवान शिव की पूजा करें।
धृति योग में सावधानी रखने वाली राशियां और उपाय: कर्क, तुला, वृश्चिक, कुंभ और मीन राशि के जातकों को इस दौरान अपने महत्वपूर्ण निर्णयों में विशेष सावधानी रखनी चाहिए। कर्क राशि: भावनाओं में बहकर निर्णय लेने से बचें और आर्थिक मामलों को सोच-समझकर संभालें। उपाय: शिवलिंग पर जल अर्पित करें। तुला राशि: काम का दबाव बढ़ने पर समय का सही प्रबंधन करें और अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखें। उपाय: मां लक्ष्मी को सफेद पुष्प अर्पित करें। वृश्चिक राशि: सरकारी कागजात, कर और बड़े निवेश से जुड़े मामलों में पूरी जानकारी लेकर ही निर्णय करें। उपाय: हनुमान चालीसा का पाठ करें। कुंभ राशि: साझेदारी और धन के लेन-देन में दस्तावेजों की जांच करें तथा खर्चों का हिसाब व्यवस्थित रखें। उपाय: पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं। मीन राशि: नई योजनाओं में बजट और जिम्मेदारियों को स्पष्ट रखें तथा जल्दबाजी में आर्थिक निर्णय न लें। उपाय: भगवान विष्णु को पीले पुष्प अर्पित करें। ये उपाय पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। किसी राशि को केवल धृति योग के आधार पर निश्चित रूप से अशुभ नहीं माना जाता।
सर्वार्थ सिद्धि योग में इन राशियों को मिलेगा लाभ: ज्योतिषीय आकलन के अनुसार, मेष, सिंह, तुला, धनु और मकर राशि के जातकों के लिए सर्वार्थ सिद्धि योग अनुकूल रहेगा। मेष राशि: नौकरी में तरक्की होगी और नए कामों को आगे बढ़ाने में सफलता मिलेगी। आर्थिक योजनाएं मजबूत होंगी। उपाय: हनुमान जी की पूजा करें। सिंह राशि: नेतृत्व क्षमता और मान-सम्मान में वृद्धि होगी। व्यापारिक योजनाओं को आगे बढ़ाने में सफलता मिलेगी। उपाय: सूर्य देव को जल अर्पित करें। तुला राशि: कार्यक्षेत्र में प्रगति होगी और आर्थिक योजनाओं को व्यवस्थित करने में सफलता मिलेगी। महत्वपूर्ण संपर्क मजबूत होंगे। उपाय: मां लक्ष्मी की पूजा करें। धनु राशि: शिक्षा, नई योजनाओं और व्यावसायिक विस्तार से जुड़े काम आगे बढ़ेंगे। उपाय: मंदिर में चने की दाल का दान करें। मकर राशि: करियर में प्रगति होगी और संपत्ति तथा रुके हुए कामों से जुड़े मामलों में आगे बढ़ने का रास्ता खुलेगा। उपाय: भगवान शिव की पूजा करें।
सर्वार्थ सिद्धि योग में सावधानी रखने वाली राशियां और उपाय: कर्क, कुंभ और मीन राशि के जातकों को स्वास्थ्य, आर्थिक मामलों और साझेदारी से जुड़े निर्णयों में अतिरिक्त सावधानी रखनी चाहिए। कर्क राशि: पारिवारिक मामलों में संतुलन बनाए रखें और धन के लेन-देन में सावधानी बरतें। उपाय: शिवलिंग पर जल अर्पित करें और मां दुर्गा की पूजा करें। कुंभ राशि: साझेदारी में किसी समझौते से पहले जरूरी जानकारी की जांच करें और खर्चों पर नियंत्रण रखें। उपाय: पीपल के वृक्ष के नीचे दीपक जलाएं। मीन राशि: आर्थिक जोखिम से बचें और नई योजनाओं में अपनी जिम्मेदारियां स्पष्ट रखें। उपाय: भगवान विष्णु को पीले फूल अर्पित करें। सर्वार्थ सिद्धि योग को परंपरागत रूप से शुभ माना जाता है। इन राशियों के लिए बताई गई सावधानियां सामान्य ज्योतिषीय मार्गदर्शन हैं। शुभ योग के दौरान भी काम की योजना, बजट और आवश्यक तैयारियों पर ध्यान देना चाहिए। राहुकाल और अन्य स्थानीय अशुभ मुहूर्त की जानकारी भी पंचांग से देखनी चाहिए।
चंद्रमा का गोचर और कर्क, तुला व धनु राशि पर प्रभाव: दिए गए ज्योतिषीय विवरण के अनुसार, 18 अक्टूबर को शाम 7 बजकर 33 मिनट पर चंद्रमा धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। इस गोचर का कर्क, तुला और धनु राशि के जातकों के जीवन पर अनुकूल प्रभाव रहेगा। कर्क राशि: चंद्रमा का गोचर आपकी राशि से सप्तम भाव में होगा। सप्तम भाव विवाह और साझेदारी से संबंधित है। वैवाहिक जीवन में सामंजस्य बढ़ेगा और जीवनसाथी के साथ मतभेद दूर होंगे। साझेदारी में कारोबार करने वालों के काम में तेजी आएगी और व्यापार विस्तार के रास्ते खुलेंगे। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी तथा कार्यक्षेत्र में वरिष्ठ अधिकारियों से प्रशंसा मिलेगी। तुला राशि: चंद्रमा का गोचर आपकी राशि से चतुर्थ भाव में होगा। यह भाव घर, सुख-सुविधाओं और माता से संबंधित है। परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी और माता के साथ संबंध मजबूत होंगे। भूमि या वाहन खरीदने की योजना को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। कला के क्षेत्र से जुड़े लोगों को उपलब्धियां मिलेंगी और स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे। धनु राशि: चंद्रमा का गोचर आपकी राशि से द्वितीय भाव में होगा, जो धन और परिवार का कारक माना जाता है। परिवार से शुभ समाचार मिलेगा और सामाजिक मान-सम्मान बढ़ेगा। रुका हुआ धन वापस मिलने से आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। पारिवारिक कारोबार करने वालों के काम में प्रगति होगी और मांगलिक कार्यक्रमों में शामिल होने का अवसर मिलेगा।
विजयदशमी पर राहु-केतु और शनि के प्रभाव की शांति के उपाय: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, विजयदशमी के दिन शनि, राहु और केतु से संबंधित दोषों की शांति के लिए कुछ पारंपरिक उपाय किए जाते हैं। पहला उपाय: विजयदशमी की शाम शमी के वृक्ष की पूजा करें और उसके नीचे सुरक्षित स्थान पर दीपक जलाएं। धार्मिक मान्यता है कि इस पूजा से शनि की कृपा प्राप्त होती है और राहु-केतु से संबंधित परेशानियों की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है। दूसरा उपाय: तीन, पांच या सात पत्ते लेकर उन पर लाल सिंदूर से “जय श्री राम” लिखें। इन पत्तों को हनुमान मंदिर में निर्धारित स्थान पर रखें। पत्तों को हनुमान जी के चरणों में न रखें और मंदिर के नियमों का पालन करें। इस उपाय को शनि, राहु और केतु से संबंधित परेशानियों की शांति के लिए किया जाता है। तीसरा उपाय: रावण दहन के बाद राख को लाल कपड़े की पोटली में रखकर घर की पूर्व दिशा में रखने की परंपरा भी प्रचलित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह उपाय शनि, राहु-केतु और कालसर्प दोष से संबंधित शांति के लिए किया जाता है। इन उपायों को आस्था और परंपरा के अनुसार अपनाया जाता है।
निष्कर्ष: वैदिक ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 19 अक्टूबर 2026 को धृति योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का विशेष महत्व है। धृति योग धैर्य और स्थिरता से जुड़ा है, जबकि सर्वार्थ सिद्धि योग शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए अनुकूल माना जाता है। चंद्रमा के मकर राशि में गोचर से कर्क, तुला और धनु राशि के जातकों के पारिवारिक, आर्थिक और कार्यक्षेत्र से जुड़े मामलों में अनुकूलता रहेगी। विजयदशमी पर शनि, राहु और केतु से संबंधित पारंपरिक उपाय भी श्रद्धा के साथ किए जा सकते हैं। हालांकि, व्यक्ति की जन्मकुंडली, लग्न, दशा और ग्रहों की व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार फलादेश में अंतर हो सकता है।














































