साइबर अपराधियों की पहचान कर संभावित पीड़ितों को समय रहते सचेत करने की दिल्ली पुलिस की पहल से पांच राज्यों में करीब एक करोड़ 53 लाख रुपये की ठगी टल गई। पुलिस की विशेष जांच इकाई की सक्रिय पीड़ित पहचान और सुरक्षा टीम संदिग्ध बैंक खातों में पैसों की आवाजाही पर नजर रख रही थी। इसी दौरान उसे ऐसे लोगों के बारे में जानकारी मिली, जिन्हें डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराया जा रहा था या निवेश के बहाने रकम देने के लिए फंसाया गया था। टीम ने दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात में संबंधित लोगों से संपर्क कर उन्हें ठगों के इरादों से अवगत कराया। कुल पांच मामलों में चार बुजुर्गों या बुजुर्ग दंपतियों को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर निशाना बनाया गया था, जबकि पांचवां मामला निवेश के नाम पर धोखाधड़ी से जुड़ा था।
नजफगढ़ के बुजुर्ग से 25 लाख लेने के बाद फिर मांगे पैसे: दिल्ली के नजफगढ़ में रहने वाले 77 वर्षीय सेवानिवृत्त कर्मचारी को ठगों ने 17 सितंबर से लगातार डराकर अपने जाल में फंसा रखा था। आरोपियों ने पुलिस अधिकारी होने का दावा करते हुए वीडियो कॉल की और उन्हें डिजिटल अरेस्ट में होने का विश्वास दिलाया। इस दौरान बुजुर्ग से 25 लाख रुपये पहले ही ट्रांसफर करा लिए गए थे। ठगों की मांग यहीं नहीं रुकी और उन्होंने तीन लाख रुपये अतिरिक्त देने के लिए दबाव बनाया। साथ ही, बुजुर्ग को अपना सोना-चांदी गिरवी रखने के लिए भी कहा गया। पुलिस टीम ने उनसे संपर्क कर समझाया कि इस तरह डिजिटल अरेस्ट करने का दावा धोखाधड़ी का तरीका है। हस्तक्षेप के बाद बुजुर्ग ने आगे रकम देने से परहेज किया और करीब तीन लाख 48 हजार रुपये के संभावित अतिरिक्त नुकसान से बच गए।
राजस्थान के कारोबारी और पत्नी को आधार कार्ड के नाम पर डराया: राजस्थान में 80 वर्षीय कपड़ा कारोबारी और उनकी पत्नी को आरोपियों ने आधार कार्ड के दुरुपयोग का भय दिखाकर निशाना बनाया। ठगों ने उन्हें डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाया और इस बहाने 18 लाख रुपये वसूल लिए। इसके बाद दंपति से दस लाख रुपये और मांगे गए। आरोपियों ने रकम जुटाने के लिए उनके मकान को गिरवी रखने तक का दबाव बनाया। दिल्ली पुलिस की टीम ने समय रहते दंपति से संपर्क किया और उन्हें बताया कि इस तरह डराकर रकम मांगना साइबर ठगी का तरीका हो सकता है। पुलिस ने साइबर हेल्पलाइन के माध्यम से शिकायत दर्ज कराने में उनकी मदद की। नतीजतन, दंपति ने आगे पैसे नहीं दिए और दस लाख रुपये की अतिरिक्त ठगी टल गई।
विस्फोट के मामले में फंसाने की धमकी देकर एफडी पर नजर: उत्तर प्रदेश में रहने वाले सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारी और उनकी पत्नी, जो स्वास्थ्य विभाग से सेवानिवृत्त नर्स हैं, को आरोपियों ने जम्मू-कश्मीर में हुए विस्फोट से जुड़े मामले में फंसाने की धमकी दी। ठग इस डर का इस्तेमाल कर दंपति से करीब 52 लाख रुपये पहले ही ले चुके थे। अब वे दस लाख रुपये की सावधि जमा तुड़वाकर रकम अपने बताए खाते में भेजने के लिए दबाव डाल रहे थे। पुलिस की समय पर सहायता से दंपति ने यह रकम ट्रांसफर नहीं की। महाराष्ट्र में भी इसी तरह डराकर रकम वसूलने का मामला सामने आया। वहां 65 वर्षीय अस्पताल कर्मचारी को आधार कार्ड का संबंध बम विस्फोट और धनशोधन से जुड़े मामले में बताकर धमकाया गया था। उनसे लगभग 85 लाख रुपये पहले ही वसूले जा चुके थे और अब बेटी की सावधि जमा से 30 लाख तथा दामाद की सावधि जमा से 25 लाख रुपये लेने की कोशिश हो रही थी। पुलिस के हस्तक्षेप से महाराष्ट्र में 55 लाख रुपये और उत्तर प्रदेश में दस लाख रुपये सुरक्षित रहे।
गुजरात के कारोबारी को एक करोड़ के निवेश से पहले हुआ शक: गुजरात में 50 वर्षीय कारोबारी निवेश के नाम पर ठगी का शिकार होने लगे थे। वह पहले ही 25 लाख रुपये ट्रांसफर कर चुके थे और लगभग एक करोड़ रुपये तक निवेश करने की योजना बना रहे थे। संदिग्ध बैंक लेन-देन की जांच कर रही पुलिस टीम ने उनसे संपर्क किया और लगातार बातचीत के जरिए उन्हें सतर्क किया। इसके बाद कारोबारी को एहसास हुआ कि निवेश के नाम पर उनके साथ धोखाधड़ी हो सकती है। उन्होंने आगे कोई रकम ट्रांसफर नहीं की, जिससे करीब 75 लाख रुपये का संभावित अतिरिक्त नुकसान बच गया। दिल्ली पुलिस की कार्रवाई से पांचों मामलों में आगे होने वाली ठगी रोकी गई। इन घटनाओं से पता चलता है कि संदिग्ध लेन-देन की समय पर जांच और संभावित पीड़ितों से सीधा संपर्क बड़ी आर्थिक क्षति रोकने में मददगार हो सकता है।
वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी का दावा करने वालों से रहें सावधान: दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कानून में डिजिटल अरेस्ट की कोई व्यवस्था नहीं है। पुलिस, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो, राष्ट्रीय जांच एजेंसी, भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण और भारतीय रिजर्व बैंक के अधिकारी वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार नहीं करते और न ही जांच या धन की सुरक्षा के नाम पर रकम मांगते हैं। इसलिए किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक खाते से पैसे भेजना, सोना-चांदी गिरवी रखना या सावधि जमा तुड़वाना जोखिम भरा हो सकता है। यदि कोई व्यक्ति सरकारी अधिकारी बनकर डराए या तत्काल भुगतान करने का दबाव बनाए, तो उसकी पहचान की पुष्टि किए बिना कोई कदम नहीं उठाना चाहिए। पुलिस ने लोगों को संदिग्ध कॉल के बारे में शिकायत करने और साइबर हेल्पलाइन की मदद लेने की सलाह दी है, ताकि ठगों को आगे रकम वसूलने से रोका जा सके।














































