4 अक्टूबर को आश्विन कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि और रविवार का दिन है। नवमी तिथि अगले दिन 5 अक्टूबर की सुबह 3 बजकर 54 मिनट तक रहेगी। इसी कारण 4 अक्टूबर को नवमी तिथि में जन्मे या दिवंगत हुए पूर्वजों के लिए श्राद्ध कर्म किया जाएगा। इस दिन मातृ नवमी का श्राद्ध भी है, जो विशेष रूप से दिवंगत महिला पितरों को समर्पित माना जाता है। रविवार को दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक परिघ योग रहेगा, जिसके बाद शिव योग शुरू होगा। मान्यता के अनुसार परिघ योग में शत्रु के विरुद्ध किए गए कार्यों में सफलता प्राप्त होती है। पुनर्वसु नक्षत्र रात 12 बजकर 13 मिनट तक रहेगा और इसके बाद पुष्य नक्षत्र प्रारंभ होगा। आइए जानते हैं 4 अक्टूबर का विस्तृत पंचांग, शुभ-अशुभ मुहूर्त, चौघड़िया, राहुकाल और सूर्योदय-सूर्यास्त का समय।
मुख्य पंचांग विवरण
वार: रविवार
विक्रम संवत: 2083 (सिद्धार्थि संवत्सर)
शक संवत: 1948 (पराभव संवत्सर)
अयन: दक्षिणायन
ऋतु: शरद ऋतु
मास: आश्विन मास
पक्ष: कृष्ण पक्ष (पितृ पक्ष – मातृ नवमी श्राद्ध)
तिथि: नवमी तिथि, अगले दिन 05 अक्टूबर सुबह 03:54 बजे तक
नक्षत्र: पुनर्वसु नक्षत्र रात्रि 12:13 बजे तक, इसके बाद पुष्य नक्षत्र
योग: परिघ योग दोपहर 12:31 बजे तक, इसके बाद शिव योग
सूर्य राशि: कन्या राशि
चन्द्र राशि: मिथुन राशि शाम 06:31 बजे तक, इसके बाद कर्क राशि
शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: 04:38 ए एम से 05:26 ए एम
प्रातः सन्ध्या: 05:11 ए एम से 06:15 ए एम
अभिजित मुहूर्त: 11:46 ए एम से 12:33 पी एम
विजय मुहूर्त: 02:08 पी एम से 02:55 पी एम
गोधूलि मुहूर्त: 06:04 पी एम से 06:28 पी एम
सायं सन्ध्या: 06:04 पी एम से 07:08 पी एम
अमृत काल: 09:58 पी एम से 11:28 पी एम
निशिथ मुहूर्त: 11:45 पी एम से 12:34 ए एम
अशुभ मुहूर्त
राहुकाल: शाम 04:35 पी एम से 06:04 पी एम
यमगंड काल: दोपहर 12:06 पी एम से 01:33 पी एम
गुलिक काल: दोपहर 03:00 पी एम से 04:29 पी एम
दुर्मुहूर्त: शाम 04:33 पी एम से 05:20 पी एम
वर्ज्यम्: दोपहर 12:51 पी एम से 02:22 पी एम
दिशाशूल: पश्चिम दिशा
दिशाशूल उपाय: पश्चिम दिशा में यात्रा आवश्यक होने पर दलिया, घी या पान का सेवन करके प्रस्थान करने की मान्यता है।
सूर्योदय, सूर्यास्त और चन्द्रोदय-चन्द्रास्त
सूर्योदय: सुबह 06:15 बजे
सूर्यास्त: शाम 05:56 बजे
चन्द्रोदय: रात्रि 12:53 बजे
चन्द्रास्त: दोपहर 01:55 बजे
सूर्य राशि: कन्या राशि
चन्द्र राशि: मिथुन राशि शाम 06:31 बजे तक, इसके बाद कर्क राशि
दिन की चौघड़िया
उद्वेग: सुबह 06:15 ए एम से 07:44 ए एम
चर: सुबह 07:44 ए एम से 09:13 ए एम
लाभ: सुबह 09:13 ए एम से 10:41 ए एम
अमृत: सुबह 10:41 ए एम से 12:10 पी एम
काल: दोपहर 12:10 पी एम से 01:39 पी एम
शुभ: दोपहर 01:39 पी एम से 03:08 पी एम
रोग: दोपहर 03:08 पी एम से 04:37 पी एम
उद्वेग: दोपहर 04:37 पी एम से शाम 05:56 पी एम
रात्रि की चौघड़िया
शुभ: शाम 05:56 पी एम से रात्रि 07:27 पी एम
अमृत: रात्रि 07:27 पी एम से 08:58 पी एम
चर: रात्रि 08:58 पी एम से 10:29 पी एम
रोग: रात्रि 10:29 पी एम से 12:00 ए एम
काल: मध्यरात्रि 12:00 ए एम से 01:31 ए एम
लाभ: रात 01:31 ए एम से सुबह 03:02 ए एम
उद्वेग: सुबह 03:02 ए एम से 04:33 ए एम
शुभ: सुबह 04:33 ए एम से 06:16 ए एम
राज्यवार राहुकाल
| क्रमांक | राज्य / केंद्रशासित प्रदेश | राजधानी / प्रमुख शहर | राहुकाल समय 04.10.2026 |
|---|---|---|---|
| 1 | उत्तर प्रदेश | लखनऊ | शाम 04:21 से 05:50 बजे |
| 2 | केंद्रशासित प्रदेश (देश की राजधानी) | नई दिल्ली | शाम 04:35 से 06:04 बजे |
| 3 | केंद्रशासित प्रदेश (जम्मू-कश्मीर) | श्रीनगर | शाम 04:39 से 06:07 बजे |
| 4 | आंध्र प्रदेश | अमरावती | शाम 04:26 से 05:56 बजे |
| 5 | अरुणाचल प्रदेश | ईटानगर | दोपहर 03:31 से 04:59 बजे |
| 6 | असम | दिसपुर / गुवाहाटी | दोपहर 03:41 से 05:10 बजे |
| 7 | बिहार | पटना | दोपहर 04:02 से 05:31 बजे |
| 8 | छत्तीसगढ़ | रायपुर | दोपहर 04:19 से 05:48 बजे |
| 9 | गोवा | पणजी | शाम 04:47 से 06:17 बजे |
| 10 | गुजरात | गांधीनगर / अहमदाबाद | शाम 04:55 से 06:24 बजे |
| 11 | हरियाणा | चंडीगढ़ | शाम 04:36 से 06:05 बजे |
| 12 | हिमाचल प्रदेश | शिमला | शाम 04:35 से 06:03 बजे |
| 13 | झारखंड | रांची | दोपहर 04:07 से 05:36 बजे |
| 14 | कर्नाटक | बेंगलुरु | शाम 04:34 से 06:04 बजे |
| 15 | केरल | तिरुवनंतपुरम | शाम 04:36 से 06:07 बजे |
| 16 | मध्य प्रदेश | भोपाल | शाम 04:34 से 06:03 बजे |
| 17 | महाराष्ट्र | मुंबई | शाम 04:52 से 06:22 बजे |
| 18 | मणिपुर | इम्फाल | दोपहर 03:31 से 04:59 बजे |
| 19 | मेघालय | शिलांग | दोपहर 03:41 से 05:09 बजे |
| 20 | मिजोरम | आइजोल | दोपहर 03:35 से 05:03 बजे |
| 21 | नागालैंड | कोहिमा | दोपहर 03:29 से 04:57 बजे |
| 22 | ओडिशा | भुवनेश्वर | दोपहर 04:08 से 05:37 बजे |
| 23 | पंजाब | चंडीगढ़ | शाम 04:36 से 06:05 बजे |
| 24 | राजस्थान | जयपुर | शाम 04:44 से 06:13 बजे |
| 25 | सिक्किम | गंगटोक | दोपहर 03:52 से 05:20 बजे |
| 26 | तमिलनाडु | चेन्नई | शाम 04:24 से 05:54 बजे |
| 27 | तेलंगाना | हैदराबाद | शाम 04:28 से 05:58 बजे |
| 28 | त्रिपुरा | अगरतला | दोपहर 03:40 से 05:08 बजे |
| 29 | उत्तराखंड | देहरादून | शाम 04:32 से 06:00 बजे |
| 30 | पश्चिम बंगाल | कोलकाता | दोपहर 03:56 से 05:25 बजे |
मातृ नवमी श्राद्ध का महत्व
रविवार को मातृ नवमी का श्राद्ध किया जाएगा, जो विशेष रूप से दिवंगत महिला पितरों को समर्पित माना जाता है। इस अवसर पर दिवंगत दादी, सास, माता, बहन, बेटी और सुहागिन महिलाओं की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध कर्म करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मातृ नवमी पर किया गया श्राद्ध महिला पितरों को तृप्ति प्रदान करता है और परिवार की महिलाओं की सुरक्षा, अच्छे स्वास्थ्य तथा सुख-समृद्धि के लिए भी शुभ माना जाता है। इसके साथ ही 4 अक्टूबर को नवमी तिथि से संबंधित पूर्वजों का श्राद्ध कर्म भी विधि-विधान से किया जाएगा।














































