अल-कायदा समर्थकों की ओर से जारी किए जा रहे एक साप्ताहिक प्रकाशन के ताजा अंक में 30 सितंबर की फ्लाईदुबई उड़ान में हुई कथित घटना को 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमलों से जोड़कर पेश किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रकाशन में अमेरिकी और इजरायली नागरिकों को ले जाने वाले विमानों को निशाना बनाने के लिए उकसाने वाली सामग्री शामिल थी। यह प्रकाशन ‘अल-बयान’ के नाम से जारी किया जाता है और इसे जुलाई में अल-कायदा समर्थकों ने शुरू किया था। बताया गया है कि इस सामग्री को हटाए जाने से पहले संगठन से जुड़े संदेश समूहों में साझा किया गया था। ताजा सामग्री में विमानन क्षेत्र को निशाना बनाने वाली हिंसक विचारधारा को बढ़ावा देने की कोशिश की गई है और पुराने आतंकी हमले का संदर्भ देकर हाल की विमान घटना को उसी संदर्भ में प्रस्तुत किया गया।
अमेरिका और इजरायल के खिलाफ भड़काऊ संदेश: अरबी भाषा में प्रकाशित सामग्री में अमेरिका, इजरायल और उनके नागरिकों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा देने वाली भाषा का इस्तेमाल किया गया। प्रकाशन में कहा गया कि ऐसे विमान अब भी आसमान में मौजूद हैं, जिनमें संगठन की विचारधारा के अनुसार उसके विरोधी माने जाने वाले लोग यात्रा करते हैं और उन्हें निशाना बनाया जा सकता है। सामग्री में यह भी दावा किया गया कि अमेरिका और इजरायल के विरोधियों की संख्या बढ़ रही है और भविष्य में कोई व्यक्ति उन्हें निशाना बना सकता है। इसके साथ अमेरिका के खिलाफ धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल करते हुए उसके प्रभुत्व के अंत की बात कही गई। इस तरह के संदेशों में हिंसक गतिविधियों को धार्मिक उद्देश्य से जोड़ने का प्रयास भी दिखाई देता है। हालांकि, ये बातें संगठन की अपनी कट्टरपंथी सामग्री का हिस्सा हैं और इनका उद्देश्य समर्थकों के बीच हिंसा को बढ़ावा देना है।
11 सितंबर की घटना का प्रतीकात्मक इस्तेमाल: प्रकाशन में 11 सितंबर 2001 के हमलों के दौरान विश्व व्यापार केंद्र से टकराते विमान की तस्वीर शामिल की गई थी। इसके साथ 30 सितंबर की फ्लाईदुबई उड़ान में हुई कथित कब्जे की कोशिश से संबंधित तस्वीर भी लगाई गई। दोनों तस्वीरों को एक ही सामग्री में शामिल करके हाल की घटना को पुराने आतंकी हमले के संदर्भ में दिखाने की कोशिश की गई। रिपोर्ट के अनुसार, यह सामग्री शनिवार को हटाए जाने से पहले अल-कायदा से जुड़े संदेश समूहों में प्रसारित हो चुकी थी। 11 सितंबर के हमलों में अपहृत विमानों का इस्तेमाल आतंकी हमलों के लिए किया गया था। ऐसे में उसी घटना का संदर्भ देकर नागरिक विमानों को निशाना बनाने की अपील सामने आना सुरक्षा एजेंसियों और विमानन क्षेत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
उड़ान में सह-पायलट पर हमले का आरोप: फ्लाईदुबई की उड़ान एफजेड1073 दुबई से तेल अवीव जा रही थी और उसमें 174 लोग सवार थे। उड़ान के दौरान सह-पायलट अल-हमामी पर आरोप है कि उसने कॉकपिट में कप्तान स्मित मच्छार पर पीछे से हमला किया और आपात स्थिति के लिए रखी गई कुल्हाड़ी का इस्तेमाल किया। घटना के बाद विमान की ओर से आपात संदेश भेजा गया और विमान तेजी से नीचे आने लगा। उड़ान करीब 34 हजार फीट की ऊंचाई पर थी, लेकिन कुछ ही समय में यह 17 हजार फीट से नीचे पहुंच गई। कप्तान मच्छार घायल होकर कॉकपिट के फर्श पर पड़े थे और इसी दौरान उन्हें पता चला कि विमान लगातार नीचे जा रहा है। उन्होंने यह भी महसूस किया कि सह-पायलट उन्हें कॉकपिट का दरवाजा खोलने से रोक रहा है, जिसके कारण स्थिति और गंभीर हो गई थी।
यात्रियों ने कथित हमलावर को काबू किया: घायल होने के बावजूद कप्तान मच्छार किसी तरह कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफल हुए। इसके बाद यात्रियों ने कथित हमलावर को काबू में कर लिया। विमान में मौजूद दो रिजर्व पायलट इसके बाद कॉकपिट में पहुंचे और उन्होंने विमान का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। इस कदम से उड़ान को सुरक्षित रूप से आगे ले जाने में मदद मिली और विमान को सऊदी अरब के तबुक स्थित प्रिंस सुल्तान बिन अब्दुलअजीज हवाई अड्डे पर उतारा गया। सुरक्षित लैंडिंग के बाद अल-हमामी को हिरासत में ले लिया गया। घटना के दौरान विमान में सवार यात्रियों और चालक दल के सामने बेहद गंभीर स्थिति पैदा हो गई थी, क्योंकि एक ओर कॉकपिट में कथित हमला हुआ और दूसरी ओर विमान अचानक हजारों फीट नीचे आने लगा था।
घटना के बाद आतंकी संगठन की सामग्री ने बढ़ाई चिंता: फ्लाईदुबई की उड़ान में हुई कथित घटना के बाद अल-कायदा समर्थित प्रकाशन में इसे 11 सितंबर के हमलों के साथ जोड़कर पेश किए जाने से मामला और गंभीर हो गया। एक ओर विमान में कथित हमले के दौरान चालक दल और यात्रियों ने स्थिति संभालकर उड़ान को सुरक्षित उतारने में भूमिका निभाई, वहीं दूसरी ओर उसी घटना को आतंकी प्रचार सामग्री में इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई। प्रकाशन में अमेरिकी और इजरायली नागरिकों को ले जाने वाले विमानों को निशाना बनाने की अपील की गई और 11 सितंबर की घटना का संदर्भ दिया गया। इस घटनाक्रम ने यह चिंता बढ़ाई है कि आतंकी संगठन विमानन क्षेत्र में हुई घटनाओं को अपनी हिंसक विचारधारा के प्रचार और संभावित हमलों के लिए उकसावे के माध्यम के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं।















































