लखनऊ में गोमती नदी का बढ़ता जलस्तर अब लगातार नए क्षेत्रों को प्रभावित कर रहा है। पिछले करीब आठ दिनों से फैजुल्लागंज और बक्शी का तालाब जैसे निचले इलाकों में जमा पानी अब शहर के दूसरे हिस्सों की तरफ फैल रहा है और गोमती नगर तक पहुंच गया है। प्लासियो मॉल तथा इकाना स्टेडियम के आसपास की सड़कों पर पानी भर गया है। इकाना स्टेडियम के आसपास जलभराव की स्थिति बनने के कारण वहां होने वाले वीनू मांकड़ टूर्नामेंट को दूसरी जगह स्थानांतरित करने का फैसला लेना पड़ा। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पानी अब पुलिस मुख्यालय और 112 मुख्यालय के आसपास तक पहुंच गया है। प्रशासन की कोशिश है कि नदी का पानी और आगे न बढ़े तथा प्रमुख सड़कों और महत्वपूर्ण संस्थानों को जलभराव की चपेट में आने से बचाया जा सके।
बोल्डर लगाकर पानी रोकने की कोशिश: गोमती नगर क्षेत्र में पानी पहुंचने के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण ने जलस्तर के प्रभाव को सीमित करने के लिए मौके पर इंतजाम शुरू किए हैं। पानी को प्रमुख मार्गों और आसपास के संस्थानों की ओर आगे बढ़ने से रोकने के लिए बोल्डर लगाए जा रहे हैं। अधिकारियों का उद्देश्य पानी के फैलाव को नियंत्रित करना और महत्वपूर्ण सड़कों को बचाना है। फैजुल्लागंज और बक्शी का तालाब में करीब आठ दिनों से पानी जमा रहने के बाद अब उसका दायरा बढ़कर शहर के अधिक महत्वपूर्ण हिस्सों तक पहुंच गया है। प्लासियो मॉल, इकाना स्टेडियम और इनके सामने मौजूद पुलिस मुख्यालय तथा 112 मुख्यालय के आसपास जलभराव बनने से प्रशासन की निगरानी और बढ़ गई है। आने वाले समय में यदि जलस्तर में और वृद्धि होती है तो प्रभावित इलाकों में अतिरिक्त कदम उठाने की आवश्यकता पड़ सकती है।
भारी बारिश और ऊपरी इलाकों के पानी का असर: गोमती नदी का जलस्तर सितंबर के अंतिम दिनों में हुई भारी बारिश के बाद तेजी से बढ़ा। लखनऊ में नदी का पानी सामान्य स्तर से करीब 2.44 मीटर यानी लगभग आठ फीट ऊपर पहुंच चुका है और जलस्तर 108.14 मीटर दर्ज किया गया है। प्रशासन के अनुसार शाहजहांपुर और सीतापुर की तरफ से आने वाला अतिरिक्त पानी भी इस वृद्धि की महत्वपूर्ण वजह है। गोमती नदी पीलीभीत से निकलती है और कई जिलों से गुजरने के बाद लखनऊ पहुंचती है। इस कारण नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में हुई भारी बारिश का प्रभाव लखनऊ में भी देखने को मिला। लगातार बढ़ते पानी के कारण पहले से प्रभावित निचले इलाकों का दबाव अब शहर के दूसरे हिस्सों तक पहुंच रहा है और जलभराव का दायरा बढ़ता जा रहा है।
तराई की बारिश ने बिगाड़ा हालात: 24 से 27 सितंबर के बीच तराई क्षेत्र में हुई भारी बारिश ने नदियों के जलस्तर को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाई। 26 सितंबर को लखीमपुर खीरी में 342 मिलीमीटर और सीतापुर में 273 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी। भारी बारिश के बाद नदियों में पानी तेजी से बढ़ा और इसका असर लखनऊ तक पहुंचा। फैजुल्लागंज तथा बक्शी का तालाब पहले से प्रभावित हैं, जबकि अब प्लासियो मॉल के सामने स्थित भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान परिसर के आसपास भी पानी भर गया है। इस बीच यातायात व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन सतर्क है। यातायात के सहायक पुलिस आयुक्त राधा रमन सिंह के मुताबिक फिलहाल प्रभावित इलाकों में यातायात चल रहा है, लेकिन यदि पानी का स्तर और ऊपर जाता है तो आवश्यकता के अनुसार यातायात रोकने का निर्णय लिया जा सकता है।
मंदिर और आश्रम भी जलभराव की चपेट में: गोमती नदी के बढ़े पानी का असर लखनऊ के धार्मिक स्थलों तक पहुंच गया है। चंद्रिका देवी मंदिर जाने वाले रास्ते पर पानी आने के अलावा लेटे हनुमान मंदिर और हनुमंत धाम परिसर में भी जलभराव की स्थिति बन गई है। हनुमंत धाम के महंत विष्णु दास ने बताया कि आश्रम में पानी पहुंचने के बाद वहां रहने वाले करीब 100 बटुकों को सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया है। धार्मिक स्थलों तक पानी पहुंचने से स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के लिए भी मुश्किल बढ़ गई है। जलस्तर लगातार ऊंचा बने रहने की स्थिति में इन क्षेत्रों में और अधिक सावधानी बरतने की जरूरत पड़ सकती है। फिलहाल प्रभावित परिसरों में मौजूद लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।
खेल आयोजन भी हुआ प्रभावित: गोमती नदी के बढ़ते पानी का असर केवल आवासीय और सार्वजनिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि खेल आयोजन भी प्रभावित हुआ है। इकाना स्टेडियम में होने वाले वीनू मांकड़ टूर्नामेंट को जलभराव के कारण दूसरी जगह स्थानांतरित करना पड़ा। स्टेडियम के आसपास पानी पहुंचने के साथ प्लासियो मॉल और सामने स्थित पुलिस मुख्यालय तथा 112 मुख्यालय के आसपास भी जलभराव बना हुआ है। लखनऊ विकास प्राधिकरण पानी को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बोल्डर लगा रहा है, जबकि यातायात पुलिस फिलहाल प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन बनाए हुए है। हालांकि जलस्तर में और वृद्धि होने पर यातायात रोकने की संभावना भी जताई गई है। ऐसे में गोमती के पानी की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और प्रशासन का प्रयास है कि जलभराव का विस्तार शहर के अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों तक न होने पाए।















































