ईरान और अमेरिका के बीच महीनों से जारी टकराव एक बार फिर गंभीर स्थिति में पहुंचता दिखाई दे रहा है। तेहरान ने संभावित अमेरिकी हमले की स्थिति में पहले से अधिक कड़ी जवाबी कार्रवाई की तैयारी के संकेत दिए हैं। ईरानी सैन्य कमांडरों की ओर से संभावित लक्ष्यों और जवाबी रणनीति पर चर्चा की जा रही है। दूसरी ओर पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ाए जाने की खबरों ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है। अमेरिकी सैन्य शक्ति की अतिरिक्त तैनाती की संभावना की खबरों के बीच ईरान ने भी अपने संभावित जवाब को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। इससे क्षेत्र में किसी भी छोटी घटना के बड़े सैन्य टकराव में बदलने की आशंका बढ़ गई है।
मध्यस्थता से समाधान की कोशिश: तनाव के बीच कतर और दूसरे क्षेत्रीय पक्ष दोनों देशों के बीच बातचीत का रास्ता खुला रखने की कोशिश कर रहे हैं। ईरान ने सात दिन की विश्वास बहाली योजना का प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और समुद्री यातायात को सामान्य करने जैसे कदमों पर चर्चा की जा रही है। कतर के माध्यम से ईरान को अमेरिका की प्रतिक्रिया भी मिली है। हालांकि बातचीत के दौरान दोनों पक्षों के बीच इस बात को लेकर मतभेद बने हुए हैं कि अलग-अलग कदम किस क्रम में लागू किए जाएं और सुरक्षा तथा परमाणु मुद्दों पर किस तरह की शर्तें स्वीकार की जाएं। इस वजह से बातचीत आगे बढ़ने के बावजूद समझौते की राह आसान नहीं है।
होर्मुज पर पूरी दुनिया की नजर: होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर मौजूदा गतिरोध का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है। यह मार्ग दुनिया के महत्वपूर्ण तेल और गैस परिवहन रास्तों में शामिल है और यहां जहाजों की आवाजाही में किसी भी बड़े व्यवधान से अंतरराष्ट्रीय बाजार प्रभावित हो सकते हैं। सितंबर में तरलीकृत प्राकृतिक गैस की आवाजाही बढ़ने के बावजूद जहाजों को सुरक्षा संबंधी जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है। समुद्री मार्ग की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता के कारण ऊर्जा कंपनियां और अंतरराष्ट्रीय बाजार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। किसी बड़े सैन्य टकराव की स्थिति में तेल और गैस की आपूर्ति पर व्यापक असर पड़ सकता है।
प्रतिबंधों से आर्थिक दबाव: अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखने के लिए नए प्रतिबंध भी लगाए हैं। अक्टूबर की शुरुआत में ईरान के वाहन और रेल क्षेत्रों के साथ-साथ उनसे जुड़े विदेशी आपूर्तिकर्ताओं को भी प्रतिबंधों के दायरे में लाया गया। इससे तेहरान के लिए पहले से दबाव में चल रही अर्थव्यवस्था में मुश्किलें बढ़ सकती हैं। ईरान की ओर से इन कदमों का विरोध किया गया है और तेहरान ने संकेत दिया है कि वह अमेरिकी दबाव को स्वीकार करने के बजाय अपने रणनीतिक तथा आर्थिक हितों की रक्षा के लिए कदम उठाता रहेगा। आर्थिक प्रतिबंधों के साथ सैन्य दबाव बढ़ने से दोनों देशों के बीच समझौते की प्रक्रिया और जटिल हो गई है।
ऊर्जा बाजार में बढ़ी बेचैनी: ईरान-अमेरिका तनाव का सीधा असर ऊर्जा बाजार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं पर दिखाई दे रहा है। अमेरिकी और ईरानी गतिरोध तथा पश्चिम एशिया में सैन्य गतिविधियों के कारण तेल और डीजल की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है। इसी दबाव के बीच समूह-7 देशों ने आपात भंडार से बड़ी मात्रा में डीजल और कच्चा तेल जारी करने पर सहमति जताई है। इस कदम का उद्देश्य ऊर्जा बाजार में संभावित कमी और कीमतों पर बढ़ते दबाव को कम करना है। हालांकि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में लंबे समय तक व्यवधान रहता है तो अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर इसका असर और व्यापक हो सकता है।
आगे क्या होगा, इस पर नजर: फिलहाल दोनों देशों के बीच स्थिति में एक साथ दो तस्वीरें दिखाई दे रही हैं। एक तरफ सैन्य तैनाती, आर्थिक प्रतिबंध और संभावित जवाबी कार्रवाई की तैयारियां तनाव बढ़ा रही हैं, वहीं दूसरी ओर कतर की मध्यस्थता से बातचीत जारी रखने की कोशिश की जा रही है। ईरान की ओर से होर्मुज को लेकर प्रस्ताव और अमेरिका की ओर से अपनी सुरक्षा संबंधी मांगों पर जोर के बीच समझौते का रास्ता आसान नहीं दिख रहा है। अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि दोनों पक्ष बातचीत को आगे बढ़ाते हैं या फिर होर्मुज जलडमरूमध्य और पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव का नया चरण शुरू होता है। आने वाले दिनों के राजनयिक और सैन्य कदम इस पूरे संकट की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे।














































