यूपी निकाय चुनाव में ओबीसी आरक्षण के मामले में कोर्ट ने आज भी सुनवाई के बाद अपने फैसले को सुरक्षित रखा है। अब अगली सुनवाई के लिए कोर्ट ने 27 दिसम्बर की तारीख तय किया है। वहीं, छुट्टी के बावजूद आज इस मामले पर सुनवाई हुई। न्यायालय ने मामले को हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति अथवा वरिष्ठ न्यायमूर्ति से अनुमति लेने के बाद शनिवार को सूचीबद्ध करने का आदेश दिया था। शुक्रवार को सूचीबद्ध मामलों की अधिकता की वजह से बहस नहीं हो सकी थी।
बता दें कि लखनऊ हाईकोर्ट में सुबह 11.15 बजे सुनवाई शुरू हुई जब कोर्ट रूम में जज पहुंचे और शाम 3.45 बजे फैसला आया। याचिकाकर्ता के वकील ने सबसे पहले अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण के लिए एक डेडिकेटेड कमीशन बनाया जाए। इसी की मांग हो रही है, जो राजनीतिक पिछड़ेपन की रिपोर्ट दें। उसी पर अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण तय किया जाए। एडवोकेट पी एल मिश्रा बहस कर रहे थे। उन्होंने सुरेश महाजन बनाम मध्य प्रदेश सरकार 2021 केस में सुप्रीम कोर्ट का आदेश विस्तार से पढ़ा। याचिका में कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट ने सुरेश महाजन केस में निर्णय में स्पष्ट आदेश दिया था कि नगर निकाय चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण से पहले ट्रिपल टेस्ट कराया जाएगा। अगर तिहरा परीक्षण की शर्त पूरी नहीं की जाती है तो अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के अलावा बाकी सभी सीटों को सामान्य सीट घोषित करते हुए चुनाव कराया जाना चाहिए।
महिला आरक्षण को आरक्षण श्रेणी में मानने के लिए बोला। जबकि याचिकाकर्ता के वकील ने महिला आरक्षण को 50% आरक्षण से बाहर रखा है। सरकारी वकील ने महिला आरक्षण को हॉरिजेंटल आरक्षण (क्षैतिज आरक्षण) बताया। सरकारी वकील ने माना कि राजनीतिक आरक्षण के लिए कोई आयोग नहीं बनाया गया है। कोर्ट ने पॉलिटिकल बैकवर्ड रिजर्वेशन और सोशल बैकवर्ड रिज़र्वेशन को अलग अलग माना।





























