यूपी चुनाव के दौरान छुट्टा गौवंश द्वारा फसलें बर्बाद करने का मामला खूब चर्चा में रहा। इसको लेकर लोगों में गुस्से को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक अहम फैसला किया है। इसके तहत छुट्टा गौवंश के लिए गो अभयारण्य तैयार करने की योजना बनाई गई है।
इसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से होगी। योजना के बारे में जानकारी रखने वालों के मुताबिक इसके लिए इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार को 52 हेक्टेयर जमीन दी गई है। यह प्रोजेक्ट पुरकाजी कस्बे में शुरू किया जाएगा। बताया गया है कि केंद्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट के लिए कुल 63 करोड़ रुपए का बजट सैंक्शन किया है, जिसे नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड द्वारा बनाया जाएगा। पांच हजार जानवरों वाली इस सैंक्चुरी के निर्माण कार्य के लिए टेंडर्स जल्द ही घोषित किए जाएंगे।
पार्लियामेंट कमेटी ने भी जताई थी चिंता
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश समेत कई जगहों पर छुट्टा पशुओं और छुट्टा गौवंश की समस्या काफी गंभीर रूप ले चुकी है। झुंड में निकलते यह पशु फसलें तो बर्बाद कर ही रहे हैं, लोगों की जान और हाईवे पर हादसों की भी वजह बन रहे हैं। ऐसे में इन छुट्टा पशुओं पर लगाम लगाने की मांग लगातार की जा रही है। हाईवे पर छुट्टा पशुओं के चलते बढ़े हादसों का संज्ञान पिछले साल ट्रांसपोर्ट, टूरिज्म और कल्चर की पार्लियामेंट स्टैंडिंग कमेटी ने भी लिया था। कमेटी ने कहा था कि नेशनल हाईवे पर हादसों की वजह बन रहे यह छुट्टा पशु चिंता का सबब बन चुके हैं। यह भी कहा गया था कि इस समस्या पर लगाम के लिए निगरानी की जरूरत है।
पीएम ने भी कहा था
योजना की जानकारी रखने वाले शख्स ने बताया कि उत्तर प्रदेश में इस मुद्दे को लेकर लोगों में काफी गुस्सा था। खासतौर पर उन किसानों में, जिनकी फसलें छुट्टा गौवंश के चलते बर्बाद हो रही थीं। हालांकि प्रदेश सरकार ने इन जानवरों पर लगाम के लिए कुछ कोशिशें की थीं, लेकिन इनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही थी। कार्यकर्ता के मुताबिक यूपी चुनाव के दौरान 10 मार्च को बहराइच में रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कहा था कि सरकार जल्द ही इस समस्या को सुलझाने के लिए कदम उठाएगी। केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक छुट्टा पशुओं की संख्या उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा है।
केंद्रीय मंत्री के क्षेत्र में
यह सैंक्चुरी अगले महीनों में बनने की उम्मीद जताई जा रही है। जिस इलाके में इसका निर्माण हो रहा है वह केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री संजीव बाल्यान के लोकसभा क्षेत्र में पड़ता है। जब इस बारे में उनसे बात की गई तो उन्होंने कहा कि मुजफ्फरनगर की सैंक्चुरी से जिस तरह का परिणाम मिलेगा, उसी के आधार पर अन्य राज्यों में इस प्रोजेक्ट को शुरू किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रति पशु 30 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से देगी। मुजफ्फरनगर में 500 पंचायतें हैं जो लागत का प्रतिशत देंगी और बाकी पैसा उद्योगों और सिविल सोसायटी के उन सदस्यों से आएगा जो दान करना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि सैंक्चुरी को चलाने के लिए एक कमेटी भी बनाई जा रही है, जिसकी जिला स्तर पर ऑफिसेज होंगी और वॉलंटियर्स भी होंगे। जानकारी के मुताबिक अभयारण्य में रहने वालों जानवरों के भोजन और उनकी स्वास्थ्य सुविधाओं का ख्याल तो रखा ही जाएगा, साथ ही इनके गोबर से गैस और उर्वरक का निर्माण होगा। इसके अलावा अगर कोई जानवर मर जाता है तो उसके अंतिम संस्कार के लिए इंसीनेरेटर्स भी लगाए जाएंगे।
यूपी सरकार के दावे से अलग है सच्चाई
उत्तर प्रदेश सरकार का दावा है कि उसने ब्लॉक स्तर पर 6,222 काऊ शेल्टर्स बना रखे हैं, जिनमें 8.55 लाख छुट्टा पशुओं को रखा गया है। इस बीच एक भाजपा ने कहा कि यह मुद्दा बीते कुछ वक्त से पार्टी के लिए चुनौती बना हुआ है। भाजपा नेता ने कि कहा कि गो अभयारण्य तो महज एक कदम है। इस समस्या को सुलझाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर नीति बनानी होगी। गौरतलब है कि भाजपा ने अपने 2019 के चुनाव घोषणापत्र में मोबाइल पशु औषधालयों का एक नेटवर्क स्थापित करने का वादा किया था। इसके जरिए घर-घर जाकर पशुओं के इलाज का दावा था। इसके अलावा टीकाकरण कवरेज का विस्तार करने और चारे की कमी को खत्म करने के लिए एक राष्ट्रीय फ़ीड और चारा मिशन शुरू करने की बात भी कही गई थी।



































