रूस भारत समेत 6 देशों के लिए अपने वीजा नियमों को आसान बनाने जा रहा है। न्यूज एजेंसी TASS ने उप विदेश मंत्री येवगेनी इवानोव के हवाले से सोमवार को यह जानकारी दी। इवानोव ने कहा, ‘हम अंतर-सरकारी समझौतों के मसौदे पर काम कर रहे हैं, जिसमें भारत, अंगोला, वियतनाम, इंडोनेशिया, सीरिया और फिलीपींस के साथ वीजा व्यवस्था का पारस्परिक सरलीकरण शामिल है।’ इससे पहले इवानोव ने कहा था कि रूस बहरीन, ओमान, सऊदी अरब, बहामास, बारबाडोस, हैती, जाम्बिया, कुवैत, मलेशिया, मैक्सिको और त्रिनिदाद और टोबैगो सहित 11 देशों के साथ वीजा-मुक्त यात्रा समझौतों पर काम कर रहा है।
वहीं, रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने वैश्विक एजेंडा वाले प्रमुख विषयों पर भारत के अत्यंत जिम्मेदार और महाशक्ति जैसे रुख की तारीफ की थी। उन्होंने भारत के साथ अपने देश के संबंधों को विशेष रणनीतिक साझेदारी करार दिया। उन्होंने कहा कि यह भारत की स्वतंत्रता से लेकर आज तक संबंधों के विशेष चरित्र को प्रदर्शित करता है। लावरोव ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी20 के अध्यक्ष के रूप में संतुलित और जिम्मेदार स्थिति पेश की। रूस-यूक्रेन संघर्ष और इस मुद्दे पर भारत के सतर्कतापूर्ण कूटनीतिक रुख के बीच ये बयान आए।
भारत का रूस से कच्चा तेल आयात रिकॉर्ड स्तर पर
गौरतलब है कि भारत का रूस से कच्चे तेल का आयात फरवरी में बढ़कर रिकॉर्ड 16 लाख बैरल प्रतिदिन हो गया है, जो उसके परंपरागत आपूर्तिकर्ताओं इराक व सऊदी अरब के संयुक्त तेल आयात से भी अधिक है। तेल के आयात-निर्यात पर नजर रखने वाली संस्था वर्टेक्सा ने बताया कि भारत जितनी मात्रा में तेल आयात करता है, उसकी एक तिहाई से अधिक आपूर्ति अकेले रूस ने की है। मास्को लगातार 5वें महीने भारत को कच्चे तेल का इकलौता सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी 2022 में युद्ध शुरू होने से पहले तक भारत के तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी एक फीसदी से भी कम होती थी। लेकिन पिछले महीने फरवरी में यह 35 फीसदी बढ़कर 16.20 लाख बैरल प्रतिदिन हो गई।
रूस के प्रति भारत के रवैये पर उठे सवाल
ध्यान रहे कि यूक्रेन पर हमले के बाद से पश्चिमी देशों की तरफ से रूस पर आर्थिक पाबंदियां लगाई गई हैं। रूस इससे निपटने के लिए इस समय भारत को रिकॉर्ड मात्रा में कच्चे तेल की बिक्री कर रहा है। इस तरह आर्थिक तौर पर मुश्किलों के दौर से गुजर रहे रूस के लिए भारत एक बड़े मददगार के तौर पर खड़ा हुआ है। हालांकि, रूस के प्रति भारत के इस रवैये की देश के राजनीतिक दलों की ओर से आलोचना भी हुई है। कांग्रेस नेता शशि थरूर ने शनिवार को कहा था कि भारत, यूक्रेन युद्ध में रूस के खिलाफ शत्रुतापूर्ण रवैया नहीं अपनाना चाहता। उन्होंने कहा कि यह उसके रुख में व्यावहारिक राजनीति शामिल है, लेकिन भारत रूस को यह बता सकता था कि उसका क्या सोचना है।
भारत और रूस के बीच ऐतिहासिक संबंध
भारत और रूस के बीच ऐतिहासिक रूप से विशेष संबंध रहे हैं। देश की आजादी के बाद से ही नई दिल्ली के लिए मास्को दृढ़ और वफादार दोस्त बना हुआ है। भारत की क्षमता को जानते हुए रूस और उसके नेताओं ने हमेशा देश और हमारे लोगों का सम्मान किया है। दोनों देशों के बीच स्वाभाविक रूप से लाभप्रद संबंध दशकों से बना हुआ है। भारत और रूस के बीच ऐसा अनूठा संबंध है, जो कि दूसरे देशों की ओर से तय नहीं किया जा सकता है। दोनों देशों के राजनयिक संबंध समय की कसौटी पर खरे उतरे हैं और आर्थिक रूप से मददगार रहे हैं।



































