कैबिनेट बैठक में राज्य के कर्मचारियों के लिए वार्षिक तबादला नीति पर मुहर उत्तर प्रदेश की सत्ता पर काबिज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के कामकाज और उनकी पदस्थापना को लेकर एक बहुत ही बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री की ही विशेष अध्यक्षता में बुलाई गई राज्य कैबिनेट की एक उच्च स्तरीय बैठक में उत्तर प्रदेश के तमाम सरकारी कर्मचारियों के लिए बनाई गई नई वार्षिक तबादला नीति को अंतिम रूप देते हुए उसे पूरी तरह से मंजूरी प्रदान कर दी गई है। इस अत्यंत महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक की कार्यवाही विधिवत समाप्त होने के बाद राज्य सरकार की ओर से आधिकारिक बयान जारी करते हुए यह स्पष्ट रूप से सूचित किया गया है कि कर्मचारियों से जुड़ी यह नई और बहुप्रतीक्षित तबादला नीति आगामी मंगलवार से संपूर्ण उत्तर प्रदेश राज्य में अत्यंत ही प्रभावी रूप से लागू कर दी जाएगी।
तबादलों में विभागीय मंत्री और विभागाध्यक्ष की संयुक्त और अत्यंत अहम भूमिका मंत्रिपरिषद द्वारा पारित की गई इस नई वार्षिक तबादला नीति के अंतर्गत किसी भी सरकारी कर्मचारी के स्थानांतरण की प्रक्रिया को लेकर अत्यंत ही स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इन नए और कड़े नियमों के तहत अब किसी भी विभाग के भीतर कर्मचारियों के स्थानांतरण का फैसला अकेले स्तर पर नहीं लिया जा सकेगा, बल्कि इसके लिए उस संबंधित विभाग के विभागाध्यक्ष (एचओडी) और उस विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे संबंधित मंत्री को एक साथ मिलकर ही तबादले का अंतिम निर्णय लेना होगा। इसके अलावा, विभागों में अनावश्यक फेरबदल की आशंकाओं को पूरी तरह से समाप्त करने के उद्देश्य से यह भी कड़ाई से तय कर दिया गया है कि कोई भी विभाग अपनी कुल स्वीकृत पदों की अधिकतम क्षमता का 10 प्रतिशत से अधिक तबादला किसी भी परिस्थिति में नहीं कर सकेगा।
सरकारी कामकाज में संतुलन, पारदर्शिता और अभूतपूर्व प्रभावशीलता लाने की कवायद इस नई और सुगठित स्थानांतरण नीति को अमलीजामा पहनाने के पीछे उत्तर प्रदेश सरकार का मुख्य लक्ष्य राज्य के प्रशासनिक ढांचे को और अधिक सुदृढ़ बनाना है। सरकार की ओर से यह स्पष्ट रूप से बताया गया है कि इस नीति को लागू करने का सर्वप्रमुख उद्देश्य राज्य की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था को पहले से कहीं अधिक पारदर्शी, अत्यधिक प्रभावी और निर्बाध रूप से सुचारू बनाना है। सरकार का यह भी दृढ़ता से मानना है कि तबादलों के इस नए और स्पष्ट नियम के लागू हो जाने से सभी सरकारी विभागों में कामकाज की गति पहले से कहीं अधिक बेहतर और तेज हो जाएगी, तथा पूरे प्रदेश में कर्मचारियों की तैनाती में एक ऐसा आदर्श संतुलन सुनिश्चित किया जा सकेगा जिससे शासन की सभी योजनाएं बिना किसी रुकावट के आम जनता तक पहुंच सकें।
किसानों की जमीन के लिए तय किए गए हाईटेंशन वायर मुआवजे में भारी वृद्धि राज्य के किसानों के हितों की रक्षा करने और उन्हें आर्थिक संबल प्रदान करने के लिए भी कैबिनेट की इस बैठक में एक अत्यंत ही सराहनीय और महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। खेतों के ऊपर से गुजरने वाले बिजली के भारी तारों के कारण किसानों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने हाईटेंशन वायर के नीचे आने वाली किसानों की जमीन के एवज में दिए जाने वाले मुआवजे में भारी वृद्धि कर दी है। सरकार के फैसले के अनुसार इस मुआवजे की राशि में 21 प्रतिशत से लेकर 33 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी की गई है। नए प्रावधानों के तहत अब खेत में लगने वाले बिजली के खम्भों के ठीक नीचे की जमीन और उस खम्भे के एक मीटर इर्द-गिर्द के दायरे में आने वाली जमीनों पर किसानों को सरकार की ओर से दुगना मुआवजा दिया जाएगा, जबकि केवल तार के नीचे आने वाले हिस्से के लिए तीस फीसदी मुआवजा निर्धारित किया गया है।
स्थानीय व्यंजनों को नई ब्रांडिंग देने के लिए एक जनपद, एक व्यंजन योजना लागू प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक और पाक कला विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान दिलाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बेहद ही अनूठी और शानदार योजना की शुरुआत की है। सरकार द्वारा पूरे यूपी में ‘एक जनपद, एक व्यंजन’ नाम की एक विशेष योजना को आधिकारिक रूप से लागू कर दिया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य हर जिले के खास और पारंपरिक व्यंजनों को बढ़ावा देना है। इस अनूठी योजना के तहत अब हर जिले के खास व्यंजनों का एक विशेष प्रकार का लोगो बनाकर उनकी व्यापक रूप से ब्रांडिंग की जाएगी। सरकार का यह भी कहना है कि यह पूरी योजना उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में एक साथ लागू की जाएगी, और इस विशाल कार्य को बिना किसी आर्थिक अड़चन के पूरा करने के लिए सरकार की ओर से 150 करोड़ रुपये का एक बहुत ही बड़ा और विशेष बजट भी जारी कर दिया गया है।
हरियाली और पर्यावरण संरक्षण के लिए पैंतीस करोड़ पौधे लगाने का विशाल लक्ष्य विकास और प्रशासन के साथ-साथ राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश के पर्यावरण को स्वच्छ और हरा-भरा बनाए रखने के लिए भी एक अत्यंत ही विशाल और महत्वाकांक्षी योजना को कैबिनेट की मंजूरी दी है। पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए राज्य सरकार ने यह फैसला किया है कि पूरे यूपी में हरियाली को बढ़ावा देने के लिए कुल 35 करोड़ नए पेड़-पौधे लगाए जाएंगे। इस महा-पौधारोपण अभियान की रूपरेखा कुछ इस तरह से तैयार की गई है कि इससे पर्यावरण के साथ-साथ भविष्य में फल उत्पादन को भी बढ़ावा मिल सके। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यह सख्त दिशा-निर्देश जारी किया है कि इस अभियान के तहत राज्य भर में लगाए जाने वाले कुल 35 करोड़ पौधों में से 30 फीसदी हिस्सेदारी केवल और केवल फलदार पेड़ों की ही होगी।



































