प्रधानमंत्री से शिष्टाचार भेंट और राजनीतिक संकेत बिहार के नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का मंगलवार को होने वाला दिल्ली दौरा राज्य की राजनीति में एक नई ऊर्जा का संचार कर रहा है। मुख्यमंत्री बनने के बाद अपने पहले दौरे पर वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलकर उनका आभार व्यक्त करेंगे और राज्य के विकास के रोडमैप पर चर्चा करेंगे। यद्यपि इसे एक औपचारिक ‘शिष्टाचार भेंट’ कहा जा रहा है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि इस मुलाकात के पीछे सत्ता के विकेंद्रीकरण और भविष्य की चुनावी रणनीतियों का बड़ा आधार छुपा हुआ है। दिल्ली में उनकी सक्रियता यह दर्शाती है कि केंद्र सरकार बिहार के प्रति अत्यंत गंभीर है।
अमित शाह के साथ रणनीतिक विमर्श दिल्ली पहुँचने के बाद सम्राट चौधरी की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मुलाकात प्रस्तावित है। अमित शाह, जो बिहार की राजनीति को सूक्ष्मता से समझते हैं, उनके साथ मुख्यमंत्री की यह बैठक प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर केंद्रित हो सकती है। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद जो नई चुनौतियां उभरी हैं, उनसे निपटने के लिए केंद्र का सहयोग अनिवार्य है। सूत्रों का कहना है कि इस मुलाकात में बिहार भाजपा के सांगठनिक ढांचे और सरकार के बीच समन्वय को लेकर भी महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए जा सकते हैं।
कैबिनेट विस्तार और मंत्रियों के चयन की प्रक्रिया बिहार सरकार का पूर्ण स्वरूप अभी सामने आना बाकी है। वर्तमान में केवल मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और उनके दो सहयोगी उप-मुख्यमंत्री—बिजेंद्र प्रसाद यादव और विजय कुमार चौधरी—ही कार्यरत हैं। चूंकि मंत्रिमंडल में अभी भी 33 स्थान रिक्त हैं, इसलिए दिल्ली में होने वाली बैठकें इन पदों को भरने के लिए निर्णायक होंगी। किन चेहरों को कैबिनेट में शामिल किया जाए और किन्हें राज्य मंत्री का दर्जा दिया जाए, इस पर गहन मंथन होगा। यह विस्तार बिहार की प्रशासनिक कार्यकुशलता को बढ़ाने के लिए अत्यंत आवश्यक माना जा रहा है।
सामाजिक इंजीनियरिंग और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का मुद्दा मंत्रिमंडल के गठन में सबसे बड़ी चुनौती सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की है। दिल्ली की बैठकों में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बिहार की ‘सोशल इंजीनियरिंग’ के तहत सभी प्रमुख जातियों और समुदायों को सरकार में उचित स्थान मिले। इसके साथ ही, सीमांचल, मिथिलांचल और मगध जैसे विभिन्न क्षेत्रों के विकास को ध्यान में रखते हुए क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का भी ख्याल रखा जाएगा। सम्राट चौधरी का प्रयास होगा कि वे एक सर्वसमावेशी सरकार का गठन करें जो राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध हो और जनता में विश्वास पैदा कर सके।
एनडीए शासन और राजनीतिक बदलाव की लहर बिहार में नीतीश कुमार के युग के बाद भाजपा के नेतृत्व में एनडीए सरकार का गठन एक ऐतिहासिक घटनाक्रम है। नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के फैसले ने राज्य की राजनीति की धुरी को पूरी तरह से बदल दिया है। पहली बार बिहार में भाजपा का मुख्यमंत्री होना यह स्पष्ट करता है कि राज्य की जनता और नेतृत्व अब एक नए विजन के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं। सम्राट चौधरी की यह दिल्ली यात्रा इसी नए विजन को धरातल पर उतारने की एक कोशिश है, जहाँ केंद्र और राज्य की ‘डबल इंजन’ सरकार मिलकर कार्य करेगी।
लोक भवन में शपथ और नई शुरुआत की दास्तां सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने का सफर 15 अप्रैल को पटना के लोक भवन में आयोजित भव्य शपथ ग्रहण समारोह के साथ शुरू हुआ। राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने उन्हें एक गरिमापूर्ण वातावरण में मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई थी, जिसके बाद से ही वे राज्य की समस्याओं के समाधान में जुट गए हैं। अब दिल्ली के शीर्ष नेतृत्व से मिलने वाला मार्गदर्शन उनकी सरकार को स्थायित्व और स्पष्टता प्रदान करेगा। यह दौरा न केवल सम्राट चौधरी के कद को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करेगा, बल्कि बिहार की प्रगति के लिए एक नई रूपरेखा भी तैयार करेगा।



































