चुनावी प्रक्रिया पर सपा प्रमुख का प्रहार: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने सत्ताधारी BJP पर चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने का कड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने जनता के सामने यह ज्वलंत सवाल रखा है कि क्या BJP सच में चुनाव जीतती है या सिर्फ मैनेजमेंट करती है। साल 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को ‘करो या मरो’ का कड़ा नारा दिया था। इसके साथ ही उन्होंने साल 2022 के चुनाव परिणामों की निष्पक्षता पर भी अपनी गहरी शंकाएं व्यक्त की हैं।
पूर्ण बहुमत रुकने का दिया कारण: चुनाव परिणामों पर चर्चा करते हुए उन्होंने मतगणना पूरी होने तक डटे रहने वाले अपने सभी कार्यकर्ताओं का आभार जताया। उनका स्पष्ट मानना है कि SP के नेताओं और कार्यकर्ताओं की अभूतपूर्व मजबूती के चलते ही इस बार चौंकाने वाले नतीजे आए। इसी मजबूत जमीनी पकड़ और संघर्ष के कारण BJP इस लोकसभा चुनाव में अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल नहीं कर सकी। कार्यकर्ताओं के इसी अदम्य साहस ने पार्टी को विषम परिस्थितियों में भी लड़ने की ताकत प्रदान की।
उपचुनाव में धांधली और अफसरों की भूमिका: उपचुनावों के दौरान हुई ज्यादतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने सत्ता के दुरुपयोग का गंभीर मामला उठाया है। उनका सीधा आरोप है कि कई मतदान केंद्रों पर मतदाताओं को डराने के लिए लोग रिवॉल्वर लेकर खड़े थे और उन्होंने ऐसे पीड़ितों की मदद की। Milkipur उपचुनाव का उदाहरण देते हुए उन्होंने वहां तैनात किए गए अधिकारियों की भूमिका पर भी तीखे सवाल उठाए। इसी क्रम में उन्होंने Kaustubh Singh नामक अधिकारी का विशेष जिक्र किया, जिनकी कार्यप्रणाली को लेकर पहले जांच हो चुकी है।
प्रेस वार्ता में उठाए अयोध्या और चंडीगढ़ के मुद्दे: Lucknow में स्थित समाजवादी पार्टी के मुख्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था पर चिंता जाहिर की। उन्होंने चुनावी पारदर्शिता की कमी को दर्शाने के लिए हाल ही में हुए Chandigarh मेयर चुनाव का प्रमुखता से हवाला दिया। इसके बाद उन्होंने जोर देकर कहा कि Uttar Pradesh के अंदर Ayodhya सीट पर मिली हार BJP के लिए एक बहुत बड़ा झटका थी। उनका दावा है कि Ayodhya जीतने के उद्देश्य से विरोधियों पर मुकदमे खत्म करने का अनुचित दबाव डाला गया था।
ममता बनर्जी के संघर्ष से की तुलना: चुनावी चुनौतियों का जिक्र करते हुए उन्होंने West Bengal के राजनीतिक हालात को UP की स्थिति से जोड़कर देखा। उन्होंने कहा कि West Bengal में वहां की जनता और मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने जो कठिन स्थिति का सामना किया है, वह किसी से छिपा नहीं है। उन्होंने दावा किया कि बिल्कुल वैसा ही कड़वा अनुभव वह साल 2022 के विधानसभा चुनाव में UP में खुद महसूस कर चुके हैं। सत्ता पक्ष द्वारा विपक्ष को दबाने का यह पैटर्न दोनों ही राज्यों में एक समान रूप से देखने को मिला है।
चुनावी माफिया और एजेंसियों का राजनीतिक इस्तेमाल: पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि BJP और उसके सभी सहयोगी दल अब एक बहुस्तरीय चुनावी माफिया का रूप ले चुके हैं। सरकार द्वारा राजनीतिक विरोधियों पर अनुचित दबाव बनाने के लिए ED और CBI जैसी केंद्रीय एजेंसियों का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। चुनाव के दौरान PDA के हर एक समर्थक को चिन्हित करके मतदान से रोकने की सुनियोजित साजिश रची गई थी। मतदान के वक्त सुरक्षा एजेंसियां खुद मौके पर पहुंचकर उनके समर्थकों को बाहर निकाल देती थीं, जिससे 2022 और 2024 में कई प्रत्याशी मामूली अंतर से हार गए।


































