समीकरणों में बदलाव: तमिलनाडु में सरकार बनाने को लेकर जारी खींचतान अब अपने सबसे निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। एक ओर विजय थलापति की पार्टी बहुमत का आंकड़ा पार करने के लिए छोटे दलों से गुहार लगा रही है। दूसरी ओर, पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी डीएमके और एआईएडीएमके के बीच सहयोग की खबरों ने सबको चौंका दिया है। सत्ता के गलियारों में अब नए और पुराने गठबंधनों की मजबूती को परखा जा रहा है।
लेफ्ट और वीसीके: विजय की पार्टी टीवीके ने सीपीआई, सीपीएम और वीसीके के नेताओं से समर्थन मांगकर गेंद उनके पाले में डाल दी है। इन दलों के नेताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक आज होने वाली है जिसमें अंतिम रणनीति तैयार की जाएगी। हालांकि ये दल डीएमके गठबंधन में रहे हैं, लेकिन कार्यकर्ताओं का एक हिस्सा टीवीके के साथ जाने का इच्छुक है। शाम तक आने वाला इन दलों का सामूहिक फैसला राज्य की नई सरकार की तस्वीर साफ करेगा।
बहुमत का पैमाना: गवर्नर आर्लेकर ने स्पष्ट कर दिया है कि वे सरकार बनाने के लिए केवल जादुई आंकड़े 118 को ही महत्व देंगे। उन्होंने अपनी हालिया टिप्पणियों में कहा कि विधायी शक्ति ही लोकतंत्र में सरकार चुनने का एकमात्र सही आधार है। गवर्नर का यह रुख उन दलों के लिए चुनौती है जो बिना स्पष्ट बहुमत के दावा पेश करना चाहते हैं। कांग्रेस और टीवीके ने इसे लेकर गवर्नर की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए विरोध दर्ज कराया है।
रिजॉर्ट और हस्ताक्षर: एआईएडीएमके प्रमुख पलनीस्वामी ने राजनीतिक घेराबंदी शुरू करते हुए अपने विधायकों को पुडुचेरी के एक सुरक्षित रिसॉर्ट में रखा है। वहां उन्होंने सरकार गठन के समर्थन में सभी विधायकों के विधिवत हस्ताक्षर भी एकत्र कर लिए हैं। पलनीस्वामी ने गवर्नर से मिलने का समय मांगा है ताकि वे अपनी पार्टी की स्थिति को मजबूती से रख सकें। उधर डीएमके नेतृत्व भी अपने कुनबे को एकजुट रखने के लिए विधायकों पर नजर रख रहा है।
पनयूर में बैठक: टीवीके के मुखिया थलापति विजय ने आज पनयूर स्थित अपने पार्टी मुख्यालय में नवनिर्वाचित विधायकों की इमरजेंसी बैठक बुलाई है। इस बैठक में वामपंथी दलों के संभावित नकारात्मक फैसले की स्थिति में ‘प्लान बी’ पर गहन चर्चा की जाएगी। विजय की टीम हर उस विकल्प पर विचार कर रही है जिससे डीएमके और एआईएडीएमके को सत्ता से दूर रखा जा सके। विधायक दल की इस बैठक के फैसलों पर पूरे तमिलनाडु की राजनीतिक निगाहें टिकी हुई हैं।
बौखलाहट और त्यागपत्र: अगर डीएमके और एआईएडीएमके मिलकर सरकार बनाने का अनूठा फैसला लेते हैं, तो टीवीके आक्रामक रुख अपना सकती है। रिपोर्ट्स की मानें तो ऐसी स्थिति में विजय अपने 107 विधायकों को सामूहिक रूप से इस्तीफा देने के लिए कह सकते हैं। यह कदम नई सरकार की वैधता पर सवाल खड़े करने और राजनीतिक दबाव बनाने के लिए उठाया जा सकता है। फिलहाल राज्य में हर दल एक-दूसरे की चालों को भांपने और मात देने की कोशिश कर रहा है।



































