जलडमरूमध्य में जहाजों का बड़ा जमावड़ा मौजूदा Iran युद्ध के कारण Hormuz जलडमरूमध्य के इलाके में भारी संख्या में मालवाहक जहाज फंस गए हैं। यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग 28 फरवरी से सभी तरह के वाणिज्यिक यातायात के लिए लगभग पूरी तरह से बंद पड़ा है। यह बंदी दरअसल US और Israel द्वारा किए गए सैन्य हमलों के जवाब में की गई एक बहुत ही सख्त कार्रवाई है। इसके कारण पूरी दुनिया के लिए इस सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते से व्यापारिक माल की जरूरी आवाजाही रुक गई है।
वैश्विक तेल बाजार पर भारी संकट समुद्री मार्ग पूरी तरह बंद होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर बहुत ही भयानक और नकारात्मक असर पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने इस वर्तमान तनावपूर्ण स्थिति को लेकर दुनिया के सामने एक गंभीर चेतावनी जारी की है। IEA के अनुसार यह पूरी स्थिति वैश्विक तेल बाजार के इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी आपूर्ति बाधा बन चुकी है। इस गंभीर बाधा को देखते हुए फ्रांस समेत तमाम देश चाहते हैं कि जलडमरूमध्य में हालात जल्द से जल्द सामान्य हों।
बीमा लागत में अप्रत्याशित बढ़ोतरी युद्ध के इस बेहद खतरनाक माहौल के कारण व्यापारिक जहाजों के दैनिक आर्थिक खर्च में भारी वृद्धि देखने को मिली है। इस रास्ते से गुजरने वाले सभी जहाजों के बीमा प्रीमियम में पहले के मुकाबले एक बहुत ही जबरदस्त उछाल आया है। उद्योग के मौजूदा अनुमान के मुताबिक बीमा लागत युद्ध से पहले की तुलना में 4 से 5 गुना अधिक तक बढ़ गई है। आर्थिक लागत बढ़ने से वैश्विक समुद्री व्यापार करने वाली सभी कंपनियों के लिए एक भारी संकट खड़ा हो गया है।
बहुराष्ट्रीय पहल की नई शुरुआत युद्ध के कारण उपजे इस गंभीर व्यापारिक संकट को खत्म करने के लिए फ्रांस ने एक बड़ी कूटनीतिक शुरुआत की है। यह विशेष प्रयास जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही की स्वतंत्रता को एक बार फिर से दोबारा बहाल करने के लिए है। इस बहुराष्ट्रीय कूटनीतिक पहल में दुनिया के 50 से अधिक देशों के शामिल होने और मिलकर काम करने की उम्मीद है। इस गठबंधन का एकमात्र लक्ष्य सैन्य सुरक्षा के जरिए इस व्यापारिक मार्ग को फिर से सुचारू और सुरक्षित बनाना है।
शिखर सम्मेलन में बनी रणनीति इस संकट के ठोस समाधान के लिए 17 अप्रैल को Paris में एक बहुत बड़े शिखर सम्मेलन का ऐतिहासिक आयोजन हुआ था। इस विशेष सम्मेलन में Emmanuel Macron और Keir Starmer ने कई देशों के शीर्ष प्रतिनिधियों की सफलतापूर्वक मेजबानी की थी। सम्मेलन के दौरान दुनिया भर के 30 से अधिक देशों के प्रमुख सैन्य योजनाकारों ने स्थिति पर विस्तार से चर्चा की थी। इन सभी सैन्य योजनाकारों ने मिलकर क्षेत्र में चलाए जाने वाले बहुराष्ट्रीय सैन्य अभियान की रणनीति को अंतिम रूप दिया था।
सैन्य बेड़े की लाल सागर में कूच इसी तय योजना के तहत फ्रांस का एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप अब मोर्चे पर आगे की ओर प्रस्थान कर चुका है। यह शक्तिशाली बेड़ा Suez Canal को पार करते हुए Red Sea के अशांत इलाके की तरफ तेजी से आगे जा रहा है। परमाणु ऊर्जा से चालित युद्धपोत Charles de Gaulle इस पूरे समुद्री सैन्य अभियान का मुख्य रूप से नेतृत्व कर रहा है। यह महत्वपूर्ण तैनाती दिखाती है कि सभी यूरोपीय देश इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग की सुरक्षा के लिए पूरी तरह से गंभीर हैं।



































