विस्तार की अंतिम रूपरेखा: उत्तर प्रदेश में काफी दिनों से चल रही मंत्रिमंडल फेरबदल की खबरों पर अब मुहर लग गई है। रविवार 10 मई को दोपहर ठीक साढ़े 3 बजे नए मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस संबंध में शनिवार शाम राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से भेंट की। इस मुलाकात के बाद नए मंत्रियों की सूची और कार्यक्रम का समय पूरी तरह तय हो गया।
खाली पदों का गणित: यूपी कैबिनेट में अधिकतम मंत्रियों की सीमा के अनुसार अभी 6 पद रिक्त पड़े हुए हैं। वर्तमान में 54 मंत्री पद पर हैं और 6 नए मंत्रियों के आने से यह संख्या 60 हो जाएगी। सरकार का लक्ष्य रिक्त पदों को भरकर क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को साधना नजर आ रहा है। इन 6 रिक्त स्थानों के लिए पार्टी के भीतर लंबी चर्चा के बाद सहमति बन पाई है।
शपथ लेने वाले संभावित नाम: मंत्री बनने वाले चेहरों में भूपेंद्र चौधरी, मनोज पांडेय और कृष्णा पासवान के नाम लगभग तय हैं। पूजा पाल, सुरेंद्र दिलेर और अशोक कटारिया को भी कैबिनेट में जगह मिल सकती है। हंसराज विश्वकर्मा, रोमी साहनी और आशा मौर्य के नाम भी चर्चाओं में लगातार बने हुए हैं। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से इन नामों पर जल्द ही अंतिम मुहर लगा दी जाएगी।
पदाधिकारियों की आपात बैठक: शनिवार की रात दिल्ली और लखनऊ के बड़े पदाधिकारियों के बीच महत्वपूर्ण फोन कॉल और बैठकें होंगी। मंत्रिमंडल के विस्तार और मंत्रियों की संख्या को लेकर चर्चा अब अपने अंतिम दौर में पहुंच गई है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने इस प्रक्रिया के चलते अपने कल के सभी कार्यक्रम निरस्त किए। पार्टी के कई कद्दावर नेताओं को जरूरी दिशा-निर्देशों के साथ लखनऊ पहुंचने के लिए कहा गया है।
मंत्रियों को विशेष निर्देश: सरकार की ओर से सभी वर्तमान मंत्रियों को रविवार दोपहर 3 बजे तक लोक भवन बुलाया गया है। कुछ मंत्रियों को पद से हटाए जाने की खबरों ने भी राजधानी में सियासी पारा चढ़ा दिया है। मंत्रियों के संभावित निष्कासन के बीच कई दावेदार अपनी पैरवी के लिए लखनऊ में कैंप कर रहे हैं। अधिकारी शपथ ग्रहण समारोह की सुरक्षा और प्रोटोकॉल की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे रहे हैं।
चुनावी साल की रणनीति: उत्तर प्रदेश में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर ही यह विस्तार किया गया है। सूत्रों के अनुसार, चुनावी दबाव के चलते किसी पुराने मंत्री को शायद ही पद से हटाया जाए। साथ ही मंत्रियों के विभागों में बड़े बदलाव होने की संभावना भी फिलहाल बहुत कम जताई गई है। इस विस्तार का मुख्य उद्देश्य सरकार के काम में गति लाना और सभी वर्गों को जोड़ना है।



































