द्विपक्षीय रक्षा वार्ता का आयोजन भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वियतनाम की अपनी यात्रा के दौरान वहां के रक्षा मंत्री से मुलाकात की है। वियतनाम की राजधानी हनोई पहुंचने पर उनका औपचारिक और भव्य स्वागत किया गया। इसके बाद उन्होंने वहां के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री जनरल फान वान जियांग के साथ द्विपक्षीय वार्ता का नेतृत्व किया। इस मंत्री स्तरीय बैठक में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को बढ़ाने पर सहमति बनी। दोनों नेताओं ने रक्षा के क्षेत्र में आपसी विश्वास को और गहरा करने की बात दोहराई।
संबंधों को मिला नया स्तर यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब हाल ही में वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम ने नई दिल्ली की यात्रा की थी। उनकी उस भारत यात्रा के दौरान दोनों लोकतांत्रिक देशों ने अपने संबंधों को और मजबूत किया था। भारत और वियतनाम ने अपने आपसी रिश्तों को उन्नत व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक अपग्रेड किया था। राष्ट्रपति तो लाम की यात्रा के कुछ दिनों बाद ही रक्षा मंत्री सिंह का यह दौरा हो रहा है। यह यात्रा दर्शाती है कि भारत अपने इस रणनीतिक साझेदार को कितना महत्व देता है।
साजो सामान का संयुक्त विकास आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सिंह और जनरल जियांग के बीच व्यापक चर्चा हुई है। इस वार्ता का एक मुख्य एजेंडा द्विपक्षीय रक्षा औद्योगिक सहयोग को तेजी से बढ़ावा देना रहा। अधिकारियों ने बताया कि दोनों देश सैन्य साजो सामान के संयुक्त विकास की संभावनाओं पर काम कर रहे हैं। इसके तहत सैन्य उपकरणों के संयुक्त उत्पादन को लेकर भी व्यावहारिक उपायों पर चर्चा की गई। दोनों देश अपनी सेनाओं को आधुनिक बनाने के लिए मिलकर काम करने को तैयार हैं।
हिंद प्रशांत क्षेत्र में शांति का लक्ष्य हनोई के लिए उड़ान भरने से पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपनी इस यात्रा के उद्देश्यों को स्पष्ट किया था। उन्होंने कहा था कि दो एशियाई देशों के उनके इस दौरे का मूल उद्देश्य साझेदारी को बढ़ाना है। वह दोनों देशों के बीच रक्षा औद्योगिक साझेदारी को और अधिक मजबूत करना चाहते हैं। इसके साथ ही उनका लक्ष्य समुद्री सहयोग को बढ़ाना और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करना है। वे इस क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के पक्षधर हैं।
तीन दिवसीय दक्षिण कोरिया दौरा वियतनाम का अपना आधिकारिक दौरा पूरा करने के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अपनी यात्रा के अगले पड़ाव पर जाएंगे। वह मंगलवार को तीन दिवसीय यात्रा पर दक्षिण कोरिया के लिए रवाना होने वाले हैं। दक्षिण कोरिया में भी उनका रक्षा सहयोग को लेकर कई बैठकों में भाग लेने का कार्यक्रम है। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा और दक्षिण चीन सागर के मौजूदा हालात पर चर्चा होगी। इस क्षेत्र में बदलते सुरक्षा समीकरणों के बीच यह दौरा बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दक्षिण चीन सागर का विवाद हाल के वर्षों में दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने दुनिया का ध्यान खींचा है। हाइड्रोकार्बन के विशाल स्रोतों से संपन्न इस सागर पर चीन अपना पूरा संप्रभुता का दावा ठोकता है। हालांकि इस क्षेत्र के अन्य देशों जैसे वियतनाम, फिलीपीन और ब्रुनेई द्वारा भी अलग दावे किए जाते हैं। भारत और कई अन्य लोकतांत्रिक देश हमेशा से इन क्षेत्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर जोर देते रहे हैं। भारत अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों और यूएनसीएलओएस (संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि) के पालन का पुरजोर समर्थन करता है।





































