खिताबी मुकाबले के लिए दोनों टीमें पूरी तरह से तैयार होकर मैदान पर उतरी थीं। इस फाइनल मैच का आयोजन Dambulla के प्रसिद्ध रंगीरी दांबुला इंटरनेशनल स्टेडियम में किया गया था। मैदान पर उतरने के बाद Sri Lanka A के कप्तान ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। उनका यह फैसला शुरुआती कुछ पलों के लिए ही सही प्रतीत हो रहा था। लेकिन India A के बल्लेबाजों ने जल्द ही विपक्षी टीम के इस फैसले को पूरी तरह गलत साबित कर दिया।
विस्फोटक बल्लेबाजी का आरंभ: India A के युवा बल्लेबाज Vaibhav Sooryavanshi ने पारी की पहली ही गेंद से अपने आक्रामक इरादे साफ कर दिए। उन्होंने गेंदबाज मोहम्मद शिराज की पहली गेंद पर ही एक शानदार चौका जड़ दिया। इसके बाद उन्होंने विपक्षी टीम के किसी भी गेंदबाज को बिल्कुल भी नहीं बख्शा। इस युवा खिलाड़ी ने पूरे मैदान के चारों तरफ चौकों और छक्कों की जबरदस्त बरसात कर दी। उनकी इस विस्फोटक पारी ने टीम को शानदार शुरुआत दिलाई और फाइनल का पूरा माहौल बदलकर रख दिया।
वर्ल्ड रिकॉर्ड का निर्माण: महज पंद्रह साल की उम्र में इस युवा खिलाड़ी ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली। उन्होंने अपनी पारी का पांचवां छक्का लगाते हुए केवल ग्यारह गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा कर लिया। इसी के साथ उन्होंने लिस्ट-ए क्रिकेट के इतिहास में सबसे तेज अर्धशतक लगाने का नया वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया। इस शानदार प्रदर्शन से उन्होंने क्रिकेट जगत का लगभग बीस साल पुराना रिकॉर्ड पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। इससे पहले साल दो हजार पांच-छह में बारह गेंदों में सबसे तेज अर्धशतक का रिकॉर्ड बना था।
शतक से चूकने का मलाल: सबसे तेज अर्धशतक पूरा करने के कुछ देर बाद ही यह खिलाड़ी अपने शतक के बेहद करीब पहुंच गया था। वे बहुत ही तेजी से अपने शतक की ओर आगे बढ़ रहे थे जिससे दर्शक बेहद रोमांचित थे। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से वे अपने जादुई आंकड़े से मात्र छह रन पहले ही आउट होकर पवेलियन लौट गए। आउट होने से पहले उन्होंने उनतीस गेंदों पर कुल चौरानवे रनों की एक यादगार और तूफानी पारी खेली। अपनी इस ऐतिहासिक पारी के दौरान उन्होंने दस शानदार चौके और आठ गगनचुंबी छक्के भी लगाए।
आलोचकों को करारा जवाब: यह ऐतिहासिक पारी इस युवा खिलाड़ी के लिए व्यक्तिगत रूप से भी बहुत ज्यादा मायने रखती है। इस फाइनल मुकाबले से पहले वे पूरी ट्राई सीरीज के दौरान लगातार रनों के लिए संघर्ष कर रहे थे। कुछ ही दिन पहले Sri Lanka A के एक खिलाड़ी के साथ हुई उनकी तीखी नोकझोंक भी चर्चा का विषय बनी थी। ऐसे में फाइनल के इस सबसे बड़े मंच पर हर किसी की नजर उनके प्रदर्शन पर ही टिकी हुई थी। अंततः उन्होंने दबाव को अवसर में बदलकर अपने आलोचकों को बल्ले से बेहद करारा जवाब दे दिया।
दोनों टीमों की प्लेइंग इलेवन: इस महत्वपूर्ण फाइनल मैच के लिए दोनों टीमों ने अपने सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को मैदान पर उतारा था। India A टीम की कप्तानी की जिम्मेदारी तिलक वर्मा के कंधों पर थी और रुतुराज गायकवाड़ भी इसका हिस्सा थे। भारतीय टीम में प्रियांश आर्य, कुमार कुशाग्र, सूर्यांश शेडगे, निशांत सिंधु और अनुकूल रॉय को भी जगह मिली थी। दूसरी तरफ Sri Lanka A टीम की कमान कप्तान सहान अराचिगे संभाल रहे थे और निरोशन डिकवेला विकेटकीपर थे। श्रीलंकाई प्लेइंग इलेवन में अविष्का फर्नांडो, सदीरा समरविक्रमा और मोहम्मद शिराज जैसे बेहतरीन खिलाड़ी भी शामिल थे।





































