वर्ष 2026 में विकसित हो रहा अल नीनो दुनिया के मौसम के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। संयुक्त राष्ट्र की मौसम एजेंसी विश्व मौसम संगठन ने आशंका जताई है कि इसकी तीव्रता 1950 के बाद दर्ज सबसे मजबूत घटनाओं में शामिल हो सकती है। वैज्ञानिकों के अनुसार, समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से काफी अधिक होने पर दुनिया के कई क्षेत्रों में गर्मी बढ़ सकती है और वर्षा का सामान्य चक्र प्रभावित हो सकता है। इसके कारण कुछ स्थानों पर सूखे की अवधि लंबी होने, जबकि दूसरे क्षेत्रों में भारी बारिश और बाढ़ का जोखिम बढ़ने की आशंका है। मौसम विशेषज्ञ इस स्थिति को लेकर इसलिए चिंतित हैं, क्योंकि प्राकृतिक अल नीनो घटना ऐसे समय में मजबूत हो रही है, जब मानव गतिविधियों के कारण वैश्विक तापमान पहले से बढ़ रहा है। दोनों प्रभावों के एक साथ सक्रिय होने से आने वाले महीनों में मौसम संबंधी चुनौतियां अधिक गंभीर हो सकती हैं।
विश्व मौसम संगठन ने फरवरी 2027 तक प्रभाव बने रहने की जताई संभावना: विश्व मौसम संगठन के आकलन के मुताबिक, अल नीनो का प्रभाव फरवरी 2027 तक जारी रह सकता है। मौसम विज्ञानी रयान माउ ने भी कहा है कि यह घटना सर्दियों तक अपनी अधिकतम ताकत के साथ बनी रह सकती है। उन्होंने वैश्विक तापमान को दर्शाने वाला एक नक्शा साझा करते हुए पृथ्वी के बड़े हिस्से में गर्मी का प्रभाव दिखाई देने की बात कही। उनके अनुमान के अनुसार, अमेरिका को छोड़कर कई क्षेत्रों में तापमान बढ़ने का असर अधिक महसूस हो सकता है। यदि अल नीनो लंबे समय तक मजबूत बना रहता है, तो दुनिया के विभिन्न हिस्सों में मौसमी परिस्थितियों में बदलाव जारी रह सकते हैं। वैज्ञानिकों के लिए यह स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसका प्रभाव किसी एक देश तक सीमित नहीं रहता। प्रशांत महासागर में होने वाले बदलाव दूर-दराज के क्षेत्रों में भी तापमान और बारिश के स्वरूप को प्रभावित कर सकते हैं।
प्रशांत महासागर में तापमान 3.7 डिग्री तक बढ़ने की आशंका: जलवायु वैज्ञानिक जीके हाउसफादर के अनुसार, इस वर्ष अल नीनो की स्थिति असाधारण स्तर पर पहुंच रही है। उन्होंने नीनो 3.4 क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से 3.4 डिग्री सेल्सियस अधिक होने की बात कही और इसे अब तक दर्ज घटनाओं की तुलना में बहुत मजबूत स्थिति बताया। मौसम विशेषज्ञ लियोन सिमंस ने इसी तीव्रता को देखते हुए इसे ‘सुपर-डुपर अल नीनो’ नाम दिया है। विश्व मौसम संगठन का अनुमान है कि 2026 के अंतिम महीनों में समुद्र की सतह का तापमान दुनिया के बड़े हिस्सों में सामान्य से अधिक रह सकता है। खास तौर पर मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में अक्टूबर से दिसंबर के दौरान तापमान सामान्य से 3.7 डिग्री सेल्सियस तक अधिक होने की संभावना जताई गई है। यह वृद्धि फारेनहाइट पैमाने पर लगभग 6.7 डिग्री के बराबर है और मौसम के वैश्विक स्वरूप पर असर डाल सकती है।
प्राकृतिक जलवायु चक्र का गर्म चरण है अल नीनो: अल नीनो प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के तापमान और वायुमंडलीय परिस्थितियों में बदलाव से जुड़ी प्राकृतिक घटना है। यह अल नीनो-दक्षिणी दोलन नामक जलवायु चक्र का गर्म चरण होता है। सामान्य तौर पर यह घटना हर दो से सात साल के बीच देखने को मिलती है, लेकिन इसकी तीव्रता हर बार अलग हो सकती है। जब प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय हिस्सों में पानी का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है, तो हवाओं और वायुमंडलीय गतिविधियों में बदलाव आता है। इसका प्रभाव दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में तापमान और बारिश के रूप में दिखाई देता है। कहीं गर्मी बढ़ती है, कहीं बारिश कम हो सकती है और कुछ क्षेत्रों में भारी वर्षा की परिस्थितियां बन सकती हैं। इसी वजह से अल नीनो को वैश्विक मौसम को प्रभावित करने वाली महत्वपूर्ण प्राकृतिक घटना माना जाता है।
वैश्विक तापमान के साथ बारिश और सूखे का संतुलन भी बिगड़ सकता है: अल नीनो के मजबूत होने से दुनिया के कई हिस्सों में सामान्य मौसमी परिस्थितियां बदल सकती हैं। कुछ क्षेत्रों में लंबे समय तक कम बारिश और सूखे की आशंका बढ़ सकती है, जबकि अन्य स्थानों पर सामान्य से अधिक वर्षा होने और भारी बारिश का खतरा पैदा हो सकता है। इससे कृषि, जल उपलब्धता और लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस घटना के प्रभाव को समझने के लिए केवल वैश्विक तापमान पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि वर्षा और क्षेत्रीय मौसम के बदलावों पर भी नजर रखना जरूरी है। मानव गतिविधियों के कारण बढ़ रहा जलवायु परिवर्तन इन प्रभावों को और गंभीर बना सकता है। ऐसे में आने वाले महीनों में मौसम संबंधी जोखिमों का आकलन और समय पर चेतावनी जारी करना महत्वपूर्ण होगा, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में तैयारी की जा सके।
शोधकर्ताओं ने 4.51 लाख अतिरिक्त मौतों का अनुमान जताया: शिकागो विश्वविद्यालय की जलवायु प्रभाव प्रयोगशाला के शोधकर्ताओं ने पिछले महीने अनुमान लगाया था कि अत्यधिक शक्तिशाली अल नीनो से जून 2026 से फरवरी 2027 के बीच दुनिया भर में 4 लाख 51 हजार तक अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं। यह अनुमान अल नीनो से जुड़ी अत्यधिक गर्मी और मौसम में बड़े बदलावों के संभावित स्वास्थ्य प्रभावों पर आधारित है। इसे निश्चित संख्या के बजाय संभावित जोखिम के आकलन के रूप में देखा जाना चाहिए। विश्व मौसम संगठन ने भी चेताया है कि अल नीनो पहले से जारी मानव-जनित जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को बढ़ा सकता है। प्रशांत महासागर में जमा गर्मी का असर वैश्विक तापमान और मौसम के पैटर्न पर पड़ने की आशंका है। फरवरी 2027 तक प्रभाव बने रहने के अनुमान के कारण वैज्ञानिक आने वाले महीनों की स्थिति पर नजर रख रहे हैं। इस दौरान तापमान, बारिश और सूखे से जुड़ी परिस्थितियां कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती हैं।















































