धर्म ग्रंथों के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi 2022) का पर्व मनाया जाता है। इस बार ये पर्व 31 अगस्त, बुधवार को मनाया जाएगा।
श्रीगणेश से जुड़ी कई कथाएं धर्म ग्रंथों में पढ़ने को मिलती हैं। महादेव द्वारा उनका मस्तक काटने की कथा भी बहुप्रचलित हैं। लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि एक श्राप की वजह से शिवजी को श्रीगणेश का मस्तक काटना पड़ा। इस कथा का वर्णन ब्रह्मवैवर्त पुराण में मिलता है। आगे जानिए इस कथा का रहस्य.
जब भगवान विष्णु ने नारद को बताया ये रहस्य
ब्रह्मवैवर्तपुराण के अनुसार एक बार नारद जी भगवान विष्णु के पास पहुंचे और बोले कि ” हे भगवान, महादेव को सभी की पीड़ा हरने और संसार के कष्ट दूर करने वाले हैं फिर भी उन्होंने प्रथम पूज्य श्रीगणेश को मस्तक क्यों काट दिया। क्या इसके पीछे भी उनकी कोई लीला थी।”
तब भगवान विष्णु ने नारदजी को प्राचीन काल की एक बताते हुए कहा कि ” किसी समय भगवान शिव को दो परम भक्त थे माली और सुमाली। एक बार उनका सूर्यदेव से भीषण युद्ध हुआ। जब वे सूर्यदेव से परास्त होने लगे तो उन्होंने शिवजी को पुकारा। अपने भक्तों की पुकार सुनकर महादेव तुरंत वहां आ गए।”
भगवान विष्णु ने अपने “अपने भक्तों की कष्ट में देखकर महादेव ने अपने त्रिशूल का प्रहार सूर्यदेव पर कर दिया, जिससे वे निश्तेज होकर अपने रथ से नीचे गिर पड़े। ऐसा होते ही संसार में अंधकार फैल गया। देवताओं में हाहाकार मच गया।”
उस समय सूर्यदेव के पिता महर्षि कश्यप ने अपने पुत्र को इस अवस्था में देखकर शिवजी को श्राप दिया कि “जैसा आज तुम्हारे प्रहार के कारण मेरे पुत्र की अवस्था हुई है, ऐसी ही स्थिति एक दिन आपके हाथों आपके पुत्र की भी होगी।”
कुछ देर बाद जब भोलेनाथ का क्रोध शांत हुआ तो उन्होंने सूर्यदेव की चेतना लौटा दी। ये देखकर ऋषि कश्यप को अपने किए पर बड़ा पछतावा हुआ। महादेव ने महर्षि कश्यप के इस श्राप को स्वीकार किया। इसी श्राप के कारण महादेव को श्रीगणेश का मस्तक काटना पड़ा।



































