राजधानी में रूह कंपा देने वाला हत्याकांड और साकेत कोर्ट का फैसला राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के अमर कॉलोनी (कैलाश हिल्स) क्षेत्र में एक वरिष्ठ आईआरएस अधिकारी की 22 वर्षीय पुत्री के साथ हुए जघन्य दुष्कर्म और हत्या के बहुचर्चित मामले में पुलिस ने मुख्य अभियुक्त राहुल मीणा को गिरफ्तार कर एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। गिरफ्तारी के तुरंत बाद पुलिस द्वारा आरोपी का अस्पताल में गहन मेडिकल परीक्षण संपन्न कराया गया, जिसके उपरांत उसे कड़ी सुरक्षा के बीच वापस अमर कॉलोनी पुलिस स्टेशन लाया गया। सभी कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करते हुए दिल्ली पुलिस ने आरोपी को साकेत स्थित सक्षम न्यायालय के समक्ष पेश किया और आगे की गहन जांच हेतु कस्टडी की मांग रखी। अदालत ने मामले की संवेदनशीलता और जघन्यता को संज्ञान में लेते हुए आरोपी राहुल मीणा को चार दिनों की पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश पारित कर दिया है। पुलिस ने न्यायालय को बताया कि अपराध के दृश्यों (क्राइम सीन) का पुर्ननिर्माण करने और अपराध से जुड़े अन्य साक्ष्यों की तलाश के लिए आरोपी को राजस्थान के अलवर ले जाना नितांत आवश्यक है।
आरोपी के शरीर पर जख्म और ढाई लाख रुपये सहित आभूषणों की जब्ती साकेत कोर्ट की अदालत कक्ष में सुनवाई के दौरान यह भी गौर किया गया कि अभियुक्त राहुल मीणा के शरीर पर चोट के कई ताज़ा निशान मौजूद थे। इस बात की तस्दीक स्वयं आरोपी ने अदालत के सामने अपना पक्ष रखते हुए की, जिसे रिकॉर्ड पर लिया गया। इसके अतिरिक्त, इस हत्याकांड की तफ्तीश में पुलिस को उस वक्त एक और अहम साक्ष्य मिला जब उन्होंने आरोपी के कब्जे से चोरी की गई भारी मात्रा में नकदी और कई कीमती आभूषण बरामद कर लिए। पुलिस के आधिकारिक बयानों और दर्ज की गई एफआईआर के अनुसार, आरोपी राहुल वारदात को सफलतापूर्वक अंजाम देने के बाद पीड़िता के आवास से लगभग ढाई लाख रुपये की भारी नकद धनराशि लूटकर फरार हो गया था। पुलिस ने इन सभी पैसों और गहनों की बरामदगी कर ली है और इसे मामले को पुख्ता करने के लिए अदालत में पेश किए जाने वाले सबूतों का अहम हिस्सा बना लिया गया है।
पुलिस की जांच रणनीति: सीसीटीवी फुटेज और अलवर से चुराया गया फोन इस अंधे और चुनौतीपूर्ण कत्ल की गुत्थी को सुलझाने के लिए दिल्ली पुलिस ने अपनी कई चुनिंदा टीमों को मैदान में उतारा और अपराध स्थल के इर्द-गिर्द लगे दर्जनों सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग का सूक्ष्मता से विश्लेषण किया। इस संपूर्ण जांच प्रक्रिया में तीन बेहद महत्वपूर्ण तकनीकी सुरागों ने पुलिस के लिए मील के पत्थर का काम किया—एक चोरी का स्मार्टफोन, एक होटल का वाई-फाई कनेक्शन और इंस्टाग्राम की गुप्त चैटिंग। तफ्तीश के दौरान यह हैरान कर देने वाली बात सामने आई कि पुलिस की आधुनिक ट्रैकिंग से बचने के लिए आरोपी अपना कोई निजी मोबाइल इस्तेमाल नहीं कर रहा था। इसके बजाय, उसने राजस्थान के अलवर शहर से एक अन्य व्यक्ति का मोबाइल फोन चुराया था और उसी उपकरण के सहारे वह पुलिस की आंखों में धूल झोंकने का निरंतर प्रयास कर रहा था ताकि कोई उसकी असली पहचान तक न पहुंच सके।
होटल का फ्री वाई-फाई और इंस्टाग्राम के माध्यम से रिश्तेदार से संवाद पुलिस से अपनी जान बचाते हुए और छिपने की गरज से अभियुक्त राहुल मीणा ने दिल्ली के द्वारका इलाके में स्थित एक होटल में पनाह ली। वहां उसने मोबाइल डेटा के बजाय होटल के मुफ्त वाई-फाई नेटवर्क का इस्तेमाल करते हुए इंटरनेट से जुड़ने का सुरक्षित रास्ता चुना। इसी होटल के कमरे में बैठकर राहुल ने सोशल नेटवर्किंग प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के मैसेंजर का उपयोग किया और गुरुग्राम में निवासरत अपने एक करीबी रिश्तेदार से निरंतर संवाद स्थापित किया। वह सोच रहा था कि बिना सिम कार्ड के कॉल किए केवल इंटरनेट कॉलिंग और चैटिंग के जरिए वह खुद को पुलिस की पहुंच से दूर रखेगा, परंतु यह साइबर कदम ही उसके अंत का सबसे बड़ा कारण बन गया और पुलिस को उसकी भनक लग गई।
आईपी एड्रेस की ट्रैकिंग और द्वारका के होटल में पुलिस की छापामारी दिल्ली पुलिस की उन्नत साइबर सेल ने अपराधी की डिजिटल पदचाप को पकड़ने के लिए इंटरनेट प्रोटोकॉल डिटेल रिकॉर्ड (IPDR) और अत्याधुनिक डिजिटल सर्विलांस प्रणाली का पूरी क्षमता से उपयोग किया। इस तकनीकी निगरानी के माध्यम से पुलिस ने इंस्टाग्राम चैट के ओरिजिन पॉइंट को खोज निकाला और आरोपी की रियल-टाइम लोकेशन को डिकोड कर लिया। साथ ही, पुलिस ने गुरुग्राम वाले उस रिश्तेदार को भी दबोच लिया और उससे गहन पूछताछ कर आरोपी की सटीक स्थिति और उसकी मनःस्थिति के बारे में महत्वपूर्ण सुराग प्राप्त किए। इन्हीं तमाम साइबर सबूतों, रिश्तेदार के बयानों और द्वारका के उस होटल की सीसीटीवी फुटेज की पुख्ता कड़ियों को जोड़ते हुए पुलिस ने एक सटीक और गुप्त छापेमारी की तथा शातिर अपराधी को होटल के कमरे से धर दबोचा।
भेदिया निकला हत्यारा: पूर्व नौकर होने का उठाया अनुचित और खौफनाक फायदा पुलिस द्वारा की जा रही सघन पूछताछ में इस हत्याकांड से जुड़ा एक अत्यंत खौफनाक और चौंकाने वाला सच यह उजागर हुआ कि हत्यारा राहुल मीणा पीड़िता के परिवार के लिए कोई अजनबी शख्स नहीं था, बल्कि वह घर का भेदी था। जांच में यह बात पूरी तरह से साबित हो चुकी है कि वह पहले इसी घर में घरेलू सहायक (नौकर) के तौर पर काम कर चुका था और परिवार की पूरी दिनचर्या से भली-भांति परिचित था। उसे इस बात का पूरा इल्म था कि परिवार के सदस्य कब घर से बाहर रहते हैं, कौन कब लौटता है और घर की सुरक्षा व्यवस्था की कमियां क्या हैं। अपनी इसी पुरानी जानकारी का शातिराना तरीके से फायदा उठाते हुए उसने इस खौफनाक अपराध की रूपरेखा तैयार की और उसे बेखौफ होकर अंजाम तक पहुंचाया। वर्तमान में दिल्ली पुलिस की टीम आरोपी से रिमांड के दौरान लगातार पूछताछ कर रही है और इस हत्याकांड के हर छोटे-बड़े पहलू की गहराई से जांच जारी है।



































