वेद विद्या गुरुकुल में मासूम छात्र की संदिग्ध मृत्यु और खौफनाक आरोप उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर स्थित महाराजपुर थाना क्षेत्र के गौरिया गांव में उस समय कोहराम मच गया, जब वहां के 11 वर्षीय निवासी दिव्यांश द्विवेदी (दीपू) का शव संदिग्ध अवस्था में उसके घर पहुंचा। यह मासूम बच्चा लखनऊ के रामानुज भागवत वेद विद्या गुरुकुल में शिक्षा ग्रहण कर रहा था, जहां रहस्यमयी परिस्थितियों में उसकी जान चली गई। परिजनों ने इस मौत को एक सामान्य घटना मानने से साफ इनकार करते हुए गुरुकुल प्रबंधन और संचालक पर हत्या के बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। परिवार का स्पष्ट कहना है कि उनके बच्चे के साथ गुरुकुल की चारदीवारी के भीतर घोर यातनाएं दी गईं और क्रूरतापूर्ण प्रताड़ना के बाद उसे मौत के घाट उतार दिया गया। इसके अलावा, बच्चे के साथ कुकर्म किए जाने की भयानक आशंका भी जताई गई है। मृतक दिव्यांश के शरीर पर जगह-जगह मौजूद चोटों के निशान, नीले-काले धब्बे और जलने जैसे घावों ने इन आरोपों को बेहद पुख्ता बना दिया है, जिससे पूरा परिवार स्तब्ध और गहरे शोक में डूबा हुआ है।
बीमारी का झूठा बहाना और शव को लावारिस छोड़ने की अमानवीय घटना परिजनों द्वारा साझा किए गए घटनाक्रम के अनुसार, दिव्यांश को अच्छी तालीम दिलाने के उद्देश्य से महज कुछ दिन पूर्व, 15 अप्रैल को ही लखनऊ के इस गुरुकुल में भेजा गया था। दुर्भाग्यवश, चंद दिनों के भीतर ही वह इस भयानक त्रासदी का शिकार बन गया। बुधवार को गुरुकुल के संचालक कन्हैया मिश्रा ने दिव्यांश के पिता नरेंद्र द्विवेदी (पप्पू) को फोन कर यह मनगढ़ंत कहानी बताई कि उनके बेटे की तबीयत अचानक बहुत बिगड़ गई है। इस सूचना के कुछ ही घंटों बाद, एक अज्ञात चार पहिया वाहन से गुरुकुल के लोग कानपुर पहुंचे और बच्चे को मृत अवस्था में उसके घर के बाहर फेंक कर चुपचाप निकल गए। जब परिजनों की नजर अपने लाडले पर पड़ी, तो उसकी हृदयविदारक हालत देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। दिव्यांश का शरीर पूरी तरह से बर्फ की तरह ठंडा हो चुका था और उसके नन्हे शरीर पर मौजूद अनगिनत चोटों के निशान प्रताड़ना की खौफनाक दास्तां बयां कर रहे थे।
चाचा ने खोले यातनाओं के राज, शरीर पर मिले गहरे जख्मों के निशान इस মর্মান্তिक घटना के चश्मदीद गवाह बने दिव्यांश के चाचा जितेंद्र कुमार द्विवेदी ने अपनी रुलाई रोकते हुए बताया कि जब उन्होंने अपने भतीजे के शव को करीब से देखा, तो उसके हाथों, पैरों, पीठ और शरीर के अन्य हिस्सों पर गहरे काले निशान और चोटों के बड़े-बड़े घाव मौजूद थे। जितेंद्र ने बताया कि यह कोई सामान्य चोटें नहीं थीं, बल्कि इन निशानों को देखकर यह स्पष्ट हो रहा था कि मासूम को किसी भारी वस्तु से बहुत ही बेदर्दी और बेरहमी के साथ पीटा गया है। उन्होंने यह भी खौफनाक दावा किया कि बच्चे के शरीर पर कुछ ऐसे गोल घाव थे जो स्पष्ट रूप से सिगरेट या किसी अन्य गर्म चीज से जलाए जाने का संकेत दे रहे थे। चाचा ने गुरुकुल प्रबंधन के बीमारी वाले दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यदि उनका बच्चा सिर्फ बीमार पड़ा था, तो उसके शरीर पर ये बर्बरतापूर्ण चोटें और जलने के निशान कहां से आए? यह पूरी तरह से एक सुनियोजित हत्या का मामला है।
बहन की आखिरी गुफ्तगू और मासूम के खौफनाक चुप्पी का रहस्य दिव्यांश की बड़ी बहन दीपिका द्विवेदी ने रोते हुए उस आखिरी पल को याद किया जब उसने अपने भाई की आवाज सुनी थी। दीपिका के अनुसार, मंगलवार की सुबह जब उसने दीपू से फोन पर बातचीत की थी, तब वह एकदम स्वस्थ और खुशमिजाज लग रहा था। उस पूरी बातचीत के दौरान दिव्यांश ने किसी भी प्रकार की शारीरिक या मानसिक परेशानी का जरा भी जिक्र नहीं किया था। ऐसे में यह सवाल सभी को परेशान कर रहा है कि जो बच्चा मंगलवार तक बात कर रहा था, बुधवार को उसकी रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत कैसे हो गई और उसका शव घर के बाहर क्यों छोड़ दिया गया। दीपिका ने भी अपने भाई के शरीर पर मिले दागों को देखकर यह आशंका जताई है कि गुरुकुल के भीतर जल्लाद लोग उसे डराने के लिए सिगरेट से जलाते होंगे। बहन का मानना है कि दरिंदों के खौफ और खौफनाक यातनाओं के चलते ही शायद उसका मासूम भाई घर वालों को अपनी तकलीफ बयां नहीं कर सका।
इकलौते चिराग के छिनने का गम और पूरे गांव में न्याय के लिए उबाल यह त्रासदी द्विवेदी परिवार के लिए एक ऐसा वज्रपात है जिसकी भरपाई जीवन भर नहीं हो सकती, क्योंकि 11 वर्षीय दिव्यांश उनके परिवार का इकलौता पुत्र था। उसके पिता नरेंद्र द्विवेदी दिन-रात एक प्राइवेट फैक्ट्री में मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पालते हैं, और अब उनके बुढ़ापे की लाठी टूट चुकी है। मां नीरज द्विवेदी की आंखों से आंसू सूखने का नाम नहीं ले रहे हैं और उनकी हालत देखकर पत्थर भी पिघल जाए। इस मासूम बच्चे की इस तरह से हुई नृशंस हत्या ने पूरे गौरिया गांव को हिला कर रख दिया है। शोक में डूबे गांव वाले अब सड़कों पर उतर आए हैं और उनके दिलों में हत्यारों के खिलाफ भारी गुस्सा धधक रहा है। पूरा गांव एक स्वर में यह मांग कर रहा है कि गुरुकुल के नाम पर हैवानियत का खेल खेलने वाले इन दोषियों को तुरंत गिरफ्तार कर फांसी की सजा दी जाए।
कानून का शिकंजा: पुलिस की गहन तफ्तीश और निष्पक्ष जांच का भरोसा इस संवेदनशील और गंभीर मामले की सूचना मिलते ही कानपुर पुलिस कमिश्नरेट ने तुरंत बड़े कदम उठाए। एडीसीपी पूर्वी अंजली विश्वकर्मा और चकेरी क्षेत्र के एसीपी अभिषेक कुमार पांडेय दलबल के साथ फौरन गांव पहुंचे और स्थिति को संभाला। पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने के लिए तत्काल फोरेंसिक एक्सपर्ट्स की टीम को मौके पर तलब किया। शव का विधिवत पंचनामा कर उसे पोस्टमार्टम के लिए सुरक्षित भेज दिया गया है। एडीसीपी अंजली विश्वकर्मा ने पीड़ित परिवार को निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाते हुए स्पष्ट किया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए पोस्टमार्टम डॉक्टरों के एक विशेष पैनल द्वारा किया जाएगा और इसकी पूरी वीडियोग्राफी भी होगी। पुलिस ने इस जघन्य कांड की त्वरित जांच के लिए एक एसआईटी (SIT) का गठन किया है। महाराजपुर थाने में गुरुकुल संचालक कन्हैया मिश्रा व अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर हत्या व अन्य धाराओं में कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



































