संजीव कुमार शुक्ला
लखनऊ : श्री श्री राधा रमण बिहारी मंदिर (इस्कॉन) सुशांत गोल्फ सिटी, लखनऊ द्वारा श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के उपरांत दो दिवसीय सेमिनार दिनांक 10 एवं 11 सितम्बर 2022 को आयोजित किया गया, जिसमें द्वितीय दिवस ग्यारह सितम्बर को मुख्य अतिथि के रूप में श्रीयुत सिद्धार्थ जी, उपजिलाधिकारी, सरोजनी नगर, श्रीयुत बलबीर सिंह लूथरा, डी०जी०एम०, बैंक ऑफ बड़ौदा एवं श्रीयुत मोहित पांडेय जी ने दीप प्रज्जवलित कर सेमिनार का प्रारंभ किया।मंदिर अध्यक्ष एवं वक्ता श्रीमान अपरिमेय श्यामदास प्रभु जी ने बताया कि हिन्दू धर्म में 33 करोड़ देवी देवताओं में से परम पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण ही मूल हैं। मुस्लिम धर्म में इन्हें अल्लाह और ईसाई धर्म में गॉड के नाम से जाना जाता है। उन्होंने हमें बताया कि आध्यात्मिक दृष्टि से देखने पर यह ज्ञान होता है कि अच्छे लोगों के साथ बुरा तथा बुरे लोगों के साथ अच्छा कभी नहीं हो सकता है। यह तभी तक रहता है जब तक व्यक्ति के पुण्य उसके साथ रहते हैं।
अंत मे उन्होंने बताया कि यदि हम आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो सभी धर्म ग्रंथों में समान शिक्षा दी गयी है। जिस तरह से कुरान के अनुसार अल्लाह ही परम ईश्वर है, बाइबल के अनुसार ईसा मसीह ही परम ईश्वर है। ठीक उसी प्रकार भगवत गीता के अनुसार परम पुरषोत्तम श्रीकृष्ण ही परम ईश्वर हैं। अलग अलग धर्मों में उन्हें अलग अलग नामों से जाना जाता है। जिस तरह से सूर्य एक ही होता है लेकिन अलग अलग जगह पर अलग अलग भाषा मे उसको अलग अलग नाम दिया गया है। ठीक उसी तरह ईश्वर भी एक ही है उसे अलग अलग नामों से पुकारा जाता है।सेमिनार में लखनऊ एवं आस-पास के तमाम गणमान्य भक्त उपस्थित रहे, सभी भक्तों ने श्रीकृष्ण भगवान के भजन कीर्तन तथा विशेष भोजन प्रसाद का आनंद उठाया। भोजन प्रसाद लखनऊ के व्यवसायी श्री दिनेश श्रीवास्तव प्रभु जी ने श्री श्री राधा रमण बिहारी जी के चरणों मे अर्पित किया।
जबकि इससे पहले दिन प्रथम दिवस मंदिर अध्यक्ष एवं वक्ता श्रीमान अपरिमेय श्यामदास प्रभु जी ने बताया कि अधिकतर संसार मे हम अपनी पहचान अपने नाम, ख्याति एवं अपने शरीर से करते हैं, लेकिन वास्तव में हम भगवान के अंश हैं। हम जीवात्मा हैं और हम जितना सुख लेना चाह रहे हैं, वह शरीर के स्तर पर पा लेना चाह रहे हैं। शरीर से मिलने वाला सुख क्षणिक है स्थाई सुख नही है। स्थायी सुख ऐसा सुख है, जो निरन्तर बढ़ता जाए उसे आनंद बोलते हैं।आनंद को प्राप्त करने के लिये हमे आध्यात्मिक जीवन को गंभीरता से लेना पड़ेगा फिर निश्चित रूप से हम आनंद को प्राप्त कर सकते हैं और आध्यात्मिक आनंद की प्राप्ति के लिये अध्यात्मिक ज्ञान का होना अति आवश्यक है। बिना आध्यात्मिक ज्ञान के कोई भी व्यक्ति आध्यात्मिक जीवन को सही तरीके से नही अपना सकता। सामान्य तौर पर देखा जाता है कि संसार मे बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो आध्यात्मिक जीवन को अपनाने में वास्तव में आध्यात्मिक ज्ञान को गंभीरता से नहीं लेते और कोई भी ज्ञान तब एक फलीभूत नहीं होता जब तक क्रमबद्ध तरीके से न लिया जाए तो वह ज्ञान हमारे जीवन पर प्रभाव नहीं डालता।अतः वह ज्ञान हमारे हृदय में उतर नहीं पाता। इसी प्रकार से आध्यात्मिक जीवन को क्रमबद्ध तरीके से लेना चाहिए और इसी परम्परा में दो दिवसीय सेमिनार रखा गया। इसके बाद 64 दिनों की क्लासेस का कोर्स होगा। इसमे लोगों को उचित तरीके से आध्यात्मिक दिशा दी जाएगी।



































